Fri Oct 30, 2026 | 12:44 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन छोड़ने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? डॉक्टर से जानें

सोने से ठीक 1 घंटा पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करने से शरीर और दिमाग पर सकारात्मक असर पड़ता है। यह मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को बढ़ाता है, तनाव कम करता है और गहरी व आरामदायक नींद आती है। 
सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन छोड़ने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? डॉक्टर से जानेंसोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन छोड़ने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? डॉक्टर से जानें

सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करने से हमारे शरीर और दिमाग पर पॉजिटिव असर देखने को मिलते हैं। दरअसल, स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट हमारे दिमाग में मेलाटोनिन यानी नींद के हार्मोन के डिस्चार्ज को रोकने लगती है, जिससे नेचुरल तरीके से जल्दी और गहरी नींद आने लगती है। ऐसे में रात को सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida बताते हैं कि जब आप सोने से ठीक 1 घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बना लेते हैं तो आपके शरीर और दिमाग में सकारात्मक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं।

सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन छोड़ने के फायदे

Dr. Akshay Chugh के अनुसार, सोने से पहले लैपटॉप, मोबाइल या अन्य स्क्रीन डिवाइस छोड़ने से शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है।

1. मेलाटोनिन हार्मोन का डिस्चार्ज

सोने से 1 घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करना बंद करने से हमारे दिमाग में मेलाटोनिन हार्मोन नेचुरल तरीके से रिलीज होता है, जो हमें गहरी नींद दिलाने के लिए जिम्मेदार होता है। मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन से ब्लू लाइट निकलती है। यह नीली रोशनी हमारे दिमाग को यह धोखा देती है कि अभी दिन का उजाला है। जैसे ही आप सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करना बंद करते हैं, दिमाग को अंधेरे का संकेत मिलता है, जिससे मेलाटोनिन का लेवल तेजी से बढ़ने लगता है और आपको नेचुरल तरीके से तेज नींद आने लगती है।

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2. दिमाग की तरंगे शांत होती हैं

दिनभर काम करने, चैटिंग करने या सोशल मीडिया स्क्रॉल करने से हमारा दिमाग बीटा वेव्स की स्थिति में रहता है, जो हाई अलर्ट और तनाव का संकेत होता है। स्क्रीन बंद करते ही दिमाग का ओवर-स्टिम्यूलेशन बंद हो जाता है। दिमाग अल्फा और थीटा वेव्स में जाने लगता है, जो रिलैक्सेशन और गहरी नींद की शुरुआती अवस्थाएं हैं। इससे दिमाग में चलने वाले ख्याल रुक जाते हैं।

3. तनाव हार्मोन कम होना

रात के समय बेडरूम में फोन पर या तो हम काम कर रहे होते हैं या कोई ऐसी खबर या वीडियो देखते हैं, जो हमारे अंदर एंग्जायटी या उत्साह पैदा करती है। इससे शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स रिलीज होते हैं। स्क्रीन छोड़ने के बाद शरीर फाइट-या-फ्लाइट मोड से बाहर निकलकर पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम में चला जाता है। दिल की धड़कन नॉर्मल होती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल होने लगता है।

4. आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है

लगातार स्क्रीन देखने से पलकें झपकने की दर कम हो जाती है, जिससे आंखों की मांसपेशियां तनाव में आ जाती हैं और डिजिटल आई स्ट्रेन होता है। स्क्रीन बंद करने से आंखों की पुतलियों और ऑप्टिक नर्व्स को आराम मिलता है। आंखों में होने वाली जलन, ड्राईनेस और सिरदर्द की समस्या से राहत मिलती है।

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5. डीप स्लीप और REM स्लीप में सुधार

नींद के कई साइकिल होते हैं, जिसमें डीप स्लीप हमारे शारीरिक टिश्यू को रिपेयर करने और REM स्लीप मानसिक ताजगी के लिए जरूरी है। इसलिए, जो लोग सोने से पहले स्क्रीन देखते हैं, उनकी नींद बार-बार टूटती है और वे सुबह उठने पर भी थका हुआ महसूस करते हैं। स्क्रीन बंद करने से स्लीप आर्किटेक्चर बेहतर होता है और आपको बिना किसी रुकावट के गहरी नींद मिलती है।

6. मेंटल हेल्थ को बढ़ावा

जब आप बिना डिजिटल हैंगओवर के गहरी नींद लेते हैं, तो सुबह जागने पर आपका कोर्टिसोल वेक-अप रिस्पॉस सही रहता है। आप तरोताजा महसूस करते हैं, दिनभर काम में फोकस बनाए रखना आसान होता है और मूड इरिटेट नहीं होता है।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2020 में PLoS One जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, सोने से पहले मोबाइल फोन या स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करने से नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। सोने से पहले फोन का इस्तेमाल रोकने से नींद आने में लगने वाला समय लगभग 12 मिनट कम हो जाता है और रात की कुल नींद की अवधि में लगभग 18 मिनट की बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही, यह आदत नींद की गुणवत्ता में सुधार करती है तथा सोने से पहले होने वाले शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती है।

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इन बातों का रखें ध्यान

Dr. Akshay Chugh कहते हैं कि शुरुआत में सोने से 1 घंटा पहले फोन को खुद से दूर रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह एक आदत बन चुकी है। इसलिए, आप इन टिप्स को फॉलो करके सोने से पहलो फोन से खुद को दूर रख सकते हैं-

  • फोन पार्किंग स्टेशन बनाएं- अपने कमरे के बाहर एक टेबल या चार्जिंग पॉइंट रखें और रात को सोने जाने से 1 घंटे पहले फोन वहीं रख दें।
  • अलार्म लगाने का सही तरीका अपनाएं- सुबह उठने के लिए फोन में अलार्म लगाने के बजाय आप एक नॉर्मल अलार्म घड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि आप फोन को खुद से दूर रखें।
  • किताब पढ़ने की आदत डालें- रात को सोने से पहले स्क्रीन देखने की बजाय कोई हल्की-फुल्की किताब, उपन्यास या मैगजीन पढ़ें। ऐसा करने से दिमाग जल्दी शांत होगा और नींद लाने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष
डिजिटल दुनिया में स्क्रीन भले ही हमारी जरूरत बन चुकी है, लेकिन राक को सोने से पहले 1 घंटा सिर्फ आपके शरीर और दिमाग को सुकून देने की कोशिश करें। इसलिए, अगर आप भी देर रात फोन का इस्तेमाल करते हैं तो आज से ही सोने के समय से कम से कम 1 घंटा पहले फोन का उपयोग करना बंद कर दें।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • कितने घंटे सोने से शरीर स्वस्थ रहता है?

    एक हेल्दी व्यक्ति के लिए रोजाना रात को 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना शरीर को हेल्दी और एनर्जेटिक रखने के लिए सबसे जरूरी होता है।
  • ज्यादा मोबाइल देखने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

    ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती हैं, गर्दन-पीठ में दर्द की समस्या बढ़ जाती है और नींद की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ता है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 30, 2026 11:38 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh