Fri Oct 30, 2026 | 07:07 PM IST

Medically Reviewed by Archana Singhal , Counsellor & Family Therapist

सोने से पहले बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल पर घंटों रील्स देखना, डॉक्टर से जानें यह आदत सही है नहीं?

सोने से पहले बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल पर घंटों समय बिताने की आदत बिल्कुल सही नहीं है। इससे नींद की क्वालिटी खराब होती है और अगले दिन की प्रोडक्टिविटी भी प्रभावित होती है। जानें, इस आदत से कैसे छुटकार पाएं?
सोने से पहले बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल पर घंटों रील्स देखना, डॉक्टर से जानें यह आदत सही है नहीं?सोने से पहले बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल पर घंटों रील्स देखना, डॉक्टर से जानें यह आदत सही है नहीं?

रात के समय सोने से पहले हर व्यक्ति अपने बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल स्क्रीन स्क्राॅल करने लगता है। मोबाइल देखते-देखते घंटों हो जाते हैं और उन्हें पता ही नहीं चलता कि आधी रात कब बीत गई है। यही कारण है कि अक्सर लोग सुबह के समय अपनी नींद पूरी करते हैं। ऐसे लोग अक्सर पूरा दिन थकान और लो एनर्जी महसूस करते हैं।

हालांकि, यह एक अन्य जरूरी सवाल यह उठता है कि सोने से पहले बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल पर घंटों रील्स देखने की यह आदत कितनी सही है? इस बारे में माइंडवेल काउंसल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) बताती हैं, "रात को सोने से पहले बिस्तर पर लेटते हुए मोबाइल फोन पर रील्स देखना या छोटे वीडियोज देखना किसी भी तरह से सही नहीं है। यह आदत नींद की क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित करती है। सोने के 30 से 60 मिनट पहले ही मोबाइल को खुद से दूर कर लेना चाहिए।"

सोने से पहले मोबाइल पर रील्स देखने का प्रभाव

Habit Of Watching Reels In Bed Before Sleep Affects Sleep Quality Or NotHabit Of Watching Reels In Bed Before Sleep Affects Sleep Quality Or Not

शारीरिक प्रभाव

मेलाटोनिन में कमीः अर्चना सिंघल कहती हैं, "अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो रात भर अपने बेड पर लेटे-लेटे मोबाइल स्क्राॅल करते हैं, तो ध्यान रखें कि इसकी वजह से शरीर में मेलाटोनिन की कमी हो सकती है। दरअसल, स्मार्टफोन की स्क्रीन से ब्लू लाइट निकलती है, जो कि आपके ब्रेन को यह मैसेज देती है कि अब तक दिन है। ऐसे में मेलाटोनिन का प्रोडक्शन अपने आप कम होने लगता है।"

एलर्टनेस का बढ़नाः निश्चित रूप से जब मेलाटोनिन का प्रोडक्शन कम होगा, तो आप अपने आप एलर्ट मोड में आ जाते हैं। इसके अलावा, इस बात की भी अनदेखी नहीं की जा सकती है कि जब आप छोटे-छोटे वीडियोज देखते हैं, तो उससे भी दिमाग सतर्क रहता है तथा थोड़ी मात्रा में एड्रेनलीन या डोपामाइन भी रिलीज होता है, जिससे शरीर और दिमाग को शांत कर पाना कठिन हो जाता है।

सर्कैडियन रिदम पर प्रभावः रात को लंबे समय तक मोबाइल पर रील स्क्राॅल करने से दिमाग सक्रिय बना रहता है और सोने का संकेत कमजोर पड़ जाता है। इससे शरीर का सर्कैडियन रिदम भी प्रभावित होता है। ऐसे में न सिर्फ नींद खराब होती है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, जिससे अगले दिन की प्रोडक्टिविटी कम होती है और शरीर में आलस्य भी भर जाता है।

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मनोवैज्ञानिक प्रभाव

देर से नींद आनाः अर्चना सिंघल के अनुसार, "नींद की क्वालिटी प्रभावित होने के पीछे एक बड़ा कारण है कि आप जाने-अनजाने रात भर के लिए मोबाइल पर रील्स स्क्राॅल करने लगते हैं। हालांकि, अक्सर लोग बेड पर लेटते हुए मोबाइल यही सोचकर हाथ लगाते हैं कि 5-10 मिनट रील देखेंगे और इसके बाद सो जाएंगे। लेकिन, धीरे-धीरे यही आदत घंटों में बदल जाती है।"

इमोशंस पर असरः मौजूदा समय में लोगों के पास एंटरटेन होने का सबसे आसान माध्यम रील्स है। लोग घंटों इसमें समय बिता देते हैं और इसका पता ही नहीं चलता। इसी तरह, जब आप रात के समय रील्स देखते हैं, तो इस दौरान आप अलग-अलग वीडियो देखकर अलग-अलग तरह से उत्तेजित होते हैं। कोई वीडियो आपको तनाव से भर देती है, तो किसी वीडियो से आपको खुशी का एहसास होता है। इस तरह, सोते समय मन पर बिलकुल नियंत्रण नहीं रहता है। अनियंत्रित विचार आपको अच्छी और गहरी नींद लेने नहीं देते हैं।

अनिद्रा (इंसोमनिया) का जोखिमः ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित मेडिकल एवं स्लीप रिसर्च जर्नल Sleep में प्रकाशित एक क्लिनिकल रिसर्च के अनुसार, दिनभर में सोशल मीडिया के यूज को कंट्रोल करने के बावजूद सोने से ठीक 30 मिनट पहले सोशल मीडिया पर समय बिताने से नींद पर गंभीर खलल पड़ सकता है। यहां तक कि अनिद्रा की समस्या हो भी सकती है।

नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या करें?

अगर आप रोजाना अच्छी और गहरी नींद लेना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट द्वारा बताए गए कुछ टिप्स को जरूर फाॅलो करें, जैसे-

  • मोबाइल से दूर रहेंः सोने से ठीक 30 से 60 मिनट पहले अपने मोबाइल को खुद से दूर कर लें। बेहतर होगा कि आप उसे बेडरूम से बाहर रखें।
  • किताब पढ़ें या गाने सुनेंः सोने से ठीक पहले अगर मोबाइल देखने की चाह बढ़ रही है, तो मन भटकाने के लिए गाने सुनें या किताबें पढ़ें। इससे नींद आने में मदद मिलती है।
  • नाइट मोड चलाएंः अगर किसी वजह से सोने से पहले आपको मोबाइल देखना ही पड़े, तो उसकी ब्राइटनेस को कम कर दें और नाइट मोड को ऑन कर लें। इससे आंखों पर पड़ने वाला तनाव कुछ कम हो जाता है, हालांकि मेलाटोनिन पर असर फिर भी बना रहता है।

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निष्कर्ष

रात को सोने से पहले घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने की आदत लोगों में बढ़ गई है। ध्यान रखें कि यह आदत बहुत खराब है। इससे छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि आप सोने से पहले की अपनी आदत में सुधार करें यानी सोने से ठीक 30 मिनट पहले से ही खुद को मोबाइल से दूर कर लें। शुरुआती दिनों में मोबाइल के बिना नींद लेने में दिक्कत हो, तो किताब पढ़ें या गाने सुनें। न सिर्फ नींद बेहतर होगी, बल्कि अगली सुबह एनर्जेटिक भी महसूस करेंगे।

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FAQ

  • क्या बिस्तर पर रील्स देखते समय 20-20-20 नियम अपनाने से नींद बेहतर आ सकती है?

    20-20-20 नियम केवल डिजिटल आई स्ट्रेन को कम करता है, लेकिन यह नींद को सुधारने में कोई भूमिका नहीं निभाता है।
  • क्या रील्स देखने के तुरंत बाद मैग्नीशियम सप्लीमेंट या कैमोमाइल टी लेने से नींद आ जाएगी?

    रील्स देखने के तुरंत बाद मैग्नीशियम सप्लीमेंट या कैमोमाइल टी लेने से नींद नहीं आती है और न ही ये बिगड़ी हुई स्लीप साइकल को सुधारते हैं। हालांकि, ये नर्वस सिस्टम को हल्का शांत कर सकते हैं। 
  • क्या रील्स देखते समय ईयरफोन या हेडफोन लगाने से ब्रेन पर अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है?

    हां, सीधे कान में ईयरफोन या हेडफोन लगाने से इससे आ रही ध्वनियां न्यूरोलॉजिकल उत्तेजना को बढ़ा देती हैं, जिससे सबकॉन्शियस माइंड रिलैक्स नहीं हो पाता।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 30, 2026 16:43 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Archana Singhal