Mon Oct 19, 2026 | 09:16 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

चाय पीने से लिवर पर क्या असर पड़ता है? सुन लें डॉक्टर की बात

हम में से बहुत से लोग चाय के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। ऐसे लोगों की सुबह भी चाय के साथ होती है और शाम भी लेकिन लिवर पर इसका कैसा असर हो सकता है? जानते हैं इस बारे में एक्सपर्ट की राय।
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चाय कुछ लोगों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। ऐसे लोग बिना चाय के बिस्तर से नहीं उठते तो कुछ दोपहर में खाने के बाद और रात में सोने से पहले भी चाय पीते हैं। हालांकि, चाय को एक हद तक रिफ्रेशिंग ड्रिंक कह सकते हैं जो कि ब्रेन को अलर्ट करती है लेकिन असल में इसके कई नुकसान भी हैं। दरअसल, चाय में मिलने वाली निकोटिन शरीर के लिए कई प्रकार से काम करती है। कम मात्रा में जहां इसका सेवन कुछ अंगों के लिए फायदेमंद होता है तो वहीं ज्यादा मात्रा में इसका सेवन सेहत को नुकसान भी पहुंचाती है। आज हम Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangaluru से जानेंगे कि चाय का लिवर की सेहत पर कैसा असर होता है?

चाय पीने से लिवर पर क्या असर पड़ता है?

Dr. Pooja Pillai बताती हैं कि सीमित मात्रा में चाय पीने से लिवर की सेहत अच्छी रह सकती है क्योंकि चाय में एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनोल्स जैसे प्लांट कंपाउंड होते हैं। ये लिवर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से बचाने में मदद कर सकते हैं। ग्रीन टी में खास तौर पर EGCG जैसे कैटेचिन होते हैं, जबकि ब्लैक टी में दूसरे फायदेमंद कंपाउंड होते हैं जो शरीर की नैचुरल एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा को बेहतर बना सकते हैं और लिवर के सही कामकाज में मदद कर सकते हैं। कुछ स्टडीज में यह भी पाया गया है कि नियमित रूप से चाय पीने से फैटी लिवर का खतरा कम हो सकता है और लिवर एंजाइम का लेवल बेहतर रह सकता है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चाय से लिवर की बीमारी को रोका या ठीक किया जा सकता है।

आगे डॉ. पूजा बताती हैं कि चाय लिवर की सेहत पर असर डालने वाले कुछ कारकों में मदद करके अप्रत्यक्ष रूप से लिवर को सहारा दे सकती है। जैसे

  • मीठे ड्रिंक्स की जगह सादी चाय पीने से कुल शुगर और कैलोरी का सेवन कम हो सकता है, जिससे वजन कंट्रोल करने और लिवर में फैट जमा होने का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
  • साथ ही, चाय में मौजूद फायदेमंद तत्वों में सूजन कम करने वाले गुण भी हो सकते हैं।

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क्या कहती है ये स्टडी?

MDPI जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया है कि चाय के सेवन से लिवर स्टीटोसिस को काफी हद तक रोका जा सकता है, ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं ये स्टडी चूहों पर की गई थी जिसमें पाया गया है कि लंबे समय तक शराब के संपर्क में रहने वाले चूहों में आंत के माइक्रोबायोटा को नियंत्रित किया जा सकता है, विशेष रूप से ऊलोंग चाय और डार्क टी से। हालांकि, शराब से होने वाली लिवर की बीमारी यानी लिवर सिरोसिस के मामले में ब्लैक टी कम असरदार पाई गई। इसके अलावा, गट माइक्रोबायोटा के विश्लेषण से पता चला कि ऊलोंग टी और डार्क टी के सेवन से लंबे समय तक शराब के सेवन से बिगड़े गट माइक्रोबायोटा की विविधता, संरचना और बनावट को फिर से ठीक किया जा सका।

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निष्कर्ष:

अंत में डॉ. पूजा पिल्लई यही कहती हैं कि चाय की मात्रा और प्रकार मायने रखते हैं क्योंकि बहुत ज्यादा कड़क चाय पीना या कंसंट्रेटेड ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट और सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करना, सामान्य रूप से बनी चाय पीने से अलग है। कुछ मामलों में, ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट की ज्यादा डोज से लिवर को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है, इसलिए लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि ज्यादा चाय या चाय सप्लीमेंट्स लेने से ज्यादा फायदे होंगे। ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए, संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर दो से तीन कप सामान्य चाय खासकर बिना चीनी वाली चाय पीना एक सही विकल्प है। लेकिन चाय को फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, सिरोसिस या लिवर की अन्य बीमारियों के इलाज के बजाय स्वस्थ जीवनशैली के एक छोटे से हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए।

लोग स्वस्थ वजन बनाए रखकर, संतुलित आहार लेकर, नियमित रूप से एक्सरसाइज करके, शराब का सेवन कम करके, अनावश्यक दवाओं या सप्लीमेंट्स से बचकर और लिवर की बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह मानकर अपने लिवर की बेहतर सुरक्षा कर सकते हैं। साथ ही, लिवर की बीमारी वाले किसी भी व्यक्ति को कंसंट्रेटेड हर्बल या ग्रीन टी सप्लीमेंट्स लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

FAQ

  • लिवर को ठीक करने के लिए क्या खाना चाहिए?

    लिवर को ठीक करने के लिए आपको अपनी डाइट में फल और सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा आप ज्यादा से ज्यादा तरह पदार्थ लें जो कि लिवर डिटॉक्स में मददगार हो।
  • लिवर खराब होने पर कहां दर्द होता है?

    लिवर खराब होने पसलियों के ठीक नीचे दाहिने हिस्से में दर्द और भारीपन महसूस होता है। कई बार ये दर्द पीठ या दाहिने कंधे तक फैल सकता है।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 25, 2026 17:42 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr. Pooja Pillai