क्या आपको भीड़ में जाने या नए लोगों से मिलने का नाम सुनते ही घबराहट होने लगती है या किसी पार्टी, ऑफिस मीटिंग, फैमली फंक्शन में जाने से पहले मन में कई तरह के सवाल चलने लगते हैं, जैसे कि लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे, मैं कुछ गलत तो नहीं बोल दूंगा या कहीं सबके सामने शर्मिंदा न होना पड़े? मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा की कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. निहारिका जायसवाल के अनुसार, अगर ऐसा कभी-कभार होता है तो यह सामान्य झिझक हो सकती है, लेकिन जब यही डर बार-बार होने लगे और व्यक्ति लोगों से मिलने-जुलने से बचने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
साइकेट्रिस्ट डॉ. निहारिका जायसवाल बताती हैं कि सामाजिक परिस्थितियों को लेकर लगातार डर और उससे बचने की आदत व्यक्ति की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि सामान्य झिझक और सोशल एंग्जायटी में क्या अंतर है और किन शुरुआती संकेतों पर एक्सपर्ट से सलाह लेने की जरूरत हो सकती है।
सोशल एंग्जायटी के 5 बड़े लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
साइकेट्रिस्ट डॉ. निहारिका जायसवाल के अनुसार, सोशल एंग्जायटी एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति सामाजिक परिस्थितियों में दूसरों के द्वारा जज किए जाने, मजाक बनने या गलत समझे जाने को लेकर डर में रहता है। यह डर स्कूल, कॉलेज, ऑफिस, रिलेशन या रोजाना की सामाजिक एक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है। समस्या तब मानी जाती है जब यह डर लगातार बना रहे और व्यक्ति की सामान्य जिंदगी में परेशानी डालने लगे।
1. लोगों के सामने बोलने में बहुत ज्यादा डर लगना
सोशल एंग्जायटी का शुरुआती संकेत लोगों के सामने बोलने से बचना हो सकता है। मीटिंग में अपनी बात रखने, क्लास में जवाब देने, किसी से परिचय करने या फोन पर बात करने जैसी सामान्य परिस्थितियां भी तनाव पैदा कर सकती हैं। व्यक्ति को डर रहता है कि कहीं वह कुछ गलत न बोल दे और दूसरे लोग उसका मजाक न बना दें।
2. बार-बार लगता है कि लोग जज कर रहे
सोशल एंग्जायटी में व्यक्ति दूसरों की नजरों और रिएक्शन को लेकर जरूरत से ज्यादा सतर्क रह सकता है। उसे लग सकता है कि लोग उसके कपड़ों, बोलने के तरीके, चेहरे या व्यवहार को नोटिस कर रहे हैं। छोटी-सी गलती होने पर भी वह लंबे समय तक उसी घटना के बारे में सोच सकता है। लोगों के बीच जाने से घबराहट (Nervousness in public) सोशल एंग्जायटी का लक्षण है।
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3. भीड़ में डर लगना
अगर कोई व्यक्ति लगातार पार्टियों, फैमली फंक्शन, ऑफिस की बैठकों या दूसरी सोशल एक्टिविटीज में जाने से बचता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार व्यक्ति किसी कार्यक्रम में जाने के बजाय बहाना बनाना पसंद करता है, क्योंकि उसे वहां लोगों से मिलने या बातचीत करने में डर लगता है।
4. लोगों के सामने शारीरिक लक्षण महसूस होना
साइकेट्रिस्ट डॉ. निहारिका जायसवाल बताती हैं कि सोशल एंग्जायटी केवल मन में डर पैदा नहीं करती, बल्कि शरीर पर भी असर डाल सकती है। सामाजिक स्थिति में जाने पर दिल तेज धड़कना, पसीना आना, हाथ कांपना, चेहरा लाल होना, आवाज कांपना या सांस तेज चलने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। इन लक्षणों की वजह से व्यक्ति सामाजिक परिस्थितियों से और ज्यादा बचने लग सकता है।
5. सोशल बातचीत के बाद भी खुद को लेकर टेंशन
कुछ लोगों में असली परेशानी बातचीत खत्म होने के बाद शुरू होती है। वे बार-बार सोचते हैं कि उन्होंने क्या कहा, सामने वाले ने उनके बारे में क्या सोचा होगा या कहीं उनसे कोई गलती तो नहीं हुई। इस तरह की लगातार आत्म-आलोचना और पुरानी बातचीत को बार-बार याद करना चिंता को बढ़ा सकता है।
social anxiety symptoms
साल 2022 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशि रिव्यू के अनुसार, सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (SAD) या सोशल फोबिया एक गंभीर मानसिक स्थिति है, जो सामान्य शर्मीलेपन से बहुत अलग है।
- यह समस्या विशेष रूप से युवाओं के सामाजिक विकास पर बुरा असर डालती है, जिससे रिश्ते, काम और व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होते हैं।
- इसके लक्षणों की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है।
- हालांकि, बिहेवियरल थेरेपी और दवाओं के सही मेल से इस स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है और मरीजों को बेहतर रिजल्ट मिल सकते हैं।
कब एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए?
साइकेट्रिस्ट डॉ. निहारिका जायसवाल सलाह देती हैं कि हर व्यक्ति कभी-कभी सामाजिक परिस्थितियों में असहज महसूस कर सकता है लेकिन अगर डर लगातार बना रहे, सोशल एक्टिविटीज से दूरी बढ़ने लगे, पढ़ाई या काम प्रभावित हो या रिश्तों पर असर पड़ने लगे, तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना सही होता है। सोशल एंग्जायटी का आकलन एक्सपर्ट व्यक्ति के लक्षणों और उनके जीवन पर पड़ रहे प्रभाव के आधार पर कर सकते हैं।
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निष्कर्ष
लोगों के बीच जाने में कभी-कभार झिझक होना नॉर्मल है, लेकिन लगातार डर, दूसरों के जज करने की चिंता, सामाजिक परिस्थितियों से बचना और शारीरिक लक्षण सोशल एंग्जायटी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इन्हें केवल शर्मीलापन समझकर नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते एक्सपर्ट से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
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FAQ
क्या सोशल एंग्जायटी सिर्फ शर्मीले लोगों को होती है?
नहीं, सोशल एंग्जायटी केवल शर्मीले स्वभाव वाले लोगों तक सीमित नहीं है। सामाजिक परिस्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता किसी भी व्यक्ति में हो सकती है।क्या सोशल एंग्जायटी बचपन में भी शुरू होती है?
हां, इसके लक्षण बचपन या किशोरावस्था में भी दिखाई दे सकते हैं। बच्चे सोशल एक्टिविटीज से बचने या नए लोगों के सामने ज्यादा झिझकने लग सकते हैं।क्या सोशल एंग्जायटी और शर्मीलापन एक ही चीज है?
नहीं। शर्मीलापन सामान्य व्यक्तित्व का हिस्सा हो सकता है, जबकि सोशल एंग्जायटी में डर और चिंता ज्यादा तेज होकर रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है।
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Sep 30, 2026 10:36 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Neeharika Jaiswal
