Kattu Aata vs Singhara Atta: नवरात्रों में लोग कुट्टू के आटे की पकौड़ी, सिंघारे के आटे का हलवा और पूड़ी खूब खाते हैं। जो लोग व्रत रखते हैं, उनके यहां यह सात्विक भोजन का अहम इंग्रीडिएंट है, लेकिन दोनों में काफी अंतर है जैसे जिन लोगों की गर्म प्रकृति है, उन्हें सिंघाड़ा का आटा खाना चाहिए और जो लोग ठंडी प्रकृति वाले हैं, उन्हें कुट्टू का आटा खाना चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को ग्लूटेन एलर्जी है, उन्हें कुट्टू के आटे का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा भी इन दोनों ही अनाजों में काफी ज्यादा अंतर है, जिस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Ms. Edwina Raj, Head of Services - Clinical Nutrition & Dietetics, Aster CMI Hospital, Bangaluru से बात की।
कुट्टू आटा या सिंघाड़ा आटा कौन सा बेहतर है?
डाइट एक्सपर्ट एडविना राज कहती हैं कि नवरात्रि के व्रत के दौरान कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, दोनों ही अच्छे विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी हर किसी के लिए अपने आप में बेहतर नहीं है।
| कुट्टू का आटा | सिंघाड़े का आटा |
| यह आटा गर्म होता है | यह आटा ठंडा होता है |
| प्रोटीन से भरपूर | फाइबर से भरपूर |
| कब्ज की समस्या में खाएं | कब्ज में खाने से बचें |
| ग्लूटेन एलर्जी वाले इसे न खाएं | ग्लूटेन एलर्जी वाले इसे खा सकते हैं |
| किडनी के मरीज इसे खा सकते हैं | किडनी के मरीज इसे खाने से बचें |
कुट्टू का आटा
बकव्हीट, जिसे आम तौर पर कुट्टू कहा जाता है, असल में अनाज नहीं, बल्कि एक बीज है। यह कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ कुछ प्रोटीन, फाइबर और मिनरल भी देता है। तो कह सकते हैं कि
- जिन लोगों को प्रोटीन से भरपूर किसी अनाज की तलाश है ,उन्हें कट्टू का आटा खाना चाहिए।
- जो लोग व्रत में पेट भरने वाला खाना चाहते हैं, उनके लिए कुट्टू एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि यह आम तौर पर रिफाइंड आटे से बनी कई चीजों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन और फाइबर देता है। इसलिए मसल बिल्डिंग और एक्सरसाइज करने वाले लोग इसे व्रत के सात्विक भोजन का हिस्सा बना सकते हैं।
- जिन लोगों को व्रत में कब्ज की समस्या हो जाती है उनके लिए भी कुट्टू का आटा बेहद फायदेमंद है।
इसे भी पढ़ें: बेहतर पाचन के लिए करें इन 8 प्रोटीन रिच फूड्स का सेवन, पेट की समस्याओं से मिलेगी राहत
कुट्टू आटा या सिंघाड़ा आटा कौन सा बेहतर है?
डाइट एक्सपर्ट एडविना राज कहती हैं कि नवरात्रि के व्रत के दौरान कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, दोनों ही अच्छे विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी हर किसी के लिए अपने आप में बेहतर नहीं है।
| कुट्टू का आटा | सिंघाड़े का आटा |
| यह आटा गर्म होता है | यह आटा ठंडा होता है |
| प्रोटीन से भरपूर | फाइबर से भरपूर |
| कब्ज की समस्या में खाएं | कब्ज में खाने से बचें |
| ग्लूटेन एलर्जी वाले इसे न खाएं | ग्लूटेन एलर्जी वाले इसे खा सकते हैं |
| किडनी के मरीज इसे खा सकते हैं | किडनी के मरीज इसे खाने से बचें |
कुट्टू का आटा
बकव्हीट, जिसे आम तौर पर कुट्टू कहा जाता है, असल में अनाज नहीं, बल्कि एक बीज है। यह कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ कुछ प्रोटीन, फाइबर और मिनरल भी देता है। तो कह सकते हैं कि
- जिन लोगों को प्रोटीन से भरपूर किसी अनाज की तलाश है ,उन्हें कट्टू का आटा खाना चाहिए।
- जो लोग व्रत में पेट भरने वाला खाना चाहते हैं, उनके लिए कुट्टू एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि यह आम तौर पर रिफाइंड आटे से बनी कई चीजों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन और फाइबर देता है। इसलिए मसल बिल्डिंग और एक्सरसाइज करने वाले लोग इसे व्रत के सात्विक भोजन का हिस्सा बना सकते हैं।
- जिन लोगों को व्रत में कब्ज की समस्या हो जाती है उनके लिए भी कुट्टू का आटा बेहद फायदेमंद है।
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सिंघाड़े का आटा
साल 2024 में, Indian Journal Of Applied Research में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि सिंघाड़े का आटा गुड कार्बोहाइड्रेट और आयरन, कैल्शियम, जिंक और फास्फोरस जैसे एनर्जी बढ़ाने वाले पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्रोत है।
डाइट एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि सिंघाड़े का इस्तेमाल भी व्रत के दौरान आम तौर पर किया जाता है और यह कार्बोहाइड्रेट और कुछ मिनरल देता है। हालांकि, तैयार डिश की न्यूट्रिशनल वैल्यू इस बात पर निर्भर करती है कि आटा कैसे तैयार किया गया है और उसमें कौन सी चीजें मिलाई गई हैं। सिंघाड़ें का आटा शरीर को हाई एनर्जी देने वाला है हालांकि, इसे खाने से तुरंत शुगर स्पाइक होता है इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए। इसके अलावा
- यह पेट के लिए ठंडा और आरामदायक होता है और जिन लोगों का पाचन क्रिया स्लो है, उन्हें सिंघाड़े का आटा खाना चाहिए क्योंकि यह आसानी से पच जाता है।
- इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है इसलिए वेट लॉस करने वाले लोग इसे खा सकते हैं।
- सिंघाड़ा आटा ग्लूटेन फ्री है इसलिए ग्लूटेन एलर्जी से पीड़ित लोग इसका सेवन कर सकते हैं।
- इसमें पोटेशियम की अच्छी मात्रा हो सकती है इसलिए जिन लोगों को किडनी से जुड़ी समस्याएं उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए।
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सिंघाड़े के आटे को भी व्रत के संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है और इसे अलग-अलग तरह से इस्तेमाल करना आसान हो सकता है। सिर्फ इस बात पर ध्यान देने के बजाय कि कौन सा आटा बेहतर है, लोगों को खाने की मात्रा और पूरे भोजन पर ध्यान देना चाहिए। सब्जी, दही या प्रोटीन के किसी अन्य अच्छे स्रोत के साथ कुट्टू या सिंघाड़े की रोटी खाना, उसी आटे से बने डीप-फ्राइड व्रत के स्नैक्स की तुलना में ज्यादा संतुलित हो सकता है।
निष्कर्ष:
लोगों को यह भी याद रखना चाहिए कि व्रत का खाना तब कैलोरी से भरपूर हो सकता है जब उसमें ज्यादा मात्रा में घी, तेल, चीनी या तली हुई चीजें मिलाई जाती हैं। जो लोग वजन या ब्लड शुगर को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए दोनों आटों में से किसी एक को चुनने के बजाय खाना बनाने का तरीका और खाने की मात्रा ज्यादा मायने रख सकती है। डायबिटीज या दूसरी मेडिकल कंडीशन वाले लोगों को खान-पान में बड़े बदलाव करने से पहले अपनी न्यूट्रिशनल जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए। आखिर में, सही मात्रा में और कम प्रोसेस की गई चीजों से तैयार किए जाने पर कुट्टू और सिंघाड़ा, दोनों ही नवरात्रि के संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं।
FAQ
सिंघाड़ा कब नहीं खाना चाहिए?
किडनी के मरीज, डायबिटीज के मरीज और कब्ज के मरीजों को सिघाड़ा खाने से बचना चाहिए।सिंघाड़े के आटे को दूध में मिलाकर पीने से क्या होता है?
सिंघाड़े में कैल्शियम भी होता है और जब आप इसे दूध में मिलाकर पीते हैं तो शरीर इसे अच्छी तरह से अवशोषित कर लेता है जिससे हड्डियों की सेहत बेहतर होती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
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Current Version
Oct 13, 2026 17:09 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Edwina Raj
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