Tue Oct 20, 2026 | 02:38 AM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

क्या सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है? डॉक्टर से जानें इसकी सच्चाई

सोरायसिस मुख्य रूप से त्वचा को प्रभावित करती है और इसके शुरुआती लक्षण भी पपड़ीदार त्वचा के रूप में उभरते हैं। हालांकि, यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करती है। इस लेख में हम इन्हीं बातों को विस्तार से समझेंगे।
क्या सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है? डॉक्टर से जानें इसकी सच्चाई
क्या सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है? डॉक्टर से जानें इसकी सच्चाई

यह बात तो हम सभी जानते हैं कि सोरायसिस त्वचा संबंधी समस्या है। ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है, जबकि हकीकत यह है कि इस समस्या को सिर्फ त्वचा से जोड़कर देखना सही नहीं है। यह एक सिस्टमिक, इम्यून-मीडिएटेड और सूजन संबंधी यानी इन्फ्लेमेटरी कंडीशन है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसी बात को इस लेख में और बेहतर तरीके से समझेंगे। इस विषय को विस्तार से जानने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की।

क्या सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है?

is psoriasis just a skin disease or systemic condition 1is psoriasis just a skin disease or systemic condition 1

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सोरायसिस त्वचा से जुड़ी समस्या है। आमतौर पर इसके साफ लक्षण त्वचा पर नजर आते हैं, लेकिन इसे सिर्फ त्वचा तक जोड़कर देखना सही नहीं है। National Psoriasis Foundation की मानें, तो इसकी असली वजह प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) से संबंधित है।

National Psoriasis Foundation में स्पष्ट किया गया है कि जब इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है, तो यह सूजन बढ़ाने वाले सिग्नल पूरे खून में भेजने लगता है। इससे स्किन सेल्स बहुत तेजी से बनने लगती हैं और पूरे शरीर में सूजन फैल जाती है। असल में, सूजन पैदा करने वाले ये सिग्नल शरीर के अंदरूनी हिस्से में घूमते रहते हैं। इसलिए, इसे सिर्फ त्वचा की एक साधारण बीमारी मानने के बजाय मुख्य रूप से सोरायटिक डिजीज (सोरायसिस से जुड़ी बीमारी) कहा जाता है।

इसे भी पढ़ें: सोरायसिस का जोखिम बढ़ा सकते हैं ये कारक, डॉक्टर से जानें कितना गंभीर

सोरायसिस किन हिस्सों को प्रभावित करता है?

1. जोड़ों में दर्दः Cleveland Clinic की मानें, तो सोरायसिस के 3 में से एक मरीज को सोरायटिक अर्थराइटिस हो जाता है। सोरायटिक अर्थराइटिस एक प्रकार का गठिया रोग है, जो कि जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा करता है। सोरायटिक अर्थराइटिस भी ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसमें इम्यून सिस्टम असामान्य तरीके से काम करने लगता है।

2. हार्ट हेल्थ पर असरः साल 2018 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित एक समीक्षात्मक शोध पत्र से पता चलता है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में सोरियासिस के मरीजों में हृदय रोगों जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप का जोखिम अधिक होता है। रिपोर्ट में आगे समझाया गया है कि सोरियासिस के कारण शरीर में सूजन पैदा हो जाती है। एक समय बाद नसों में प्लाक जमने लगता है, जो हार्ट डिजीज के रिस्क को बढ़ा देता है।

इसे भी पढ़ें: सोरायसिस की पहचान कैसे करें? जानें त्वचा और नाखूनों पर दिखने वाले मुख्य संकेत

3. मेटाबोलिक समस्याएंः साल 2025 में मेडिकल जर्नल Frontiers in Medicine में प्रकाशित एक सिस्टमिक रिव्यू के अनुसार, सामान्य लोगों की तुलना में सोरायसिस के रोगियों में मेटाबोलिक सिंड्रोम होने का जोखिम काफी अधिक होता है। इतना ही नहीं, सोरायसिस की कंडीशन जितना ज्यादा गंभीर होती है, मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा उतना ही ज्यादा बढ़ता जाता है। यह सब समस्याएं अंदरूनी सूजन के कारण होती है। सोरायसिस की वजह से शरीर क्रोनिक इंफ्लेमेशन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई बीपी आदि समस्याएं भी हो सकती हैं।

4. मेंटल हेल्थ पर असरः National Psoriasis Foundation के अनुसार, सोरायसिस से पीड़ित लोगों में मानसिक तनाव और मूड से जुड़ी समस्या स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक होती है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में सोरायसिस के मरीजों में डिप्रेशन होने की संभावना 39 फीसदी और एंग्जाइटी की संभावना 31 फीसदी तक होती है। यही नहीं, कई सोरायसिस के मरीज खुद को पूरी तरह दूसरों से अलग-थलग कर लेते हैं और लोगों के साथ सोशल होने से बचते हैं।

इसे भी पढ़ें: जेनिटल सोरायसिस क्या है? डॉक्टर से जानें लक्षण, कारण, इलाज और सेक्स लाइफ पर असर

डॉक्टर की सलाह

डॉ. करुणा मल्होत्रा सलाह देती हैं, "सोरायसिस जैसी समस्या को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह ऐसी समस्या है, जो कभी भी पूरी तरह ठीक नहीं होती है। क्रोनिक कंडीशन होने के कारण यह शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। खासकर, सोरायसिस के मरीजों में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी हो जाती हैं। इसलिए, जरूरी है कि जब भी किसी को सोरायसिस जैसी समस्या हो या इसके शुरुआती लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाएं।"

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि सोरायसिस एक गंभीर समस्या है और यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करती है। सोरायसिस के कारण सोरायटिक अर्थराइटिस हो जाता है, जिससे हड्डियां स्टिफ हो जाती हैं और मरीज के चलना-फिरना सहज नहीं रह जाता है। इस तरह की स्थिति में क्या किया जाना चाहिए, इस बारे में जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • सोरायसिस के लक्षण किन कारणों से बढ़ सकते हैं?

    मानसिक तनाव, त्वचा पर चोट या कटना (Koebner phenomenon), धूम्रपान, शराब का सेवन और दवाएं के प्रभाव के कारण सोरायसिस के लक्षण बढ़ सकते हैं।
  • सोरायसिस के मरीजों को किन खाने के चीजों से परहेज करना चाहिए?

    सोरायसिस के मरीजों को रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड शुगर, डेयरी प्रोडक्ट्स और शराब का सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे उनकी कंडीशन बिगड़ सकती है।

Read Next

→ लंग बायोप्सी क्या है? डॉक्टर से जानें इसकी प्रक्रिया क्या है और जरूरत कब पड़ती है?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 03, 2026 13:37 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra