Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर सूजन घटाने तक, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन क्यों है इतना खास? एक्‍सपर्ट से जानें

हल्दी केवल रसोई का मसाला नहीं, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। जानें इसमें मौजूद करक्‍यूम‍िन सेहत के ल‍िए इतना स्‍पेशल क्‍यों माना जाता है?

आयुर्वेद में हल्दी को एक खास औषधि‍ की तरह देखा जाता है। इसकी उपयोग‍िता का सबसे बड़ा कारण है इसमें पाया जाने वाला एक्‍ट‍िव कंपाउंड करक्यूमिन (Curcumin)। यही तत्व हल्दी को उसका चमकीला पीला रंग देता है और कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। आधुनिक शोधों में भी करक्यूमिन की एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी सपोर्ट करने वाली खूबियों पर ध्यान दिया गया है। आइए जानते हैं कि करक्यूमिन को इतना खास क्यों माना जाता है और यह शरीर को किस तरह फायदा पहुंचा सकता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

हार्ट हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंंद है करक्‍यूम‍िन

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि करक्यूमिन हृदय स्वास्थ्य के ल‍िए फायदेमंंद है। साल 2025 में Food And Chemical Toxicology नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, करक्‍यूम‍िन धमन‍ियों में प्‍लाक जमा होने की प्रक्र‍िया को धीमा कर सकता है ज‍िससे धमन‍ियांं सख्‍त नहीं होतींं। साथ ही यह बैड कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है।

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इम्यूनिटी होती है मजबूत

हल्‍दी में मौजूद करक्‍यूम‍िन इम्‍यून‍िटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह इम्‍यून‍िटी सेल्‍स की कार्यप्रणाली को संतुलि‍त करने में मदद करता है। इसल‍िए हल्‍दी को हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बनाया जाता है ताक‍ि सेहत अच्‍छी रहे।

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सूजन कम करने में म‍िलती है मदद

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करक्‍यूम‍िन में एंंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। जोड़ों की समस्‍या या त्‍वचा रोग में हल्‍दी को बहुत उपयोगी माना जाता है।

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फ्री रेडिकल्स से बचाता है करक्‍यूम‍िन

हमारे शरीर में रोजाना फ्री रेडिकल्स बनते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह नुकसान समय के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। करक्यूमिन एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, जो फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।

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करक्यूमिन का सेवन कैसे करें?

हल्दी को भोजन में शामिल करने का सबसे आसान तरीका है क‍ि आप इसे दाल, सब्जी, सूप या दूध में मिला सकते हैं। हालांकि, करक्यूमिन की शरीर में एब्‍जॉर्ब होने की क्षमता सीमित होती है, लेक‍िन फि‍र भी एक्‍सपर्ट इसे हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बनाने की सलाह देते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सेहत के ल‍िए फायदेमंंद है। इससे हार्ट हेल्‍थ बेहतर होती है, इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है, सूजन कम होती है और फ्री रेड‍िकल्‍स से भी बचाव होता है। हल्‍दी को हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं।

FAQ

  • सेहत के ल‍िए हल्‍दी के फायदे क्‍या हैं?

    हल्दी शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकती है। इसके गुण इम्यूनिटी को सपोर्ट करने के साथ-साथ हार्ट हेल्‍थ को भी मजबूत बनाते हैं।
  • सेहत के ल‍िए हल्‍दी के नुकसान क्‍या हैं?

    जरूरत से ज्‍यादा मात्रा में हल्दी लेने से पेट में गड़बड़ी, मतली, दस्त या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसल‍िए इसे एक्‍सपर्ट की सलाह के साथ डाइट का ह‍िस्‍सा बनाना चाह‍िए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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