यह बात तो हम सभी जानते हैं कि सोरायसिस त्वचा संबंधी समस्या है। ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है, जबकि हकीकत यह है कि इस समस्या को सिर्फ त्वचा से जोड़कर देखना सही नहीं है। यह एक सिस्टमिक, इम्यून-मीडिएटेड और सूजन संबंधी यानी इन्फ्लेमेटरी कंडीशन है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसी बात को इस लेख में और बेहतर तरीके से समझेंगे। इस विषय को विस्तार से जानने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की।
क्या सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी बीमारी है?
is psoriasis just a skin disease or systemic condition 1
इसमें कोई दो राय नहीं है कि सोरायसिस त्वचा से जुड़ी समस्या है। आमतौर पर इसके साफ लक्षण त्वचा पर नजर आते हैं, लेकिन इसे सिर्फ त्वचा तक जोड़कर देखना सही नहीं है। National Psoriasis Foundation की मानें, तो इसकी असली वजह प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) से संबंधित है।
National Psoriasis Foundation में स्पष्ट किया गया है कि जब इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है, तो यह सूजन बढ़ाने वाले सिग्नल पूरे खून में भेजने लगता है। इससे स्किन सेल्स बहुत तेजी से बनने लगती हैं और पूरे शरीर में सूजन फैल जाती है। असल में, सूजन पैदा करने वाले ये सिग्नल शरीर के अंदरूनी हिस्से में घूमते रहते हैं। इसलिए, इसे सिर्फ त्वचा की एक साधारण बीमारी मानने के बजाय मुख्य रूप से सोरायटिक डिजीज (सोरायसिस से जुड़ी बीमारी) कहा जाता है।
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सोरायसिस किन हिस्सों को प्रभावित करता है?
1. जोड़ों में दर्दः Cleveland Clinic की मानें, तो सोरायसिस के 3 में से एक मरीज को सोरायटिक अर्थराइटिस हो जाता है। सोरायटिक अर्थराइटिस एक प्रकार का गठिया रोग है, जो कि जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा करता है। सोरायटिक अर्थराइटिस भी ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसमें इम्यून सिस्टम असामान्य तरीके से काम करने लगता है।
2. हार्ट हेल्थ पर असरः साल 2018 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित एक समीक्षात्मक शोध पत्र से पता चलता है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में सोरियासिस के मरीजों में हृदय रोगों जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप का जोखिम अधिक होता है। रिपोर्ट में आगे समझाया गया है कि सोरियासिस के कारण शरीर में सूजन पैदा हो जाती है। एक समय बाद नसों में प्लाक जमने लगता है, जो हार्ट डिजीज के रिस्क को बढ़ा देता है।
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3. मेटाबोलिक समस्याएंः साल 2025 में मेडिकल जर्नल Frontiers in Medicine में प्रकाशित एक सिस्टमिक रिव्यू के अनुसार, सामान्य लोगों की तुलना में सोरायसिस के रोगियों में मेटाबोलिक सिंड्रोम होने का जोखिम काफी अधिक होता है। इतना ही नहीं, सोरायसिस की कंडीशन जितना ज्यादा गंभीर होती है, मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा उतना ही ज्यादा बढ़ता जाता है। यह सब समस्याएं अंदरूनी सूजन के कारण होती है। सोरायसिस की वजह से शरीर क्रोनिक इंफ्लेमेशन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई बीपी आदि समस्याएं भी हो सकती हैं।
4. मेंटल हेल्थ पर असरः National Psoriasis Foundation के अनुसार, सोरायसिस से पीड़ित लोगों में मानसिक तनाव और मूड से जुड़ी समस्या स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक होती है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में सोरायसिस के मरीजों में डिप्रेशन होने की संभावना 39 फीसदी और एंग्जाइटी की संभावना 31 फीसदी तक होती है। यही नहीं, कई सोरायसिस के मरीज खुद को पूरी तरह दूसरों से अलग-थलग कर लेते हैं और लोगों के साथ सोशल होने से बचते हैं।
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डॉक्टर की सलाह
डॉ. करुणा मल्होत्रा सलाह देती हैं, "सोरायसिस जैसी समस्या को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह ऐसी समस्या है, जो कभी भी पूरी तरह ठीक नहीं होती है। क्रोनिक कंडीशन होने के कारण यह शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। खासकर, सोरायसिस के मरीजों में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी हो जाती हैं। इसलिए, जरूरी है कि जब भी किसी को सोरायसिस जैसी समस्या हो या इसके शुरुआती लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाएं।"
निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि सोरायसिस एक गंभीर समस्या है और यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करती है। सोरायसिस के कारण सोरायटिक अर्थराइटिस हो जाता है, जिससे हड्डियां स्टिफ हो जाती हैं और मरीज के चलना-फिरना सहज नहीं रह जाता है। इस तरह की स्थिति में क्या किया जाना चाहिए, इस बारे में जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
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FAQ
सोरायसिस के लक्षण किन कारणों से बढ़ सकते हैं?
मानसिक तनाव, त्वचा पर चोट या कटना (Koebner phenomenon), धूम्रपान, शराब का सेवन और दवाएं के प्रभाव के कारण सोरायसिस के लक्षण बढ़ सकते हैं।सोरायसिस के मरीजों को किन खाने के चीजों से परहेज करना चाहिए?
सोरायसिस के मरीजों को रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड शुगर, डेयरी प्रोडक्ट्स और शराब का सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे उनकी कंडीशन बिगड़ सकती है।
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Sep 03, 2026 13:37 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra
