Fri Oct 30, 2026 | 07:08 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग किस उम्र में देना चाहिए? पेरेंट्स जान लें जरूरी बातें

पॉटी ट्रेनिंग में छोटे बच्चों को टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करना सिखाया जाता है। इसमें बच्चे को पेशाब और मल त्याग की जरूरत पहचानना और समय पर टॉयलेट जाना सिखाया जाता है। आइए जानें क‍िस उम्र में पॉटी ट्रेन‍िंग शुरू करना चाह‍िए?
बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग किस उम्र में देना चाहिए? पेरेंट्स जान लें जरूरी बातेंबच्चों को पॉटी ट्रेनिंग किस उम्र में देना चाहिए? पेरेंट्स जान लें जरूरी बातें

Right Age Of Potty Training: ज्यादातर बच्चे 18 महीने से 3 साल की उम्र के बीच पॉटी ट्रेनिंग सीखना शुरू कर देते हैं। हालांकि, बच्चे की उम्र से ज्यादा यह देखना जरूरी है कि वह इसके लिए कितना तैयार है? जिन बच्चों के विकास में देरी होती है, उन्हें पॉटी ट्रेनिंग के लिए अलग तरीके और ज्‍यादा समय की जरूरत हो सकती है। ऐसे बच्चों को धीरे-धीरे और धैर्य के साथ पॉटी सीट से परिचित कराना चाहिए। पॉटी ट्रेनिंग से संबंध‍ित जरूरी बातों के बारे में आगे जानते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स यह मानता है क‍ि जब बच्चा 18 महीने का हो जाए, तो उसे पेशाब, पॉटी और टॉयलेट जैसे आसान शब्द सिखाना शुरू करें। इन शब्दों का बार-बार इस्तेमाल करें। बच्चे को बताएं कि हर व्यक्ति पेशाब और पॉटी करता है। साथ ही, कुछ संकेत बताते हैं कि बच्चे को पेशाब या पॉटी आ रही है। जैसे- एक जगह न टिक पाना, पैर हिलाना, पैरों को क्रॉस करना या कपड़े खींचना। ऐसे संकेत दिखने पर बच्चे को बताएं कि उसे टॉयलेट जाने की जरूरत हो सकती है।

कैसे पता करें बच्‍चा पॉटी ट्रेनिंग के ल‍िए तैयार है या नहीं?

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पॉटी ट्रेनिंग शुरू करने का सही समय तब होता है जब ये संकेत नजर आते हैं- 

  • जब बच्चा लगभग 2 घंटे तक डायपर गीला किए बिना रह सके,
  • पेशाब या पॉटी आने की जरूरत बता सके,
  • खुद चलकर टॉयलेट तक जा सके,
  • पॉटी सीट पर बैठ सके,
  • अपने कपड़े ऊपर-नीचे कर सके,
  • आसान निर्देशों को समझकर उनका पालन कर सके,
  • टॉयलेट न‍ियम सीखने में रुचि दिखाना या गीले डायपर से असहज महसूस करना भी इस बात के संकेत हैं कि बच्चा पॉटी ट्रेनिंग के लिए तैयार हो रहा है।

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पॉटी ट्रेनिंग देने का सही तरीका

  • पॉटी ट्रेनिंग की शुरुआत में बच्चे को पॉटी सीट या पॉटी चेयर से परिचित कराएं। उसे बताएं कि पेशाब और पॉटी करने के लिए इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है?
  • शुरुआत में बच्चे को सुबह उठने के बाद, खाना खाने के 15–20 मिनट बाद और सोने से पहले पॉटी सीट पर बैठने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • शुरुआत में बच्‍चे को 3 से 5 मिनट तक बैठाना काफी है।
  • दिन में कुछ समय डायपर के बिना रहने दें, ताकि बच्चा गीलेपन और टॉयलेट जाने की जरूरत के बीच संबंध समझ सके।
  • रात में पॉटी ट्रेनिंग दिन की तुलना में अधिक समय ले सकती है इसलिए इसमें जल्दबाजी न करें।

पॉटी ट्रेनिंग के दौरान पेरेंट्स के लिए जरूरी सावधानियां

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  • शुरुआत धीरे-धीरे करें और बच्‍चे को सीखने का समय दें।
  • बच्चे को पर्याप्त पानी पिलाएं और फाइबर से भरपूर फल, सब्जियां और साबुत अनाज दें, ताकि उसे कब्ज की समस्या न हो।
  • बच्चे को टॉयलेट के बाद और पहले हाथ धोने की आदत डालें।
  • उसकी कोशिशों की तारीफ करें, न कि उससे हर बार सफल होने की उम्मीद रखें।
  • अगर बच्चा पॉटी ट्रेनिंग का विरोध करता है, तो कुछ हफ्तों के लिए इसे रोककर दोबारा कोशिश करें।

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टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए सही चीजों का चुनाव करें

  • पॉटी ट्रेनिंग के लिए आप पॉटी चेयर या टॉयलेट सीट रिड्यूसर का इस्तेमाल कर सकते हैं। टॉयलेट सीट रिड्यूसर सामान्य टॉयलेट सीट के ऊपर लगाया जाता है, जिससे बच्चे को उस पर बैठने में आसानी होती है।
  • अगर आप सामान्य टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो बच्चे के पैरों के नीचे मजबूत फुटस्टूल जरूर रखें।
  • पॉटी ट्रेनिंग के दौरान ऐसे कपड़े चुनें, जिन्हें बच्चा आसानी से नीचे कर सके।
  • इलास्टिक वाली पैंट या ढीले शॉर्ट्स बेहतर विकल्प हैं।
  • इसके अलावा, बच्चे के लिए अलग तौलिया, टिशू पेपर और हाथ धोने के लिए साबुन रखें।

पॉटी ट्रेनिंग के दौरान न करें ये गलत‍ियां

  • बच्चे को लंबे समय तक पॉटी सीट पर बैठाए रखना भी सही नहीं है। इससे वह पॉटी ट्रेनिंग को एक सजा की तरह समझ सकता है।
  • रात में डायपर छुड़ाने की जल्दबाजी न करें, क्योंकि रात में पेशाब रोकने की क्षमता विकसित होने में अधिक समय लग सकता है।
  • बच्चे पर पॉटी ट्रेनिंग के लिए दबाव न डालें, उसे डांटना नहीं चाह‍िए या दूसरे बच्चों से उसकी तुलना न करें।
  • पॉटी ट्रेनिंग के दौरान बच्चे से गलती होना सामान्य है। ऐसी स्थिति में गुस्सा न करें। धैर्य रखकर बच्‍चे को पॉटी ट्रेन‍िंग दें।

डॉक्‍टर से कब संपर्क करें?

  • अगर बच्चे को लगातार कब्ज होता है,
  • पेशाब करते समय दर्द होता है,
  • पॉटी में ब्‍लड आता है या सही तैयारी और लगातार कोशिशों के बावजूद पॉटी ट्रेनिंग में प्रगति नहीं होती है, तो डॉक्‍टर से सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

ज्‍यादातर बच्‍चे 18 महीने से 3 साल की उम्र के बीच पॉटी ट्रेनिंग सीखना शुरू कर देते हैं। हालांक‍ि, इस उम्र में हर बच्‍चा पॉटी ट्रेनिंग सीख पाए ऐसा जरूरी नहीं है। पहले माता-प‍िता को समझना होगा क‍ि बच्‍चा पॉटी ट्रेनिंग के ल‍िए तैयार है या नहीं? अगर बच्‍चा 2 घंटे तक डायपर गीला क‍िए ब‍िना रह सकता है, पेशाब या पॉटी आने पर बता सकता है, तो यह इस बात के संकेत हैं क‍ि वह पॉटी ट्रेन‍िंग के ल‍िए तैयार है। अगर बच्‍चा खुद चलकर टॉयलेट तक जा सकता है, पॉटी सीट पर बैठ सकता है, गीले डायपर से असहज महसूस करता है, तो यह भी इस बात के संकेत हैं क‍ि बच्‍चा पॉटी ट्रेन‍िंग के ल‍िए तैयार है।

image credit: magnific

FAQ

  • बच्चे को दिन में कितनी बार पॉटी सीट पर बैठाना चाहिए?

    शुरुआत में बच्चे को सुबह उठने के बाद, भोजन के बाद और सोने से पहले पॉटी सीट पर बैठा सकते हैं। इसके अलावा, जब बच्चा पेशाब या पॉटी आने के संकेत दे, तब भी उसे टॉयलेट ले जाएं।
  • पॉटी ट्रेनिंग में बच्चे को कितना समय लगता है?

    हर बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग सीखने में अलग-अलग समय लगता है। कुछ बच्चे कुछ हफ्तों में सीख जाते हैं, जबकि कुछ बच्चों को कई महीने लग सकते हैं इसल‍िए धैर्य रखना जरूरी है।

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  • Current Version

    Oct 30, 2026 16:39 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao