Fibre In Breakfast: लोगों को शाम को ब्लोटिंग या एसिडिटी होना बहुत ही आम हो गया है। कई लोगों को कब्ज या रात को पेट फूलने की समस्या होने लगती है, जिसे नाइट-टाइम ब्लोटिंग कहा जाता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि इसकी वजह रात का खाना है, लेकिन इसके उल्ट पेट की गैस का कारण सुबह का नाश्ता हो सकता है। इस बारे में हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी (Ms Meena Kumari, Chief Dietician, Sarvodaya Hospital, Faridabad) से बात की। उन्होंने बताया कि कई मामलों में रात की ब्लोटिंग का कारण सुबह के नाश्ते में फाइबर की कमी होती है। जब दिन की शुरुआत सही ढंग से नहीं होती, तो डाइजेशन पूरा दिन सही नहीं रहता और इसका असर शाम या रात में दिखने लगता है। सबसे पहले जानते हैं कि डाइटरी फाइबर शरीर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
डाइटरी फाइबर शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी कहती हैं, “डाइटरी फाइबर पौधों से मिलने वाला न्यूट्रिशन है, जो शरीर में पूरी तरह से डाइजेस्ट नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह बेकार है बल्कि यही फाइबर डाइजेशन को सही तरीके से चलाने में मदद करता है। फाइबर दो तरह के होते हैं।”
घुलनशील फाइबर (Soluble Fibre) - यह पानी सोखकर जेल जैसा बनता है और डाइजेशन को स्लो और कंट्रोल करता है।
अघुलनशील फाइबर (Insoluble Fibre) - यह फाइबर कब्ज को रोकता है और आंतों के मूवमेंट को तेज करता है। सेहतमंद डाइजेशन और ब्लोटिंग से बचने के लिए दोनों ही तरह के फाइबर का बैलेंस जरूरी होता है।

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रोज कितना फाइबर लेना जरूरी है?
मीना कुमारी कहती हैं कि वैज्ञानिक दिशानिर्देशों के अनुसार महिलाओं को रोजाना लगभग 25 ग्राम फाइबर और पुरुषों को 30 से 38 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। इसका सबसे आसान तरीका यह है कि प्रति 1000 कैलोरी पर लगभग 14 ग्राम फाइबर लिया जाना चाहिए, लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर लोग अपनी जरूरत से 40 से 60 फीसदी तक कम फाइबर लेते हैं।
नाश्ते में फाइबर की कमी क्यों बनती है एसिडिटी का कारण?
मीना कुमारी कहती हैं, “बहुत से लोग सुबह के नाश्ते में सिर्फ चाय या कॉफी, बिस्किट, रिफाइंड ब्रेड या टोस्ट लेते हैं। इस नाश्ते में फाइबर लगभग न के बराबर होता है। जब सुबह आंतों को फाइबर नहीं मिलता, तो डाइजेशन सिस्टम सुस्त पड़ जाता है। इस वजह से खाना आंतों में धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और दिनभर यह आंतों में ही पड़ा रहता है। शाम और रात को जब गट मूवमेंट और धीमा हो जाता है, तो बैक्टीरिया भोजन को ज्यादा फर्मेंट करते हैं और इससे गैस और ब्लोटिंग बढ़ जाती है।”
अच्छे बैक्टीरिया के लिए फाइबर है जरूरी
चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी कहती हैं कि आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया यानी गट माइक्रोबायोम फाइबर पर ही ज़िंदा रहते हैं। जब फाइबर सुबह लिया जाता है, तो बैक्टीरिया दिनभर इसे धीरे-धीरे फर्मेंट करते हैं, शॉर्ट-चेन फैटी एसिड्स बनते हैं, आंतों की परत मजबूत होती है, सूजन और गैस कम होती है। इसलिए सभी को सुबह फाइबर युक्त नाश्ते की सलाह दी जाती है।
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दिनभर में फाइबर कैसे खाना चाहिए?
मीना कुमारी कहती हैं, “फाइबर का सही डिस्ट्रीब्यूशन करना जरूरी है। सुबह नाश्ते में करीब 8 से10 ग्राम, दोपहर के खाने में 8 से 12 ग्राम और रात के खाने में 5 से 8 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। अगर फाइबर का बड़ा हिस्सा सुबह और दोपहर में लिया जाए, तो एक-दो हफ्तों में ही ब्लोटिंग में साफ सुधार देखा जा सकता है। इसलिए डाइट में फाइबर बढ़ाना बहुत फायदेमंद है, लेकिन सही तरीके से बढ़ाएं।
- फाइबर अचानक बहुत ज्यादा न बढ़ाएं।
- पानी कम से कम 2.5 से 3 लीटर रोजाना पिएं।
- IBS या आंतों की सूजन में फाइबर के स्रोत डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह पर लें।
- शरीर को एडजस्ट करने के लिए समय दें। ॉ
निष्कर्ष
मीना कुमारी कहती हैं कि रात की ब्लोटिंग से राहत पाने का सबसे सरल और सेफ तरीका है कि सुबह का नाश्ता फाइबर युक्त हो। जब सुबह नाश्ते में पर्याप्त फाइबर होता है, तो आंतों एक्टिव होती है और खाना आंतों में नहीं रुकता जिससे रात में गैस बनने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। तो छोटी-छोटी आदतों के चलते पेट की समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
FAQ
फाइबर युक्त नाश्ता क्या है?
स्मूदी, ओटमील और दही में चिया या अलसी के बीज फाइबर युक्त नाश्ते में शामिल कर सकते हैं। सेब और नाशपाती जैसे फलों का छिलका न उतारें ताकि आपको भरपूर फाइबर मिल सके। साबुत अनाज जैसे ओट्स, क्विनोआ, होल व्हीट ब्रेड शामिल कर किए जा सकते हैं।कब्ज के लिए अच्छा नाश्ता क्या है?
केले, चावल, सेब की चटनी और टोस्ट लेने से डाइजेशन संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज और दस्त दोनों में मदद कर सकती है। कब्ज होने पर न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेकर सुबह का नाश्ता करना चाहिए।सबसे ज्यादा फाइबर वाला भोजन कौन सा है?
सबसे ज्यादा फाइबर दाले जैसे नेवी बीन्स, फलियां, साबुत अनाज जैसे ओट्स, क्विनोआ, मेवे जैसे बादाम, चिया सीड्स, बीज जैसे फ्लैक्स सीड्स और कुछ सब्जियों जैसे हरी मटर, ब्रोकली, शकरकंद, आर्टिचोक में पाया जाता है।
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Jan 16, 2026 08:05 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jan 16, 2026 08:05 IST
Modified By : Aneesh RawatJan 16, 2026 08:05 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dt Meena Kumari