Fri Oct 9, 2026 | 04:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr M V Jyothsna , Consultant Obstetrician & Gynaecologist

महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ जाए तो शरीर देता है ये 5 संकेत, जानें कैसे करें कंट्रोल

महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ने से पीरियड्स, फर्टिलिटी और ब्रेस्ट से जुड़े बदलाव हो सकते हैं। यहां डॉक्टर से जानिए, प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ने के लक्षण और इसे कंट्रोल करने के तरीके।
महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ जाए तो शरीर देता है ये 5 संकेत, जानें कैसे करें कंट्रोलमहिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ जाए तो शरीर देता है ये 5 संकेत, जानें कैसे करें कंट्रोल

क्या आपके पीरियड्स समय पर नहीं आते, बिना प्रेग्नेंसी के ही स्तनों से दूध जैसा तरल निकलने लगा है? इन लक्षणों को अक्सर महिलाएं सामान्य हार्मोनल बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन कुछ मामलों में इसके पीछे प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ा हुआ लेवल हो सकता है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, प्रोलैक्टिन हार्मोन का कनेक्शन केवल स्तनों में दूध बनने से नहीं है, बल्कि इसका बढ़ा हुआ लेवल ओव्यूलेशन यानी अंडाशय से अंडा निकलने की प्रोसेस को भी प्रभावित कर सकता है। इसके कारण कुछ महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या लंबे समय तक बंद रह सकते हैं।

शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ने के 5 मुख्य संकेत

डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, प्रोलैक्टिन हार्मोन बनाने का काम पिट्यूटरी ग्रंथि करती है। इसका काम प्रेग्नेंसी के दौरान स्तनों को दूध बनाने के लिए तैयार करना और बच्चे के जन्म के बाद दूध बनने में मदद करना है। इसके अलावा, प्रोलैक्टिन महिलाओं के फर्टिलिटी हार्मोन के कामकाज को भी प्रभावित कर सकता है। जब बिना प्रेग्नेंसी या स्तनपान के इसका लेवल लगातार बढ़ा रहता है, तो इस स्थिति को हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया कहा जाता है। प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल बढ़ने पर हर महिला में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन कुछ प्रोलैक्टिन के लक्षण (Prolactin symptoms) नजर आ सकते हैं।

  1. प्रोलैक्टिन हार्मोन शरीर में बढ़ने पर महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होने की समस्या हो सकती है।
  2. प्रेग्नेंसी न होने या स्तनपान न कराने के बावजूद निप्पल से दूध जैसा निकलना भी प्रोलेक्टिन हार्मोन बढ़ने के कारण हो सकता है।
  3. प्रोलैक्टिन का ज्यादा लेवल ओव्यूलेशन यानी अंडा निकलने की प्रोसेस को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्रोलैक्टिन हार्मोन के बदलाव के कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है।
  4. प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल प्रभावित होने पर योनि में ड्राईनेस और संबंध बनाते समय परेशानी हो सकती है।
  5. कुछ मामलों में पिट्यूटरी ग्रंथि में गांठ या ट्यूमर के कारण प्रोलैक्टिन बढ़ सकता है। ऐसे में सिरदर्द या नजर संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

प्रोलैक्टिन हार्मोन कम करने के तरीके

डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि प्रोलैक्टिन हार्मोन को कम करने का सही तरीका उसके बढ़ने के कारण पर निर्भर करता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू नहीं करना चाहिए। डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, प्रोलैक्टिन का लेवल जानने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर थायराइड और अन्य टेस्ट भी करा सकते हैं।

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  • प्रोलैक्टिन लगातार बढ़ा होने या प्रोलैक्टिनोमा की स्थिति में डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं। इनसे प्रोलैक्टिन का लेवल कम करने और कई मामलों में ओव्यूलेशन को नॉर्मल बनाने में मदद मिलती है। इन दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की निगरानी में करें।
  • अगर प्रोलैक्टिन बढ़ने का कारण हाइपोथायराइडिज्म है, तो थायराइड की समस्या का सही इलाज करने से प्रोलैक्टिन का लेवल भी नॉर्मल हो सकता है।
  • प्रोलैक्टिन का लेवल सही करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार भी जरूरी है, पर्याप्त नींद लें, तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें और बैलेंस डाइट का सेवन करें। प्रोलैक्टिन कम करने के उपाय (Ways to lower prolactin) में इसकी भूमिका अहम है।
  • हालांकि, केवल खान-पान या घरेलू उपायों से बहुत ज्यादा बढ़े हुए प्रोलैक्टिन को नॉर्मल करने की गारंटी नहीं है।

साल 2014 में RBGO जर्नल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया (HPRL) पीरियड्स में अनियमितता, दूध का रिसाव और इनफर्टिलिटी का मुख्य कारण है। इसका इलाज डोपामाइन ए एगोनिस्ट (DA) दवाएं हैं, जो 80-90% मामलों में असरदार होती हैं और प्रोलैक्टिन के लेवल को नॉर्मल करके कंसीव करने में मदद करती हैं।

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निष्कर्ष

महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ने से पीरियड्स अनियमित होने, स्तनों से दूध जैसा निकलने और कंसीव करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके पीछे थायराइड की समस्या, कुछ दवाएं या पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ी स्थिति हो सकती है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच कराना जरूरी है। प्रोलैक्टिन कम करने के लिए खुद से हार्मोन की दवाएं लेना या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना सही नहीं है। सही कारण की पहचान और समय पर इलाज से हार्मोन के लेवल को कंट्रोल करने और फर्टिलिटी हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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FAQ

  • महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल कितना होना चाहिए?

    प्रोलैक्टिन का नॉर्मल लेवल जांच करने वाली लैब, महिला की हेल्थ कंडीशन और प्रेग्नेंसी या स्तनपान की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। 
  • क्या प्रोलैक्टिन बढ़ने से वजन बढ़ता है?

    कुछ महिलाओं में प्रोलैक्टिन बढ़ने के साथ वजन में बदलाव देखा जा सकता है, लेकिन यह वजन बढ़ने का यह अकेला कारण नहीं है।
  • क्या प्रोलैक्टिन बढ़ने पर दवा लेनी पड़ती है?

    प्रोलैक्टिन बढ़ने पर दवा लेनी पड़े ऐसा जरूरी नहीं है। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि प्रोलैक्टिन क्यों बढ़ा है, कितना बढ़ा है और महिला को क्या लक्षण हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 09, 2026 15:08 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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