Wed Oct 7, 2026 | 07:03 PM IST

Medically Reviewed by Vandana Rajput , Antenatal and Postnatal Nutrition & Diabetes Educator

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में जरूर खाएं चुकंदर, बच्चा होगा गोल-मटोल

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में चुकंदर (Beetroot) खाना पूरी तरह सेफ होता है। इससे शिशु का विकास बेहतर होता है। जानें, इसके क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं।
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में जरूर खाएं चुकंदर, बच्चा होगा गोल-मटोलगर्भावस्था की तीसरी तिमाही में जरूर खाएं चुकंदर, बच्चा होगा गोल-मटोल

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं क्या खा-पी रही हैं, इस पर उन्हें कड़ी नजर रखनी पड़ती है। उन्हें इस दौरान ऐसी कोई चीज नहीं खानी चाहिए, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर नेगेटिव असर पड़ता है। जैसे इन दिनों जंक या प्रिजर्व्ड फूड खाने की खास मनाही होती है। इनमें पोषक तत्वों की कमी होती है और शिशु का विकास भी बाधित होता है। वहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। विशेषकर, प्रेग्नेंसी में आयरन के स्तर को मेंटेन करना जरूरी होता है, क्योंकि इससे शरीर में ब्लड फ्लो सही बना रहता है। शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ाने के लिए कई महिलाएं अपनी डाइट में चुकंदर को शामिल करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में चुकंदर (Beetroot) खाना सेफ होता है? आइए, जानते हैं इस बारे में नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत क्या बताती हैं।

क्या गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में चुकंदर खाना सेफ है?- Can We Eat Beetroot In The Third Trimester

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निश्चित रूप से गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में चुकंदर खाना पूरी तरह सेफ होता है। चुकंदर खाने से शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है और ब्लड वॉल्यूम भी बढ़ता है। इससे प्रेग्नेंट महिला को फॉलेट मिलता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए लाभकारी माना जाता है। यहां तक कि कई डॉक्टर प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में चुकंदर का जूस पीने की सलाह देते हैं। विशेषकर, जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी में एनीमिया की परेशानी है, उन्हें चुकंदर (Beetroot) का सेवन जरूर करना चाहिए।

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प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में चुकंदर खाने के फायदे- Benefits Of Eating Beetroot In The Third Trimester

एनीमिया से छुटकारा

एनीमिया एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, ब्लड सर्कुलेशन सही तरह से नहीं होता है। कहने की जरूरत नहीं है कि प्रेग्नेंसी के थर्ड ट्राइमेस्टर में महिलाओं के शरीर में पर्याप्त ब्लड होना चाहिए। यह शिशु के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। वहीं, जब महिलाएं चुकंदर (Beetroot) का सेवन करती हैं, तो इससे ब्लड वॉल्यूम बढ़ता है और रेड ब्लड सेल्स प्रोडक्शन भी बेहतर होता है। प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में यह बहुत जरूरी होता है।

ब्लड फ्लो बेहतर होता है

चुकंदर (Beetroot) में नाइट्रेट होता है, जो कि नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है। इससे ब्लड वेसल्स को खुलने और ब्लड फ्लो के बेहतर होने में मदद मिलती है। इस लिहाज से भी देखा जाए, तो प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में इसका सेवन करना काफी अच्छा होता है। वैसे भी तीसरी तिमाही में ब्लड फ्लो का सही होना अधिक जरूरी माना जाता है। इस समय तक शिशु का वजन बढ़ जाता और उसका विकास तेजी से हो रहा होता है।

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पोषक तत्वों से भरपूर

US Food And Drug Administration (FDA) के अनुसार, "चुकंदर (Beetroot) फाइबर का एक बेहतरीन स्रोत है। इसके केवल एक कप (लगभग 136 ग्राम) सेवन से शरीर को करीब 4 ग्राम फाइबर मिलता है। एक वयस्क के लिए प्रतिदिन आवश्यक 28 ग्राम फाइबर की मात्रा का लगभग 14 प्रतिशत अकेले पूरा कर देता है।" यही नहीं चुकंदर (Beetroot) में कई तरह के अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जैसे विटामिन सी, पोटैशियम आदि। प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में महिलाओं को कब्ज की समस्या अधिक हो जाती है। ऐसे में चुकंदर (Beetroot) का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्या दूर होती है और ओवर ऑल हेल्थ में भी सुधार होता है। 

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में कब न खाएं चुकंदर

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  1. चुकंदर में ऑक्सालेट होता है। इसलिए, अगर किसी प्रेग्नेंट महिला को किडनी से जुड़ी परेशानी है, तो इसका सेवन न करें।
  2. चुकंदर में काफी मात्रा में नाइट्रेट होता है, प्रेग्नेंसी में इस कंपाउंड का सेवन सीमित करना चाहिए।
  3. चुकंदर (Beetroot) के सेवन की वजह से मल का रंग लाल हो सकता है। यह पूरी तरह सामान्य है। हां, अगर आपको मल में खून आ रहा है, तो डॉक्टर के पास जाएं।
  4. चुकंदर का जूस पीने के बजाय इसे साबुत खाएं। चुकंदर (Beetroot) के जूस में चीनी मिलाकर पीने की वजह से ब्लड शुगर स्पाइक कर सकता है। डायबिटीज से ग्रस्त महिलाओं के लिए यह सही नहीं है।

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में चुकंदर खाना काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे महिला के शरीर में ब्लड की कमी नहीं होती है और आयरन का स्तर संतुलित रहता है। यहां तक कि चुकंदर में मौजूद अन्य पोषक तत्व शिशु के विकास में अहम भूमिका अदा करते हैं। आप चाहें, तो चुकंदर का जूस बनाकर भी पी सकते हैं। हां, बस यह ध्यान रखें कि जिन्हें डायबिटीज है, उन्हें इसका सेवन कितनी मात्रा में करना है, इस बारे में सीधे डॉक्टर से जानें।

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FAQ

  • क्या गर्भावस्था में चुकंदर खाने से बच्चे का रंग लाल या साफ होता है?

    चुकंदर (Beetroot) खाने से बच्चे के शरीर का रंग प्रभावित नहीं होता है। यह महज एक मिथक है कि चुकंदर से बच्चे का रंग लाल हो सकता है। किसी भी तरह की चीजें खाने से बच्चे का रंग प्रभावित नहीं होता है। हां, इसकी वजह से बच्चे के विकास पर असर पड़ता है।
  • एक दिन में कितना चुकंदर खाना सुरक्षित है?

    गर्भावस्था में रोजाना आधा या एक मध्यम आकार का चुकंदर(Beetroot) खाना काफी होता है।
  • क्या चुकंदर खाने से यूरिन का रंग बदल सकता है?

    हां, चुकंदर (Beetroot) की वजह से यूरिन और मल का रंग लाल या गुलाबी हो सकता है। इसलिए, इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jan 01, 2026 20:00 IST

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