Wed Oct 14, 2026 | 08:46 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

क्या कम सोने से बढ़ता है ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज और नींद का कनेक्शन

डायबिटीज और खराब नींद का गहरा संबंध है, अधूरी नींद इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाती है जिससे ब्लड शुगर बढ़ता है, वहीं अनियंत्रित डायबिटीज नींद को प्रभावित करती है। डायबिटीज मैनेज करने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है। 
क्या कम सोने से बढ़ता है ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज और नींद का कनेक्शनक्या कम सोने से बढ़ता है ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज और नींद का कनेक्शन

डायबिटीज और खराब नींद के बीच गहरा और सीधा कनेक्शन होता है। जब कोई व्यक्ति पूरी और अच्छी नींद नहीं लेता है तो शरीर की इंसुलिन का इस्तेमाल करने की क्षमता प्रभावित होती है। नींद की कमी से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिससे ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ने लगता है। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल अगर अनियंत्रित है तो आपकी नींद प्रभावित होगी और अगर आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है तो आपका ब्लड शुगर लेवल नॉर्मल नहीं रह पाएगा।

डायबिटीज और खराब नींद में क्या कनेक्शन है?

Dr. Akshay Chugh के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं लेता है, तो उसके शरीर की ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है, जो गंभीर समस्या हो सकता है। इस कनेक्शन को आप इस तरह समझ सकते हैं-

1. ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव

रात के समय ब्लड में ग्लूकोज का लेवल असामान्य होना नींद खराब होने का सबसे बड़ा कारण है।

  • हाइपरग्लाइसीमिया- जब रात में ब्लड शुगर का लेवल बहु ज्यादा बढ़ जाता है तो किडनियां ज्यादा शुगर को बाहर निकालने की कोशिश करती हैं। इससे मरीज को बार-बार पेशाब करने के लिए उठना पड़ता है। इसके अलावा, शुगर बढ़ने से बहुत ज्यादा प्यास लगती है और बेचैनी महसूस होती है, जिससे नींद टूट जाती है।
  • हाइपोग्लाइसीमिया- अगर रात में अचानक ब्लड शुगर लेवल बहुत कम हो जाए तो मरीज को रात में अचानक बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है, घबराहट होने लगती है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और बुरे सपने आते हैं। यह स्थिति मरीज की नींद को अचानक और झटके के साथ तोड़ देती है और दोबारा सोने में दिक्कत होती है।

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2. स्लीप एप्निया

डायबिटीज के मरीजों में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया नाम की बीमारी का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इस बीमारी में सोते समय गले की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं, जिससे सांस लेने का रास्ता कुछ सेकंड के लिए बार-बार बंद हो जाता है।

इसके कारण मरीज रात में सोने के दौरान खर्राटे लेता है और रात में बार-बार सांस रुकने से उसकी नींद अचानक खुल जाती है। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिससे सुबह सिरदर्द और दिनभर बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है।

3. नसों का दर्द और बेचैनी

लंबे समय से अनियंत्रित डायबिटीज नसों को नुकसान पहुंचाती है, जिसे डायबिटीक न्यूरोपैथी कहा जाता है। रात में जब मरीज सोने जाता है तो उसके पैरों में तेज जलन, सुई चुभने जैसा एहसास या दर्द होता है, जिससे सोना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा कई डायबिटीज मरीजों को लेटने पर पैरों में एक अजीब से दर्द महसूस होता है और उन्हें बार-बार पैर हिलाने की इच्छा होती है, जो नींद खराब होने का कारण बनती है।

4. तनाव हार्मोन और इंसुलिन रेजिस्टेंस साइकिल

जब नींद पूरी नहीं हो पाती है या नींद की क्वालिटी खराब होती है तो शरीर इसे एक तनावपूर्ण स्थिति मानता है। नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन ज्यादा रिलीज होने लगता है। कोर्टिसोल हार्मोन हमारे शरीर के सेल्स को इंसुलिन रेजिस्टेंस बना देती है, जिससे इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता है और अगले दिन ब्लड शुगर का लेवल बहुत तेजी से बढ़ जाता है।

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क्या कहती है स्टडी?

साल 2023 में Cureus जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज और खराब नींद के बीच एक गहरा कनेक्शन है, जहां अधूरी नींद इंसुलिन संवेदनशीलता को घटाकर इंसुलिन रेजिस्टेंस और कॉर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाती है, जिससे ब्लड शुगर और HbA1c का लेवल बढ़ता है। वहीं दूसरी ओर, डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याएं जैसे रात में बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, नसों में दर्द और रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम नींद की क्वालिटी को खराब करते हैं।

अच्छी नींद और शुगर कंट्रोल करने के लिए टिप्स

Dr. Akshay Chugh का कहना है कि अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं तो इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं-

  • सोने से पहले ब्लड शुगर चेक करें- रात को सोने से ठीक पहले अपना ब्लड शुगर लेवल जरूर चेक करें, ताकि आप हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपरग्लाइसीमिया जैसी समस्याओं से बच सकें।
  • स्लीप हाइजीन अपनाएं- रोजाना सोने और उठने का एक समय तय करें। सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन बंद कर दें। इसके अलावा, अपने कमरे में अंधेरा, शांति और आरामदायक तापमान रखें।
  • कैफीन और हैवी भोजन से बचें- शाम 5 बजे के बाद चाय, कॉफी या कैफीन जैसी ड्रिंक्स का सेवन करने से बचना चाहिए। रात का खाना हल्का रखें और सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले ही डिनर कर लें।
  • पैरों की देखभाल करें- अगर पैरों में जलन या दर्द की समस्या है तो सोने से पहले पैरों को गुनगुने पानी से धोकर मॉइस्चराइजर या तेल लगाएं।
  • स्लीप एप्निया की जांच करवाएं- अगर आपको बहुत तेज खर्राटे आते हैं और दिनभर सुस्ती रहती है तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर आपको लगातार अनिद्रा की समस्या, सुबह ब्लड शुगर लेवल ज्यादा होना, स्लीप एप्निया की समस्या या अचानक ब्लड शुगर असंतुलन की समस्या होती है तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

निष्कर्ष
डायबिटीज को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए सिर्फ दवाइयां और डाइट ही काफी नहीं हैं, बल्कि 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है। अपनी नींद की अनदेखी करने से बचें और अगर समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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FAQ

  • डायबिटीज में नींद नहीं आने पर क्या करें?

    डायबिटीज के मरीजों में नींद की समस्या होने पर तय समय पर सोएं और जागें, सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहे, अंधेरे और शांत कमरे में सोएं, शाम के बाद कैफीन का सेवन न करें और रात में हल्का डिनर करें।
  • डायबिटीज मरीजों को कितने घंटे सोना चाहिए?

    डायबिटीज के मरीजों को रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद लेनी चाहिए। लगभग 7 से 8 घंटे की नींद शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर रखने और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद करती है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 14, 2026 19:37 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh