भारत सरकार द्वारा खोले जन औषधि केंद्र (Pradhan Mentri Bharatiya Janaushadhi Kendra) में सस्ते दामों पर दवाएं मिलती हैं। डॉक्टर ने आपको कोई भी दवा लिखी हो इन केंद्रों पर सस्ते दामों में ये दवाएं मिल जाएंगी बस फर्क ब्रांड का होगा। अब आमतौर पर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि क्या जेनेरिक दवा और ब्रांडेड दवा के असर में अंतर होता है? कुछ लोगों को लगता है कि ब्रांडेड दवाएं जेनेरिक दवाओं की तुलना ज्यादा असरदार होते हैं इससे लोग जल्दी ठीक हो जाते हैं लेकिन इस पर Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangaluru का कुछ और ही कहना है।
क्या जेनेरिक दवा और ब्रांडेड दवा के असर में फर्क होता है?
डॉ. पूजा पिल्लई कहती हैं कि जेनेरिक और ब्रांडेड दवाएं उतनी ही असरदार हो सकती हैं अगर उनमें एक जैसा एक्टिव इंग्रीडिएंट हो। आगे डॉ. पिल्लई कहती हैं कि एक जैसे इंग्रीडिएट का मलतब होता है दवा की एक जैसी स्ट्रेंथ, डोज का रूप और क्वालिटी स्टैंडर्ड एक हों, क्योंकि बीमारी का इलाज करने वाली मुख्य दवा एक ही होती है। भले ही ब्रांड का नाम, कीमत, रंग, आकार, स्वाद और इनएक्टिव इंग्रीडिएंट अलग-अलग हो सकते हैं। मंजूरी-प्राप्त जेनेरिक दवाओं को क्वालिटी और परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड पूरे करने होते हैं, लेकिन मरीजों को भरोसेमंद फार्मेसी से दवाएं खरीदनी चाहिए और ऐसे प्रोडक्ट इस्तेमाल करने चाहिए जो ठीक से मंजूर और स्टोर किए गए हों।
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जेनेरिक दवा और ब्रांडेड दवा में अंतर क्या है?
डॉ. पूजा पिल्लई कहती हैं कि जेनेरिक दवा और ब्रांडेड दवा में मुख्य अंतर आमतौर पर कीमत और बनाने वाली कंपनी का होता है, न कि दवा के काम करने की क्षमता का। इसके अलावा जेनेरिक दवाएं अक्सर सस्ती होती हैं क्योंकि बनाने वाली कंपनियों को ओरिजिनल ब्रांडेड प्रोडक्ट से जुड़े डेवलपमेंट के खर्च दोबारा नहीं करने पड़ते।
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हालांकि, कुछ लोग इनएक्टिव इंग्रीडिएंट जैसे कि प्रिजर्वेटिव, फिलर या कलरिंग एजेंट में अंतर देख सकते हैं, जो कभी-कभी दवा के असर को सहने की क्षमता या एलर्जी पर असर डाल सकते हैं और कुछ दवाओं के लिए खास तौर पर सावधानी से निगरानी की जरूरत होती है क्योंकि दवा के असर में थोड़ा सा भी अंतर मायने रख सकता है।
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ब्रांडेड दवा क्यों महंगी होती हैं?
जेनेरिक दवा की तुलना ब्रांडेड दवाओं को विकसित करना ज्यादा महंगा होता है क्योंकि ब्रांडेड दवा बनाने वाली कंपनी दवा की सुरक्षा और असर को साबित करने के लिए क्लिनिकल स्टडीज करती है। ये हर दवा और इंग्रीडिएंट पर लागू होता है। इन जरूरी स्टडीज को पूरा होने में कई साल लग जाते हैं और इसलिए ये महंगी हो जाती हैं।
जेनेरिक दवा क्यों सस्ती होती हैं?
जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को उन महंगे क्लिनिकल ट्रायल्स को बार-बार करने की जरूरत नहीं होती। सबकुछ पहले से तय होता है क्योंकि पहले ही इंग्रीडिएंट्स का टेस्टिंग को चुकी होती हैं, मार्केटिंग की जरूरत नहीं होती और इस तरह से खर्चा बचता है तो लोगों को सस्ते दामों पर मिल जाती है।
कैसे पता चलेगा कि दवा जेनेरिक है या ब्रांडेड?
जेनेरिक है या ब्रांडेड दवा का पता लगाने के लिए आपको बस दवा को बहुत ध्यान से पढ़ना है और कुछ चीजों को देखना है जैसे-
- जेनेरिक दवाओं में सॉल्ट के नाम लिखे रहते हैं जैसे- पैरासिटामोल 500 mg
- ब्रांडेड दवा में ट्रेडमार्क या ब्रांड नाम से दवाएं रहती हैं जैसे-डोलो 650 mg
- जेनेरिक दवाओं में एमआरपी कम होती है।
- ब्रांडेड दवा में एमआरपी ज्यादा होती है।
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क्या हर दुकान पर मिलती हैं जेनेरिक दवाएं?
नहीं, जेनेरिक दवाएं हर दुकान पर नहीं मिलती हालांकि, कुछ दुकानों पर मिल सकती हैं लेकिन ऐसे दुकानों की संख्या बहुत कम होती है। ऐसे में आप जन औषधि केंद्र जा सकते हैं और इसका पता ऑनल लगा सकते हैं। आप 'जन औषधि सुगम ऐप' के जरिए अपने लोकेशन से जन औषधि केंद्र की दूरी का पता लगा सकते हैं और अपने इलाके के सबसे नजदीकी जन औषधि केंद्र को खोज सकते हैं।
निष्कर्ष:
डॉ. पिल्लई कहती हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई सस्ता जेनेरिक विकल्प उपलब्ध है, मरीजो को अपनी दवा बंद नहीं करनी चाहिए, न ही उसे बदलना चाहिए या उसकी डोज में बदलाव करना चाहिए। हालांकि, वे अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछ सकते हैं कि क्या कोई जेनेरिक दवा उनके लिए सही है। ज्यादातर आम दवाओं के मामले में, एक सही जेनेरिक दवा कम कीमत पर वही फायदा दे सकती है। असल में, सही दवा, डोज, क्वालिटी, सोर्स और बताए गए इलाज का सही तरीके से पालन करना ज्याजा जरूरी है, न कि यह देखना कि पैकेज पर किसी मशहूर ब्रांड का नाम है या नहीं।
FAQ
क्या जेनेरिक दवा पेटेंट दवा है?
जेनेरिक दवा पेटेंट दवा नहीं हैं। पेटेंट दवा का मतलब होता है वो मूल दवा जिसे कोई फार्मास्यूटिकल कंपनी अपनी रिसर्च से पहली बार बनाती है और इन्हें बेचने का अधिकार सिर्फ उन्हीं के पास होता है।क्या जेनेरिक दवा खानी चाहिए?
जेनेरिक दवा बिलकुल खानी चाहिए। जेनेरिक दवा भी उतनी ही असरदार होती है जितनी ब्रांडेड दवा। बस दाम का फर्क है काम दोनों के एक ही हैं।
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Sep 14, 2026 16:41 IST
Modified By : Pallavi Kumari Sep 14, 2026 16:41 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr. Pooja Pillai