आज के समय में खराब खान-पान और असंतुलित लाइफस्टाइल के कारण हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो सीधे तौर पर दिल की सेहत को प्रभावित करती है। शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने से धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा पैदा हो जाता है। इससे दिल से जुड़ी बीमारियों और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखने में खाने में इस्तेमाल होने वाले कुकिंग ऑयल भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में आइए Dr Richa Agrawal, Cardiologist - Metro Hospitals & Heart Institute, Noida से जानते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल में कौन-सा कुकिंग ऑयल इस्तेमाल करना चाहिए?
कुकिंग ऑयल को समझने के लिए जरूरी हैं ये तीन फैट्स
Dr Richa Agrawal के अनुसार, किसी भी कुकिंग ऑयल को समझने के लिए हमें उसमें मौजूद इन तीन तरह के फैट्स को समझना जरूरी है-
- सैचुरेटेड फैट- यह फैट कमरे के तापमान पर जम जाती है, जैसे नारियल तेल, ताड़ का तेल या पाम ऑयल, डालडा या वनस्पति। यह खून में खराब कोलेस्ट्रॉल को तेजी से बढ़ाती है। एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को तेजी से बढ़ाती है।
- ट्रांस फैट- यह दिल का सबसे बड़ा दुश्मन मानी जाती है। यह रिफाइंड तेलों को बार-बार गर्म करने और हाइड्रोजनेटेड ऑयल्स में बनता है। यह तेल न सिर्फ खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, बल्कि अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम भी करता है।
- अनसैचुरेटेड फैट- यह गुड फैट माना जाता है। मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड (PUFA) फैटी एसिड खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और दिल को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल में कौन सा तेल है सबसे बेस्ट?
साल 2016 में Indian Heart Journal में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, दिल को हेल्दी रखने और कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए ऐसा तेल चुनना चाहिए, जिसमें सैचुरेटेड फैट कम हो और अच्छे फैट ज्यादा हों। इस मामले में सरसों का तेल बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें अच्छे फैट का सही संतुलन होता है और यह गर्म करने पर भी खराब नहीं होता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।
Dr Richa Agrawal का कहना है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए कोई एक तेल फायदेमंद या नुकसानदायक नहीं है, बल्कि कुछ ऐसे तेल हैं, जिनमें MUFA और PUFA का अनुपात बहुत अच्छा होता है, जिसके अनुसार आप इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं-
1. सरसों का तेल
भारतीय रसोई के लिए सरसों का तेल एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स भरपूर मात्रा मात्रा में होते हैं। यह ब्लड में जमे खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के लेवल को सुधारने में मदद करता है। इसके अलावा, इसका स्मोक पॉइंट काफी ज्यादा होता है, जिससे यह इंडियन कुकिंग स्टाइल के लिए सुरक्षित है।
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2. ऑलिव ऑयल
ऑलिव ऑयल में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और MUFA की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो धमनियों की सूजन को कम करती है। ऑलिव ऑयल को तेज आंच पर पकाने या छौंक लगाने के लिए इस्तेमाल न करें। इसे सलाद ड्रेसिंग या हल्की कुकिंग के लिए रखें। भारतीय तड़के या पकाने के लिए ज्यादा लाइट ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें।
3. राइस ब्रान ऑयल
चावल की भूसी से बनने वाले इस तेल में ओरिजानॉल (Oryzanol) नाम का एक पावरफुल एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। साल 2022 में Journal of the Medical Association of Thailand में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, ओरिजानॉल आंतों से कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
4. तिल का तेल और मूंगफली का तेल
इन दोनों तेलों में भी MUFA और PUFA का संतुलन अच्छा होता है। अगर इनका इस्तेमाल कच्ची घानी के रूप में सीमित मात्रा में किया जाए, तो यह दिल के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
Cooking-Oils-For-Lowering-High-Cholesterol
ऑयल इस्तेमाल करने के लिए रोटेशन फॉर्मूला अपनाएं
Dr Richa Agrawal का कहना है कि एक ही तरह का तेल सालों-साल इस्तेमाल करने के बजाय, हर 1 से 2 महीने में अपना कुकिंग ऑयल बदलते रहें या दो अलग-अलग अच्छे तेलों का मिश्रण इस्तेमाल करें। एक महीने सरसों का तेल इस्तेमाल करें, तो अगले महीने राइस ब्रान ऑयल का उपयोग करें। इससे आपके शरीर को सभी तरह के जरूरी फैटी एसिड्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का सही संतुलन मिलता रहता है।
खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से रोकने के लिए किन तेलों से दूरी बनाएं?
Dr Richa Agrawal के मुताबिक, अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो इन तेलों को अपने खाने में शामिल करना तुरंत बंद कर दें-
- वनस्पति/डालडा और मार्जरीन- इनमें भरपूर मात्रा में ट्रांस फैट होता है जो धमनियों को सख्त कर देता है।
- पाम ऑयल- इस तेल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। अक्सर पैक्ड स्नैक्स और नमकीन में इसका इस्तेमाल होता है।
- री-यूज्ड ऑयल- कढ़ाई में बचे हुए तेल को दोबारा गर्म करके इस्तेमाल करने से उसमें कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) तत्व और ट्रांस फैट बन जाते हैं, जो हार्ट अटैक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
Dr Richa Agrawal का कहना है कि आप चाहे कितना ही महंगा या अच्छा तेल क्यों न इस्तेमाल कर लें, अगर मात्रा ज्यादा होगी तो कोलेस्ट्रॉल का लेवल शरीर में बढ़ेगा ही।
- एक हेल्दी व्यक्ति को रोजाना 3 से 4 छोटे चम्मच से ज्यादा तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। यानी एक महीने में एक व्यक्ति के लिए आधा लीटर तेल पर्याप्त होता है।
- ज्यादा केमिकल प्रोसेस से बने रिफाइंड तेलों के बजाय कोल्ड प्रेस्ड ऑयल्स को अपने खाने में शामिल करें।
- तेल बदलने के साथ-साथ अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, ओट्स और अलसी के बीज शामिल करें और रोजाना कम से कम 30-40 मिनट की ब्रिस्क वॉक जरूर करें।
निष्कर्ष
कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने के लिए अपनी डाइट से तेल को पूरी तरह बंद करना सही नहीं होता है, बल्कि सही तेल, सही तकनीक और सीमित मात्रा में इसका सेवन करने पर ध्यान देना चाहिए। अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करें, रिफाइंड और तले-भुने खाने से बचें और नियमित रूप से अपना लिपिड प्रोफाइल चेक करवाते रहें।
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FAQ
क्या रिफाइंड तेल से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है?
हां, रिफाइंड तेल के ज्यादा या नियमित सेवन से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल तेजी से बढ़ सकता है।कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है?
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से कई तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है, जिसमें हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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Oct 01, 2026 11:35 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Richa Agrawal
