IIT दिल्ली ने विकसित किया कोविड-19 की जांच करने का नया तरीका, अब बेहद कम खर्च में हो सकेगी जांच

देशभर में कोरोना वायरस से मची तबाही के बीच आईआईटी दिल्ली ने खोज निकाला जांच का नया तरीका, अब बेहद ही कम दामों में हो सकेगी कोविड-19 की जांच।

Vishal Singh
लेटेस्टWritten by: Vishal SinghPublished at: Apr 24, 2020
IIT दिल्ली ने विकसित किया कोविड-19 की जांच करने का नया तरीका, अब बेहद कम खर्च में हो सकेगी जांच

विश्वभर में काफी तेजी के साथ अपने पैर पसार रहा कोरोना वायरस ने सभी देशों में तबाही मचा रखी है, अब तक कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में करीब 1 लाख 72 हजार लोगों की जान जा चुकी है जबकि करीब 24 लाख के आसपास लोग संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में सभी देश अपने-अपने स्तर पर इससे लड़ने की कोशिशें कर रहे हैं तो वहीं, कई देश कोविड-19 से लड़ने वाली वैक्सीन को तैयार करने में जुटे हैं। लेकिन अब तक कोविड-19 को सीधा मारने वाली कोई भी दवा तैयार नहीं हो सकी है। बढ़ती महामारी के कारण कोरोना वायरस को लेकर लोगों के मन में एक डर घर करने लगा है जिसकी वजह से कई लोग अपने आप भी आगे बढ़कर अपनी जांच करवा रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) ने कोविड-19 की जांच का एक आसान तरीका तलाश लिया है। 

आईआईटी( IIT) दिल्ली की ओर से जांच के इस तरीके को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से स्वीकृति मिल गई है। इस तरीके की मदद से अब कोविड-19 की जांच काफी कम खर्च में की जा सकेगी। माना जा रहा है कि इस तकनीक की मदद से देशभर में एक बड़ी जनसंख्या को इसका फायदा मिल सकेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा सकेगी। आपको बता दें कि आईआईटी दिल्ली कोरोना टेस्टिंग किट बनाने वाला देशभर का पहला शैक्षणिक संस्थान बन गया है। आईआईटी टेस्टिंग किट को आईसीएमआर(ICMR) ने मंंजूरी भी दे दी है। वहीं, ये किट बाजार में मौजूदा किट से करीब एक चौथाई सस्ती है। इससे अलावा इस किट की मदद से संक्रमण का भी जल्दी पता चल सकेगा। इस किट को आईआईटी संस्थान की कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेंस की टीम ने तैयार किया है। 

'जांच-मुक्त' है प्रक्रिया

संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा परीक्षण "जांच-आधारित" हैं, जबकि आईआईटी टीम की ओर से ये विकसित एक "जांच-मुक्त" है, जो सटीकता के साथ समझौता किए बिना परीक्षण लागत को कम करने का काम करती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि हमें इससे कम खर्च में जांच करने में सहायता मिलेगी। इस तरीके में फ्लोरेसेंट प्रोब की आवश्यकता नहीं है इसलिए इससे बड़े स्तर पर जांच की जा सकती है। जानकारी के मुताबिक, उद्योग जगत से बातचीत कर जल्द से जल्द इस उपकरण को कम दाम पर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। 

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कोविड-19 और सार्स सीओवी-2 पर किया विश्लेषण

कोरोना वायरस अबतक की सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारी के रूप में विश्वभर में लोगों के सामने खड़ी है जिसकी पहचान तक कर पाना वैज्ञानिकों तक के लिए मुश्किल हो गई है। ऐसे में कई देश इससे मिलती-जुलती बीमारियों के हिसाब से इस पर काम कर रहे हैं। वही, आईआईटी दिल्ली ने भी इसी क्रम में काम करते हुए इस नई तकनीक की तलाश की है। जिसकी मदद से भारत में एक बड़ी तादात में लोगों तक ये सुविधा पहुंच सकेगी और उनकी आसानी से कम खर्च में जांच हो सकेगी। जानकारी के मुताबिक, आईआईटी-दिल्ली ने कोविड-19 और सार्स सीओवी-2 के जीनोम के आरएनए (रिबो न्यूक्लिक एसिड) का विश्लेषण कर इस पर काम किया है। 

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जांच किट तैयार करने में थे ये लोग शामिल

देशभर में आईआईटी दिल्ली की काफी तारीफ हो रही है, आईआईटी दिल्ली की ओर से विकसित किए गए जांच के इस तरीके को बेहद कम खर्च में आम जनता तक पहुंचाने का काम किया है। जांच की ये किट तैयार करने में पीएचडी शोधार्थी प्रशांत प्रधान, आशुतोष पांडेय और प्रवीण त्रिपाठी शामिल हैं। अन्य सदस्यों में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी डॉ पारुल गुप्ता, और डॉ अखिलेश मिश्रा हैं। इसके अलावा दल के वरिष्ठ सदस्यों में प्रोफेसर विवेकानंदन पेरुमल, मनोज बी मेनन, जेम्स गोम्स और विश्वजीत कुंडू शामिल हैं। 

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