Fri Oct 30, 2026 | 07:07 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Agrawal , Clinical Director – Paediatrics & Neonatology

छोटे बच्चे को बार-बार पॉटी आने के हो सकते हैं ये 5 कारण, बता रहे हैं डॉक्टर

Frequent Pooping In Toddlers In Hindi: कई छोटे बच्चों को बार-बार पॉटी आती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे फूड एलर्जी होना आदि। ऐसे में पैरेंट्स क्या करें? इस लेख में जानें।
छोटे बच्चे को बार-बार पॉटी आने के हो सकते हैं ये 5 कारण, बता रहे हैं डॉक्टरछोटे बच्चे को बार-बार पॉटी आने के हो सकते हैं ये 5 कारण, बता रहे हैं डॉक्टर

What Causes Frequent Pooping In Toddlers In Hindi: कहते हैं कि छोटे बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानना है, तो उनकी मल त्याग प्रक्रिया पर गौर करना चाहिए। आपने अक्सर देखा होगा कि छोटे बच्चे दिन भर में कई बार पाॅटी करते हैं। इससे नए पैरेंट्स परेशान हो जाते हैं और डाॅक्टर के चक्कर काटने लगते हैं। क्या आप जानते हैं कि बच्चे का बार-बार पाॅटी (Bacche Bar Bar Potty Kyon Karte Hain) करना कोई गंभीर समस्या नहीं है, बशर्ते पाॅटी पतली न हो।

सवाल है, उन्हें बार-बार पाॅटी आती क्यों है? इस बारे में Dr. Gopal Aggarwal, Director- Department Of Pediatrics And Neonatology At Cloudnine Group of Hospitals, Gurugram बताते हैं, "अगर बच्चे को बार-बार पतली पाॅटी आती है, तो इसे टाॅडलर्स डायरिया कहा जाता है। वहीं, अगर बच्चा सामान्य तरह से पॉटी कर रहा है, तो यह चिंता का विषय नहीं है।"

क्या कहती है रिसर्च?

National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, एंजाइम की कमी, फूड एलर्जी, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), स्मॉल इंटेस्टाइनल बैक्टेरियल ओवरग्रोथ (SIBO) आदि के कारण बच्चों को बार-बार पॉटी आने की समस्या हो सकती है। ये गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए पैरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे इसे कभी भी इग्नोर न करें। 

Pediatric Clinical Advisor के अनुसार, टॉडलर्स डायरिया 12 से 36 महीने (1 से 3 वर्ष) के बच्चों में बार-बार या लंबे समय तक दस्त (क्रोनिक डायरिया) रहने का सबसे आम कारण है। बार-बार मल त्याग के बावजूद इसमें बच्चे का वजन, लंबाई और शारीरिक विकास (Growth Parameters) पूरी तरह सामान्य बना रहता है और कुपोषण या निर्जलीकरण नहीं होता।

बच्चे को बार-बार पॉटी क्यों आती है?- Causes Of Frequent Pooping In Toddlers In Hindi

what causes frequent pooping in toddlers 2what causes frequent pooping in toddlers 2

फ्लूइड इनटेक अधिक होना

Dr. Gopal Aggarwal के अनुसार, "अगर पैरेंट्स अनजाने में अपने बच्चे की डाइट में फ्लूइड इनटेक ज्यादा रखते हैं, तो ऐसे में बच्चा बार-बार पतली पाॅटी (bacche ko bar bar potty aana) कर सकता है। असल में, कई पैरेंट्स अपने बच्चे को साबुत फल देने के बजाय उसका जूस निकालकर देना पसंद करते हैं। इस तरह की चीजें बच्चों को पसंद आती हैं, इसलिए वे इसका बहुत चाव से सेवन करते हैं। नतीजतन, बच्चे को पतली पाॅटी अधिक होने लगती है।"

इसे भी पढ़ें: नवजात शिशु में डायरिया के लक्षण, कारण और इलाज

लो फैट और हाई फाइबर

Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं, "कई बार पैरेंट्स बच्चे के पाचन को ध्यान में रखते हुए अधिक मात्रा में फाइबर युक्त फूड देते हैं। लेकिन, बच्चे की डाइट में लो फैट और अधिक मात्रा में फाइबर होना सही नहीं होता है। इससे उनकी पाचन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। यही नहीं, लो फैट और हाई फाइबर युक्त डाइट लेने के कारण बच्चे को बार-बार पॉटी आ सकती है। यह उसके लिए पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं भी पैदा कर सकता है।"

इसे भी पढ़ें: शिशु को दस्त लगने पर अपनाएं ये 7 घरेलू नुस्खे

एंजाइम की कमी

Dr. Gopal Aggarwal बताते हैं, "अगर बच्चे में एंजाइम डेफिशिएंसी, जैसे लैक्टोज इनटॉलरेंस (Lactose intolerance) है, तो इस स्थिति में भी बच्चे का पेट खराब हो सकता। असल में, एंजाइम डेफिशिएंसी होने पर बच्चे का मेटाबॉलिज्म बाधित हो जाता है, जिससे उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं। इसमें उसका विकास का बाधित होना, मांसपेशियों में कमजोरी, हड्डियों और जोड़ों में दर्द होने के साथ-साथ पाचन संबंधी समस्याएं भी शामिल हैं। पाचन संबंधी समस्या होने के कारण बच्चे को बार-बार पॉटी आ सकती है।"

इसे भी पढ़ें: Green Stool: शिशु हरे रंग का मल क्यों करते हैं? डॉक्टर से जानें कारण

इंफेक्शन

Dr. Gopal Aggarwal ने आगे बताया, "अगर बच्चे को डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में बैक्टीरियरल इंफेक्शन हो जाता है, तो भी उसे बार-बार पॉटी आने की समस्या हो सकती है। असल में, यह डायरिया भी हो सकता है। इस तरह की स्थिति को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इससे बच्चे को पेट में दर्द, गैस बनना और ब्लोटिंग जैसी कई समस्याएं होने लगती हैं। यह बच्चे को न सिर्फ असहज करता है, बल्कि उसके लिए तकलीफदेह भी हो सकता है।"

स्वास्थ्य समस्या

कई बार अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्या होने के कारण भी बच्चे को बार-बार पॉटी आने की समस्या हो सकती है। जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल सिंड्रोम और सीलिएक डिजीज आदि। इंफ्लेमेटरी बाउल सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है, जिसमें डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में सूजन आ जाती है। इंफ्लेमेटरी बाउल सिंड्रोम के कारण शरीर के अन्य ऑर्गन जैसे किडनी, लिवर आदि प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, सीलिएक की बात करें, तो यह एक तरह का ऑटो इम्यून (Autoimmune) विकार है। सीलिएक होने के कारण बच्चे को ग्लूटन के सेवन से छोटी आंत को नुकसान होने लगता है। इस स्थिति में बच्चे को बार-बार पॉटी आ सकती है।

पैरेंट्स क्या करें?

अगर बच्चे को बार-बार पाॅटी आ रही है या उसे बार-बार डायरिया हो रहा है, तो इस स्थिति को पैरेंट्स नजरअंदाज न करें। ऐसे में तुरंत डाॅक्टर को दिखाएं और यहां बताए गए कुछ टिप्स को अपना सकते हैं-

  1. बच्चे को ओआरएस पिलाएं। यह ओरल रिहाइड्रेशन साॅल्यूशन होता है, जिससे बच्चे की बाॅडी डिहाइड्रेट नहीं होती है।
  2. बच्चे को ब्रेस्टफीड करवाते रहें। इससे शिशु के शरीर में एनर्जी का स्तर बना रहता है।
  3. बच्चे को शुगर युक्त पेय, जैसे फ्रूट जूस, सोडा आदि देने से बचें। इससे डायरिया बढ़ सकता है।
  4. बच्चे की डाइट में सुधार करें। उन्हें दिन भर में थोड़ा-थोड़ा खाने के लिए दें।
  5. बच्चे की डाइट में केला, सफेद चावल, टोस्ट और दालें शामिल करें। इससे उन्हें पर्याप्त पोषक तत्व भी मिलते हैं।
  6. बच्चों को लीन प्रोटीन भी देना आवश्यक होता है। इसके लिए उन्हें अंडा, चिकन और पकी हुई सब्जियां दें।
  7. पेट खराब होने पर डेयरी प्रोडक्ट, तली-भुनी चीजें बच्चों को कम दें।
  8. अगर बच्चे की डाइट में बदलाव के बावजूद बच्चा बार-बार पतली पाॅटी कर रहा है, तो बेहतर है कि उसे डाॅक्टर के पास ले जाएं।

निष्कर्ष

अगर बच्चा सामान्य पाॅटी करता है, तो इसके लिए पैरेंट्स परेशान न हों। हां, अगर बच्चा पतली पाॅटी कर रहा है, तो यह सही नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स बच्चों को जल्द से जल्दी डाॅक्टर के पास ले जाएं और उनका इलाज करवाएं। ध्यान रखें कि लंबे समय तक बार-बार हो रही पाॅटी की आदत को इग्नोर नहीं करना चाहिए, इससे बच्चा डिहाइड्रेट हो सकता है, उसे बुखार आ सकता है या स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्या हो सकती है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या बच्चे के दांत निकलते समय (Teething) बार-बार पॉटी आने की समस्या हो सकती है?

    हां, दांत निकलते समय मसूड़ों में खुजली के कारण बच्चे खिलौने और गंदे हाथ मुंह में डालते हैं, जिससे पेट में हल्के कीटाणु जाने से उन्हें बार-बार पॉटी आने की समस्या हो सकती है।
  • क्या छोटे बच्चों में बार-बार पॉटी रोकने के लिए 4-F रूल उपयोगी है?

    4-F रूल का मतलब है, फैट बढ़ाना, फ्लूइड संतुलित रखना, फाइबर सामान्य करना और फ्रूट जूस बंद करना। विशेषज्ञ टॉडलर्स डायरिया कंट्रोल करने के लिए इसकी सलाह देते हैं।

Read Next

→ बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग किस उम्र में देना चाहिए? पेरेंट्स जान लें जरूरी बातें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 30, 2026 17:01 IST

    Modified By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Gopal Agrawal
  • Mar 07, 2025 14:29 IST

    Published By : Meera Tagore