खराब लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज की समस्या बढ़ती जा रही है। जिसके कारण मानसिक और भावनात्मक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। मानस्थली मेंटल हेल्थ और वेलनेस क्लीनिक की सीनियर साइकेट्रिक और फाउंडर, डॉक्टर ज्योति कपूर के मुताबिक मूड और ब्लड शुगर के बीच एक गहरा रिश्ता होता है। ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव होने से पेशेंट को कई तरह के लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें मूड में बदलाव भी शामिल है। लो ब्लड शुगर के लक्षण किसी व्यक्ति के मूड को प्रभावित कर सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं: कंफ्यूजन, घबराहट या चिंता, भूख, कॉर्डिनेशन, एकाग्रता और निर्णय लेने में परेशानी, चिड़चिड़ापन और बेचैनी आदि। आइए जानते हैं इन्हें विस्तार से।
डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य
डायबिटीज एक क्रॉनिक कंडीशन है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। खून में शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव की वजह से तेजी से मूड स्विंग हो सकता है। ऐसे में स्थिति को संभालना तनावपूर्ण हो जाता है।
इन सब वजहों से रिलेशनशिप पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इस स्थिति को संभालने और ब्लड शुगर लेवल को एक संतुलित बनाए रखने के लिए शुगर पेशेंट्स को एक स्ट्रिक्ट रूटीन को फॉलो करने की जरूरत होती है। जिसमें मेडिकल ट्रीटमेंट, निश्चित डाइट और फिजिकल एक्सरसाइज को शामिल किया जा सकता है।
डायबिटीज से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खासकर मूड स्विंग की वजह से कई शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ सकता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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हार्मोन में बदलाव होना
स्ट्रेस के दौरान, बॉडी एड्रेनालाइन हार्मोन को रिलीज करती है। हमारी बॉडी लो ब्लड शुगर के प्रभावों से रिकवर होने में मदद करने के लिए भी एड्रेनालाइन को रिलीज करती है। इस रिलीज को एड्रेनालाइन रश कहते हैं। जब बॉडी में एड्रेनालाइन रश होता है तो व्यक्ति को चक्कर आना, सिर चकराना, देखने में समस्या होना, बेचैनी, चिड़चिड़ापन , और नसों में झनझनाहट की समस्या हो सकती है।
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डिस्ट्रेस (Distress)
डायबिटीज पेशेंट को डायबिटीज डिस्ट्रेस भी हो सकता है। प्रतिदिन डायबिटीज को मैनेज करने से पड़ने वाले प्रेशर से ये स्ट्रेस होता है।
डिप्रेशन (तनाव)
डायबिटीज मरीजों को डिप्रेशन होने का खतरा भी ज्यादा होता है। क्योंकि इसमें लाइफस्टाइज में बदलाव करना पड़ता है। इस वजह से लोग बहुत अधिक दबाव महसूस कर सकते हैं और भावनात्मक रूप से अकेले हो सकते हैं।
एंग्जाइटी (चिंता)
डायबिटीज मरीजों में एंग्जाइटी डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति (मेंटल हेल्थ कंडीशन) है जो घबराहट और चिंता को बढ़ाती है। लेकिन थेरेपी, मेडिकेशन, फिजिकल एक्टीविटी और बेहतर नींद से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
रिलेशनशिप पर डायबिटीज का असर
डायबिटीज आपके रिश्तों पर भी असर डाल सकती है। किसी भी गंभीर स्थिति में इमोशनल सपोर्ट की जरूरत बढ़ जाती है और इसके साथ निराशा और टेंशन का लेवल भी बढ़ जाता है, जो विवाद की स्थिति पैदा कर सकता है। डायबिटीज के संभावित प्रभावों को समझने से रिलेशनशिप को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
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