डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में डिहाइड्रेशन की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। जब ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर इस अतिरिक्त ग्लूकोज को यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकालने की कोशिश करता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा. ज्यादा पेशाब आने के कारण शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida बताते हैं कि अगर ब्लड शुगर हाई होने या डायबिटीज की समस्या में पर्याप्त मात्रा में पानी या तरल पदार्थों का सेवन न किया जाए तो मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है, जिससे शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है।
डायबिटीज और डिहाइड्रेशन का कनेक्शन
साल 2024 में Journal of the Association of Physicians of India में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में ऑस्मोटिक डिओरेसिस के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा भी पानी कम पीना, तापमान बढ़ना, दस्त, तेज बुखार, मतली और उल्टी जैसे कारक भी डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ एंटीडायबिटिक दवाएं भी कुछ मरीजों में पानी की कमी या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकती हैं।
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Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि जब शरीर में ग्लूकोज का लेवल सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है तो शरीर के मेटाबॉलिज्म और किडनी के कामकाज में कई प्रतिक्रियाएं शुरू हो जाती हैं, जो तेजी से पानी सोखती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-
1. ऑस्मोटिक डायरेसिस
ऑस्मोटिक डायरेसिस यानी बार-बार पेशाब आना डायबिटीज में डिहाइड्रेशन का सबसे बड़ा कारण है। जब खून में शुगर का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो हमारी किडनियां इस एक्स्ट्रा शुगर को छानकर शरीर से बाहर निकालने की कोशिश करती हैं।
ग्लूकोज अपने साथ शरीर के सेल्स और टिश्यू से भारी मात्रा में पानी खींच लेता है। इसके कारण मरीज को बार-बार और बहुत ज्यादा मात्रा में पेशाब आने लगता है। शरीर से लगातार पानी निकलने के कारण मरीज तेजी से डिहाइड्रेशन का शिकार होने लगता है।
2. ज्यादा प्यास लगना
शरीर से पेशाब के जरिए लगातार पानी बाहर निकल रहा होता है, इसलिए दिमाग का हाइपोथैलेमस शरीर को संकेत देता है कि अंदर पानी की भारी कमी हो गई है। इसके कारण मरीज को बहुत तेज और लगातार प्यास लगती है। हालांकि, कई बार मरीज जितना पानी पीते हैं, शरीर उससे ज्यादा पानी बाहर निकाल देता है, जिससे पानी का संतुलन बिगड़ जाता है।
3. सेल्स का सिकुड़ना
जब ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है तो खून का ऑस्मोटिक प्रेशर बढ़ जाता है। इस प्रेशर के कारण शरीर के अलग-अलग सेल्स के अंदर मौजूद पानी खींचकर बाहर ब्लडस्ट्रीम में आ जाता है ताकि शुगर को पतला किया जा सके। सेल्स को जब पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता है तो वे सिकुड़ने लगती हैं। इसे सेलुलर डिहाइड्रेशन कहते हैं, जिससे मरीज को भारी कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
4. डायबिटिक कीटोएसिडोसिस - DKA
टाइप-1 और कभी-कभी टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में जब इंसुलिन की कमी हो जाती है तो शरीर एनर्जी के लिए फैट को तोड़ने लगता है। इससे खून में कीटोन बनने लगते हैं और खून एसिडिक हो जाता है, जिसे DKA (Diabetic Ketoacidosis) कहते हैं। इस खतरनाक स्थिति में उल्टी, दस्त और ज्यादा पेशाब आने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है।
5. ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी
लंबे समय से अनियंत्रित डायबिटीज नसों को नुकसान पहुंचाती है। जब ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी होती है, तो शरीर का वह सिस्टम जो पसीने और प्यास के एहसास को कंट्रोल करता है, ठीक से काम नहीं कर पाता। मरीज को समय पर प्यास का एहसास नहीं होता, जिसके कारण वे पर्याप्त पानी नहीं पी पाते और डिहाइड्रेशन की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
Dehydration-in-Diabetes
डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षण
Dr. Akshay Chugh के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अपने शरीर के संकेतों को पहचानें। डिहाइड्रेशन होने पर ये लक्षण नजर आ सकते हैं-
- मुंह, गला और जीभ का बहुत ज्यादा सूखना।
- बहुत ज्यादा प्यास लगना।
- स्किन का ड्राई होना और खिंचाव महसूस होना।
- गहरे पीले रंग का पेशाब आना या पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना।
- सिरदर्द, चक्कर आना या उठते समय आंखों के सामने अंधेरा छाना।
- अत्यधिक थकान, सुस्ती और मांसपेशियों में ऐंठन होना।
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डायबिटीज के मरीज डिहाइड्रेशन से कैसे बचाव करें?
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, डायबिटीज के मरीज डिहाइड्रेशन की समस्या से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-
- ब्लड शुगर कंट्रोल रखें- ग्लूकोज लेवल को नियमित रूप से मॉनिटर करें। शुगर कंट्रोल में रहेगा, तो बार-बार पेशाब आने की समस्या भी कंट्रोल में रहेगी।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं- दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं। सादे पानी के अलावा नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन करें।
- कैफीन और अल्कोहल से बचें- ज्यादा चाय, कॉफी या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पीने से बचने की कोशिश करें क्योंकि ये ड्यूरेटिक होते हैं यानी पेशाब के जरिए शरीर से पानी को और तेजी से बाहर निकालते हैं।
- इलेक्ट्रोलाइट्स का ध्यान रखें- गर्मियों में या एक्सरसाइज के दौरान शरीर में मिनरल्स की कमी न होने दें। डॉक्टर की सलाह से ORS या इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन का सेवन कर सकते हैं।
निष्कर्ष
डायबिटीज और डिहाइड्रेशन का एक दूसरे से कनेक्शन है। अगर आप समय पर पानी नहीं पिएंगे और शुगर कंट्रोल में नहीं रखेंगे तो डिहाइड्रेशन आपके ब्लड शुगर लेवल को और ज्यादा बदतर कर सकता है। इसलिए, खुद को हाइड्रेटेड रखें, अपनी दवाइयां समय पर लें और किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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FAQ
डिहाइड्रेशन में कौन सा फल खाना चाहिए?
डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होने पर ऐसे फल खाने चाहिए, जिनमें पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा भरपूर हो, जैसे- तरबूज, खरबूज, खीरा और नारियल पानी।गंभीर डिहाइड्रेशन होने पर क्या करना चाहिए?
गंभीर डिहाइड्रेशन एक इमरजेंसी स्थिति है। अगर किसी व्यक्ति को गंभीर डिहाइड्रेशन हो जाए तो घर पर उसका इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।
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Oct 14, 2026 10:32 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
