Wed Sep 30, 2026 | 11:33 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

क्या कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सोने से आंखों को नुकसान हो सकता है? बता रहे हैं डॉक्टर

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है, जैसे ऑक्सीजन की कमी, इंफेक्शन और कॉर्नियल अल्सर का खतरा। डॉ. पुरेंद्र भसीन सलाह देते हैं कि लेंस को सोने से पहले उतारें।
क्या कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सोने से आंखों को नुकसान हो सकता है? बता रहे हैं डॉक्टरक्या कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सोने से आंखों को नुकसान हो सकता है? बता रहे हैं डॉक्टर

कई लोग चश्मे की जगह कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, लेकिन कई बार लोगों को इन लेंसेज को पहनकर सो जाते हैं, लेकिन क्या कॉन्टैक्ट लेंस को पहनकर सोना सही है, क्या इससे कोई परेशानी हो सकती है? आइए इस बारे में Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Ratan Jyoti Netralaya Ophthalmic Institute & Research Centre, Gwalior से जानें।

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से क्या होता है?

डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से व्यक्ति को आंखों से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं, जो कई बार आंखों को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।

डॉ. पुरेंद्र भसीन आगे कहते हैं, "कॉन्टैक्ट लेंसेज पहनकर सो जाना एक आम गलती है, खासकर तब जब लेंस रातभर के इस्तेमाल के लिए प्रिस्क्राइब्ड न हों। इससे आंखों तक ऑक्सीजन की पहुंच कम हो सकती है और इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है।"

1. कॉर्निया तक ऑक्सीजन न पहुंचने

कॉर्निया आंखों का अहम हिस्सा है। इसको स्वस्थ रखने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में कॉन्टैक्ट लेंस को लगाकर सोने से लेंस एक बैरियर की तरह काम करता है, जिससे कॉर्निया तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। इसके कारण कॉर्निया में सूजन आने की समस्या हो सकती है, जिसे कॉर्नियल हाइपोक्सिया (Corneal Hypoxia) कहा जाता है।

इसे भी पढ़ें: नींद पूरी होने के बाद भी आंखें थकी हुई क्यों लगती हैं? डॉक्टर से जानें

2. बढ़ता है इंफेक्शन का खतरा

सोते समय लेंस पहनने के कारण आंखों में बैक्टीरिया, फंगस और अन्य माइक्रोऑर्गेनिज्म के पनपने के कारण होता है। बैक्टीरियल केराटाइटिस और अकेंथामीबा केराटाइटिस जैसे गंभीर इंफेक्शन के कारण कुछ दिनों के बाद कॉर्निया को गंभीर नुकसान हो सकता है। जिसके कारण व्यक्ति को आंखों में बहुत दर्द, रेडनेस, धुंधला दिखने और आंखों से पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

sleeping with contact lenses side effects 01sleeping with contact lenses side effects 01

3. कॉर्नियल अल्सर की समस्या

जब कॉर्निया को लगातार ऑक्सीजन नहीं मिलती और वहां इंफेक्शन फैलने लगता है, तो कॉर्निया की ऊपरी परत पर घाव या छाला बन जाता है। इसे कॉर्नियल अल्सर कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।

इसके कारण व्यक्ति को आंखों में चुभन, रोशनी से सेंसिटिविटी और तेज दर्द होने जैसी समस्याएं बढ़ जाती है। इसके कारण व्यक्ति को धुंधला दिखने की समस्या हो सकती है।

4. नसों का असामान्य रूप से बढ़ना

जब कॉर्निया को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, तो कॉर्निया के आसपास असामान्य रूप से ब्लड वेसल्स उगने लगती हैं। इस स्थिति को कॉर्नियल नियोवैस्कुलराइजेशन कहा जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन समय के साथ यह कॉर्निया को प्रभावित कर सकता है। जिसके कारण आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

5. ड्राई आई की समस्या

सोते समय आंखों में नेचुरल आंसू का बनना कम हो जाता है। ऐसे में जब आप लेंस पहनकर सोते हैं तो आंखों की पूरी नमी सोख लेता है। इसके कारण सुबह उठने पर आंखों के बहुत ज्यादा ड्राई, लाल या जलन महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसे भी पढ़ें: तेज रोशनी में आंखें अपने आप क्यों सिकुड़ जाती हैं? डॉक्टर से जानें

क्या कहती है स्टडी?

CDC के अनुसार, कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोना सेफ नहीं है। कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आपको आंखों का इंफेक्शन होने का खतरा 6 से 8 गुना बढ़ जाता है।

कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते समय रखें सावधानियां

डॉ. पुरेंद्र भसीन का कहना है, कॉन्टैक्ट लेंस पहनते समय आंखों की प्रोटैक्शन का खास ध्यान रखना चाहिए।

सोने से पहले लेंस जरूर निकालें

रात को सोने से पहले लेंस हमेशा उतारे। ऐसा करने से लेंस के कारण होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।

ओवरनाइट लेंस सिर्फ सलाह पर लें

सिर्फ वही लेंस रात में पहने जा सकते हैं, जिन्हें डॉक्टर ने खास रूप से 'Extended Wear' या 'Overnight Use' के लिए प्रिस्क्राइब्ड किया हो। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

साफ-सफाई का खास ध्यान रखें

लेंस को निकालने के साथ इसकी साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। इसके लिए स्टेरिलाइज्ड लेंस सॉल्यूशन (Lens Solution) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद इनको केस में रखें।

निष्कर्ष

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोना एक ऐसी गलती है, जो आपकी देखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। यह आदत कॉर्निया तक ऑक्सीजन न पहुंचने, ड्राई आई, आंखों के गंभीर इंफेक्शन और कॉर्नियल अल्सर जैसी स्थितियों का कारण बन सकती है। सिर्फ वही लेंस रात में इस्तेमाल किए जाने चाहिए, जो डॉक्टर से ओवरनाइट यूज के लिए अप्रूव्ड और प्रिस्क्राइब्ड हों।

अगर लेंस निकालने के बाद भी आंखों में दर्द, रेडनेस या धुंधलापन महसूस हो, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, ताकि आंखों से जुड़ी किसी भी स्वास्थ्य समस्या से समय रहते बचा जा सके।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • कॉन्टैक्ट लेंस लगाने के नुकसान हैं?

    कॉन्टैक्स लेंस को सही तरीके से न लगाने से व्यक्ति को आंखों में इंफेक्शन, ऑक्सीजन की कमी और आंखों में ड्राईनेस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • आंखों को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?

    आंखों को हेल्दी रखने नियमित रूप से बैलेंस डाइट लें, धूप में रहने से बचें, पर्याप्त नींद लें, आंखों को रगड़ने से बचें, 20-20-20 रूल फॉलो करें, शरीर को हाइड्रेटेड रखें और नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं।

Read Next

→ दीवारों पर सीलन और फंगस (Mold) से हो सकती है फेफड़ों की बीमारी? डॉक्टर से जानें कनेक्शन

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 30, 2026 21:52 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin