क्या आपके पीरियड्स समय पर नहीं आते, बिना प्रेग्नेंसी के ही स्तनों से दूध जैसा तरल निकलने लगा है? इन लक्षणों को अक्सर महिलाएं सामान्य हार्मोनल बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन कुछ मामलों में इसके पीछे प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ा हुआ लेवल हो सकता है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, प्रोलैक्टिन हार्मोन का कनेक्शन केवल स्तनों में दूध बनने से नहीं है, बल्कि इसका बढ़ा हुआ लेवल ओव्यूलेशन यानी अंडाशय से अंडा निकलने की प्रोसेस को भी प्रभावित कर सकता है। इसके कारण कुछ महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या लंबे समय तक बंद रह सकते हैं।
शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ने के 5 मुख्य संकेत
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, प्रोलैक्टिन हार्मोन बनाने का काम पिट्यूटरी ग्रंथि करती है। इसका काम प्रेग्नेंसी के दौरान स्तनों को दूध बनाने के लिए तैयार करना और बच्चे के जन्म के बाद दूध बनने में मदद करना है। इसके अलावा, प्रोलैक्टिन महिलाओं के फर्टिलिटी हार्मोन के कामकाज को भी प्रभावित कर सकता है। जब बिना प्रेग्नेंसी या स्तनपान के इसका लेवल लगातार बढ़ा रहता है, तो इस स्थिति को हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया कहा जाता है। प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल बढ़ने पर हर महिला में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन कुछ प्रोलैक्टिन के लक्षण (Prolactin symptoms) नजर आ सकते हैं।
- प्रोलैक्टिन हार्मोन शरीर में बढ़ने पर महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होने की समस्या हो सकती है।
- प्रेग्नेंसी न होने या स्तनपान न कराने के बावजूद निप्पल से दूध जैसा निकलना भी प्रोलेक्टिन हार्मोन बढ़ने के कारण हो सकता है।
- प्रोलैक्टिन का ज्यादा लेवल ओव्यूलेशन यानी अंडा निकलने की प्रोसेस को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्रोलैक्टिन हार्मोन के बदलाव के कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है।
- प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल प्रभावित होने पर योनि में ड्राईनेस और संबंध बनाते समय परेशानी हो सकती है।
- कुछ मामलों में पिट्यूटरी ग्रंथि में गांठ या ट्यूमर के कारण प्रोलैक्टिन बढ़ सकता है। ऐसे में सिरदर्द या नजर संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
प्रोलैक्टिन हार्मोन कम करने के तरीके
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि प्रोलैक्टिन हार्मोन को कम करने का सही तरीका उसके बढ़ने के कारण पर निर्भर करता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू नहीं करना चाहिए। डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, प्रोलैक्टिन का लेवल जानने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर थायराइड और अन्य टेस्ट भी करा सकते हैं।
high prolactin in women
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- प्रोलैक्टिन लगातार बढ़ा होने या प्रोलैक्टिनोमा की स्थिति में डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं। इनसे प्रोलैक्टिन का लेवल कम करने और कई मामलों में ओव्यूलेशन को नॉर्मल बनाने में मदद मिलती है। इन दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की निगरानी में करें।
- अगर प्रोलैक्टिन बढ़ने का कारण हाइपोथायराइडिज्म है, तो थायराइड की समस्या का सही इलाज करने से प्रोलैक्टिन का लेवल भी नॉर्मल हो सकता है।
- प्रोलैक्टिन का लेवल सही करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार भी जरूरी है, पर्याप्त नींद लें, तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें और बैलेंस डाइट का सेवन करें। प्रोलैक्टिन कम करने के उपाय (Ways to lower prolactin) में इसकी भूमिका अहम है।
- हालांकि, केवल खान-पान या घरेलू उपायों से बहुत ज्यादा बढ़े हुए प्रोलैक्टिन को नॉर्मल करने की गारंटी नहीं है।
साल 2014 में RBGO जर्नल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया (HPRL) पीरियड्स में अनियमितता, दूध का रिसाव और इनफर्टिलिटी का मुख्य कारण है। इसका इलाज डोपामाइन ए एगोनिस्ट (DA) दवाएं हैं, जो 80-90% मामलों में असरदार होती हैं और प्रोलैक्टिन के लेवल को नॉर्मल करके कंसीव करने में मदद करती हैं।
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निष्कर्ष
महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ने से पीरियड्स अनियमित होने, स्तनों से दूध जैसा निकलने और कंसीव करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके पीछे थायराइड की समस्या, कुछ दवाएं या पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ी स्थिति हो सकती है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच कराना जरूरी है। प्रोलैक्टिन कम करने के लिए खुद से हार्मोन की दवाएं लेना या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना सही नहीं है। सही कारण की पहचान और समय पर इलाज से हार्मोन के लेवल को कंट्रोल करने और फर्टिलिटी हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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FAQ
महिलाओं में प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल कितना होना चाहिए?
प्रोलैक्टिन का नॉर्मल लेवल जांच करने वाली लैब, महिला की हेल्थ कंडीशन और प्रेग्नेंसी या स्तनपान की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।क्या प्रोलैक्टिन बढ़ने से वजन बढ़ता है?
कुछ महिलाओं में प्रोलैक्टिन बढ़ने के साथ वजन में बदलाव देखा जा सकता है, लेकिन यह वजन बढ़ने का यह अकेला कारण नहीं है।क्या प्रोलैक्टिन बढ़ने पर दवा लेनी पड़ती है?
प्रोलैक्टिन बढ़ने पर दवा लेनी पड़े ऐसा जरूरी नहीं है। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि प्रोलैक्टिन क्यों बढ़ा है, कितना बढ़ा है और महिला को क्या लक्षण हैं।
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Oct 09, 2026 15:08 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr M V Jyothsna
