Fri Sep 18, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Monica Agarwal , Senior Consultant – Obstetrics & Gynaecology

सी सेक्शन के बाद अचानक से शरीर में कंपकंपी क्यों होती है? डॉक्टर से जानें

Causes of Chills After Cesarean Delivery: सी-सेक्शन के बाद कंपकंपी होना नॉर्मल है और ये पोस्टपार्टम चिल्स एपिड्यूरल एनेस्थीसिया की वजह से हो सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट से जानते हैं कि कब है चिंता की बात?
सी सेक्शन के बाद अचानक से शरीर में कंपकंपी क्यों होती है? डॉक्टर से जानेंसी सेक्शन के बाद अचानक से शरीर में कंपकंपी क्यों होती है? डॉक्टर से जानें

Causes of Chills After Cesarean Delivery: C-सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी के बाद शरीर में कंपकंपी होना कई महिलाओं ने अनुभव किया है और यह काफी सामान्य और बॉडी का नेचुरल प्रोसेस है। मेडिकल भाषा में इसे पोस्टपार्टम चिल्स या सिजेरियन शेक्स कहते हैं। ज्यादातर मामलों में ये सी सेक्शन के कुछ देर रहता है और फिर अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, बहुत सी महिलाएं इसके कारणों के बारे में जानने के लिए उत्सुक होती हैं। ऐसे में हमने Dr. Monica Agarwal, Associate Director - Department of Obestrics and Gynecology at Cloudnine Group of Hospitals, Chandigarh से बात की और उन कारणों के बारे में जाना जो सेक्शन के बाद शरीर में कंपकंपी की वजह बन सकते हैं जैसे

एनेस्थीसिया का असर 

सी सेक्शन सर्जरी के दौरान महिलाओं को स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया दिया जाता है जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला तंत्र यानी थर्मोरेगुलेशन कुछ समय के लिए प्रभावित होता है। ऑपरेशन के बाद जब एनेस्थीसिया का असर कम होने लगता है और नसें सामान्य होती हैं, तो शरीर में कंपन महसूस हो सकता है।

हार्मोनल बदलाव के कारण

पूरी प्रेग्नेंसी एक तरह से हार्मोन्स का ही सफर है। सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद शरीर में ऑक्सीटोसिन, एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स का स्तर बहुत तेजी से बदलता है, जिसके कारण शरीर में कंपन जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है।

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ऑपरेशन थिएटर का ठंडा तापमान

किसी भी प्रकार के ऑपरेशन से बचाव के लिए ऑपरेशन रूम का तापमान काफी ठंडा रखा जाता है। ऑपरेशन के दौरान शरीर की खुली हुई त्वचा और सर्जिकल प्रक्रिया के बीच शरीर की गर्माहट बाहर निकल जाती है जिससे ऑपरेशन के बाद ठंड और कंपकंपी महसूस हो सकती है।

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खून की कमी से

डिलीवरी के दौरान होने के होने वाली ब्लीडिग या कमजोरी, साथ ही नस के जरिए दिए जाने वाले ठंडे इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड्स और दवाइयों की वजह से भी शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है जिससे महिलाओं को ऑपरेशन के बाद अचानक से शरीर में कंपन महसूस होती है।

BMC Anesthesiology जर्नल में बताया गया है कि 42% महिलाओं को सी-सेक्शन के दौरान कंपकंपी होती है। यह एक आम समस्या है और डॉक्टर इसे संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार रहते हैं। इसी स्टडी में ये भी बताया गया है कि

  • आपातकालीन (Emergency) डिलीवरी में कंपकंपी ज्यादा होने का खतरा होता है। अगर सी-सेक्शन अचानक या आपातकालीन स्थिति में किया जा रहा है, तो कंपकंपी होने की संभावना पहले से तय (elective) ऑपरेशन की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होती है।
  • इसके अलावा अगर गर्भवती महिला को लेबर रूम से सीधे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जाता है बजाय सामान्य वार्ड से जाने के तो भी कंपकंपी का खतरा बढ़ जाता है।
  • ऑपरेशन शुरू होने से पहले जब त्वचा को कीटाणुरहित (disinfect) करने के लिए साफ किया जाता है, तब महिलाओं को सबसे ज्यादा कंपकंपी महसूस होती है। इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहना मददगार हो सकता है।

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क्या यह खतरनाक है या नॉर्मल?

सी सेक्शन के बाद होने वाली कंपकंपी असल में बेहद नॉर्मल है और इसे लेकर परेशान नहीं होना चाहिए। दरअसल, शरीर में जब इतना बड़ा शिफ्ट हुआ है तो शरीर के हर अंग में बदलाव आता है। बॉडी को एक बार फिर से नए सिरे से रेगुलेट करना होता है जिसकी शुरुआत को भी आप कंपन समझ सकते हैं।

इससे राहत के लिए क्या करना चाहिए?

C-सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी के बाद कंपकंपी होने पर अपनी नर्स से गर्म कंबल या गर्माहट देने वाले दूसरे विकल्पों के बारे में बात करें। इसके अलावा स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट इसमें मददगार हो सकता है। अपने नवजात शिशु को अपनी छाती से लगाकर रखने से आपके शरीर का तापमान सही रहता है और नर्वस सिस्टम शांत होता है। इससे कंपकंपी अपने आप कम होने लगती है। इसके अलावा अपनी मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम को आराम देने के लिए धीरे-धीरे और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।

कब है चिंता की बात?

हालांकि, इसमें कोई चिंता कि बात नहीं है लेकिन अगर कंपकंपी लगातार बनी रहती है और बुखार होने लगे तो इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं। तेज बुखार या ठंड लगकर कंपकंपी छूटना पेट के निचले हिस्से या टांकों वाली जगह पर तेज दर्द इंफेक्शन के लक्षण है। टांकों से बदबूदार डिस्चार्ज या मवाद आना असामान्य ब्लीडिंग होने पर भी डॉक्टर को दिखाएं। अगर आपको चक्कर आ रहे हैं या सांस फूलने के साथ कंपकंपी हो रही है तो भी डॉक्टर से बात करें।

निष्कर्ष:

अंत में बस इतना ही समझें कि प्रसव की थकान, दर्द और घबराहट या उत्तेजना का शारीरिक असर भी कंपकंपी के रूप में सामने आता है। कई महिलाएं इसे लेकर काफी तनाव में रहती हैं और पूरे प्रेग्नेंसी के दौरान भी कई बार शरीर में तनाव की स्थिति बनी रहती है और डिलीवरी के बाद जब शरीर अचानक से खुद को ठंडा महसूस करता है तो कंपकंपी से परेशान हो जाता है। इसके अलावा मरीज की उम्र, एनेस्थीसिया और सिजेरियन डिलीवरी की अवधिऔर सर्जरी का प्रकार भी इसका कारण हो सकता है लेकिन इससे परेशान न हो। इस डॉक्टर्स आपके साथ ही होते हैं जिससे आप अपनी परेशानी तुरंत शेयर करके, सही इलाज की मदद से जल्दी रिकवरी कर सकते हैं।

FAQ

  • कंपकंपी होने पर मैं तुरंत क्या कर सकती हूं?

    आप नर्स से गर्म कंबल मांग सकती हैं या अपने नवजात शिशु के साथ स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट कर सकती हैं। गहरी सांस लेना भी मदद करता है।
  • C सेक्शन ठीक होने में कितना समय लगता है?

    सी-सेक्शन के बाद बाहरी घाव को ठीक होने में 6 से 8 सप्ताह लग सकते हैं। हालांकि, आंतरिक मांसपेशियों और नसों को नॉर्मल होने में कई महीने लग सकते हैं। 

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Disclaimer

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Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 18, 2026 17:38 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Monica Agarwal

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