पिता-पुत्र के बीच अच्छा संबंध बच्चे के विकास के लिए है फायदेमंद, जानें इस रिश्ते को कैसे बनाएं मजबूत

पिता-पुत्र संबंध मजबूत होने से एक बच्चा अपने पिता को अपनी बातें खुलकर बता पाता है और दोनों के बीच एक अनोखा रिश्ता कायम होता है। 

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariPublished at: Apr 04, 2022Updated at: Apr 04, 2022
पिता-पुत्र के बीच अच्छा संबंध बच्चे के विकास के लिए है फायदेमंद, जानें इस रिश्ते को कैसे बनाएं मजबूत

जीवन में हम अपने बच्चे के लिए सारी सुविधाएं जुटाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए एक पिता बहुत मेहनत करते हैं क्योंकि हमारे भारतीय समाज में एक पिता के तौर पर आपको घर चलाने की जिम्मेदारियां दी जाती है। हालांकि अब इस सोच में तेजी से बदलाव आ रहा है लेकिन फिर भी पिता कई तरीकों से कोशिश करते हैं कि उनके बेटा हमेशा खुश रहे लेकिन काम और अन्य उलझनों में एक पिता सबसे जरूरी चीजों को खोने लगते हैं। वह अपने बच्चे के साथ समय नहीं बिता पाते, उनके बड़े होने में शामिल नहीं हो पाते और न ही उनके साथ खुलकर समस्याओं पर बात कर पाते हैं। इस रिश्ते को इतना जटिल बना दिया गया है कि कई घरों में आज भी पिता-पुत्र साथ बैठकर बात नहीं करते है। बेटा अपने पापा से स्कूल की बात बताने में डरता है। इन दूरियों के कारण बच्चे के मन पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं। पहली बात तो वह यह सोचते हैं कि यह रिश्ता ऐसा ही होता है। फिर उनके मन में पिता को लेकर एक छवि बन जाती है। साथ ही वह कितनी भी बड़ी मुसीबत आने पर अपने पिता से कुछ कहना नहीं चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वह उनकी बात नहीं समझेंगे और शायद उन्हें गलत समझेंगे। यह सभी चीजें बड़े होकर आपके बच्चे को आपसे और दूर कर देती है। इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप अपने बच्चे के ऐसे दोस्त बनने, जिससे वह सबसे पहले अपनी सारे बातें बताएं। 

पिता-पुत्र संबंधों को कैसे सुधारें

1. अच्छा उदाहरण स्थापित करें

अपने बच्चे के सामने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करने की कोशिश करें क्योंकि एक बेटा अपने पिता को देखकर ही कई चीजें सीखता है और वैसा ही उसका व्यक्तित्व विकास होता है। ऐसे में एक पिता के रूप में आपको अपनी बातों से और कार्य से बच्चे को जरूरी चीजें बचानी चाहिए ताकि भविष्य में कभी भी उन्हें उनके व्यवहार की वजह से किसी भी तरह की पेरशानी न हो। आपको उन्हें धैर्य रखना, बड़ों से बात करना और महिलाओं को सम्मान करना सिखाना चाहिए। 

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2. एक साथ समय बिताएं

आज के समय में पेरेंट्स बच्चे के लिए अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश करते हैं। उनके लिए पैसे, सपने और चीजों को संजोते है लेकिन आपके पास अपने बेटे के साथ बिताने के लिए समय नहीं होता है। समय की कमी आपके रिश्ते को और खराब कर सकती है। साथ ही एक समय के बाद आप दोनों के बीच संवाद भी खत्म हो जाता है। इसके बाद या तो बच्चा आपसे डरने लगता है या बात करने से भागता है। इस समस्या से बचने के लिए आप बच्चे के साथ कई तरह की एक्टिविटीज में भाग ले सकते हैं। इसके लिए आप क्रिकेट, बॉस्केटबॉल और टेनिस खेल सकते हैं। इसके अलावा किसी तरह की क्रिएटिविटी या मॉडल हवाई जहाज बनाना, बागवानी करना और घर के कामों में साथ देना। इससे बच्चे में सामाजिक और भावनात्मक मूल्यों का विकास होता है। 

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3. नए चीजों में रूचि पैदा करें

अपने बेटे के साथ आप साझा रूचियां शामिल कर सकते हैं ताकि आप दोनों को उस एक्टिविटी में मजा आए और इसी बहाने आप साथ समय भी बिता सकें। जैसे किसी खेल, कुकिंग, आउटडोर एक्टिविटी और वीडियो गेम्स खेल सकते हैं। इस दौरान आप कहानियां सुनाने के लिए भी बच्चे को प्रेरित कर सकते हैं। इससे बच्चे का भाषाई ज्ञान और चीजों को लेकर समझ भी बढ़ती है। साथ ही वह दूसरों के सामने अपनी बातें रखना भी सीखते हैं। इससे बच्चों में बोलने की शैली और हाव-भाव भी विकसित होते हैं।

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4. साथ मिलकर किसी प्रोजेक्ट पर काम करें

प्रोजेक्ट का मतलब यहां बहुत सी चीजें हो सकती है। जैसे आप अपने बेटे के साथ बाहर जाने का प्लान बना सकते हैं। उनके स्कूल प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप कर सकते हैं। अपने घर की सफाई के लिए आप उन्हें अपना साथी बना सकते हैं। इससे बच्चे में अच्छी आदतें भी डेवलेप होती हैं। साथ ही आप पर्यावरण से जुड़े किसी प्रोजेक्ट में भी साथ काम कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने घर की दीवारों को फैमिली पिक्चर के साथ सजा सकते हैं और साथ मिलकर काम करने से चीजें आसान हो जाती है। बच्चे और आपके बीच एक भावनात्मक जुड़ाव भी होता है। 

5. बच्चे की बातें सुनने

कई बार आपको बच्चे की बातें बिना मतलब की लग सकती है क्योंकि आपके नजरिए से वह बिना किसी मतलब या बेतुकी हो सकती है लेकिन उनके लिए यह उनकी भावनाएं हैं। कई बार बच्चे अपनी बातों को सिर्फ इसलिए नहीं बता पाते हैं क्योंकि उन्हें कोई सुनने वाला नहीं होता है। पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त होते हैं और बच्चा अपने आप में धीरे-धीरे गुम होने लगता है। कई बार इन्हीं कारणों से बच्चों का मेंटल हेल्थ प्रभावित होता है और साथ ही बच्चे उदास और गुमसुम रहने लगता है। एक पिता से बात करना उन्हें अलग तरह की खुशी और सबल देता है, जिससे वह खुलकर अपनी बातें कहते हैं और साथ ही आने वाली चीजों के बारे में भी अपनी सोच बताते हैं। 

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