Mon Oct 12, 2026 | 07:57 PM IST

Medically Reviewed by Dr Lavanya Kiran , Gynaecologogist & Fertility Exper

IVF में एम्ब्रियो ट्रांसफर हो गया, फिर भी प्रेग्नेंसी क्यों नहीं हुई? डॉक्टर से समझें

आईवीएफ में एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद भ्रूण को यूट्रस की परत से जुड़ना होता है। इम्प्लांटेशन का समय हर महिला में अलग हो सकता है ऐसे में प्रेग्नेंसी क्यों नहीं हुई इसके अलग-अलग कई कारण हो सकते हैं।
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आईवीएफ में एम्ब्रियो ट्रांसफर होने के बाद कपल्स को उम्मीद होती है कि अब जल्द ही प्रेग्नेंसी की खुशखबरी मिल जाएगी लेकिन जब प्रेग्नेंसी टेस्ट निगेटिव आता है, तो मन में कई सवाल उठने लगते हैं। क्या एम्ब्रियो में कोई समस्या थी? क्या यूट्रस में भ्रूण ठीक से नहीं चिपक पाया? या फिर आईवीएफ की प्रोसेस में कोई कमी रह गई? KIMS अस्पताल, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, बेंगलुरु के प्रसूति, स्त्री रोग विभाग की निदेशक और कंसल्टेंट, डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एम्ब्रियो ट्रांसफर होने का मतलब प्रेग्नेंसी की गारंटी नहीं है।

डॉ. लावण्या किरण बताती हैं कि IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद भ्रूण को महिला के यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है लेकिन इसके बाद भी कई बायोलॉजिकल प्रोसेस होती हैं, जिनका सफल होना गर्भधारण के लिए जरूरी है। कई बार अच्छी क्वालिटी वाला एम्ब्रियो ट्रांसफर होने के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती। ऐसे में केवल एक रिपोर्ट या एक लक्षण के आधार पर असफलता की वजह तय करना सही नहीं है।

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव होने के कारण

डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, आईवीएफ में एम्ब्रियो ट्रांसफर होने का मतलब यह नहीं है कि कंसीव होने की गारंटी मिल गई है। प्रेग्नेंसी के लिए भ्रूण यानी एम्ब्रियो का सही तरीके से विकसित होना, गर्भाशय यानी यूट्रस की अंदरूनी परत में इम्प्लांट होना और आगे विकास जारी रखना जरूरी होता है। इन स्टेज में किसी भी तरह की बाधा आने पर प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती है।

कई बार भ्रूण गर्भाशय में पहुंच तो जाता है, लेकिन वह उसकी अंदरूनी परत से जुड़ नहीं पाता, इसे इम्प्लांटेशन फेलियर कहा जाता है। वहीं, कुछ मामलों में भ्रूण शुरुआती लेवल पर जुड़ने की कोशिश करता है, लेकिन प्रेग्नेंसी आगे नहीं बढ़ पाती। हर महिला में इसके कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए सही वजह जानने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

1. एम्ब्रियो की क्वालिटी

डॉ. लावण्या किरण बताती हैं कि IVF की सफलता में एम्ब्रियो की क्वालिटी अहम भूमिका निभाती है। लैब में भ्रूण का आकार और विकास देखकर उसकी क्वालिटी का आकलन किया जाता है, लेकिन अच्छे दिखने वाले हर भ्रूण में सामान्य गुणसूत्र होने की गारंटी नहीं होती। भ्रूण में गुणसूत्रों से जुड़ी समस्याएं होने पर उसका विकास प्रभावित हो सकता है या वह गर्भाशय में सही से इम्प्लांट नहीं हो पाता। महिला की उम्र भी इस प्रोसेस को प्रभावित कर सकती है।

2. यूट्रस की अंदरूनी परत

डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, एम्ब्रियो के सफल इम्प्लांटेशन के लिए यूट्रस की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम का सही होना जरूरी है। इसकी मोटाई, बनावट और भ्रूण के विकास के साथ उसका तालमेल इम्प्लांटेशन को प्रभावित कर सकता है। यदि गर्भाशय की परत पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है, तो भ्रूण के में समस्या आ सकती है। इसके अलावा, यूट्रस में फाइब्रॉइड, पॉलीप जैसी समस्याएं भी कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी की संभावना को प्रभावित कर सकती हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड या अन्य जांचों की मदद से यूट्रस की स्थिति को चेक कर सकते हैं।

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3. हार्मोनल असंतुलन और दूसरी हेल्थ कंडीशन

आईवीएफ के दौरान हार्मोन की भूमिका काफी अहम होती है। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन यूट्रस की परत को भ्रूण के इम्प्लांटेशन के लिए तैयार रखने में मदद करता है। यदि हार्मोन का लेवल या उसके इस्तेमाल का समय सही नहीं है, तो कुछ मामलों में इसका असर इलाज के रिजल्ट पर पड़ सकता है। थायराइड से जुड़ी समस्या और डायबिटीज जैसी स्थितियों को भी मरीज की स्थिति के अनुसार ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, इन समस्याओं की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि IVF असफल ही होगा।

Embryo Transfer Done But No PregnancyEmbryo Transfer Done But No Pregnancy

साल 2018 में The New England Journal of Medicine में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित न होने वाली महिलाओं में, फ्रोजन एम्ब्रियो का ट्रांसफर करने से फ्रेश भ्रूण के मुकाबले जीवित शिशु (live birth) या गर्भधारण की दर में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होती है। इस स्टडी से यह स्पष्ट हुआ है कि जिन महिलाओं को PCOS की समस्या नहीं है, उनके लिए दोनों ही तरीकों (फ्रेश या फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर) के रिजल्ट लगभग एक जैसे ही रहते हैं। इसलिए, गैर-PCOS मामलों में सिर्फ बेहतर रिजल्ट की उम्मीद में फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर को अनिवार्य नहीं माना जा सकता है।

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एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद क्या सावधानियां रखें?

  • डॉ. लावण्या किरण सलाह देती हैं कि एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लेना और समय पर चेकअप करवाना जरूरी है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के प्रोजेस्टेरोन या दूसरी दवाएं बंद न करें।
  • प्रेग्नेंसी टेस्ट भी डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर ही करें। बहुत जल्दी टेस्ट करने से रिजल्ट को समझने में कंफ्यूजन हो सकती है।

निष्कर्ष

IVF में एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद भी प्रेग्नेंसी न होने के पीछे एंब्रियो की क्वालिटी, इम्प्लांटेशन, यूट्रस की स्थिति और हार्मोन से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। एक बार IVF असफल होने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में कंसीव करना संभव नहीं होगा। हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए असफल साइकिल के बाद फर्टिलिटी एक्सपर्ट से परामर्श लेकर संभावित कारणों का आकलन कराना चाहिए।

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FAQ

  • क्या एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद पेट में हल्का दर्द होना सामान्य है?

    कुछ महिलाओं को हल्की ऐंठन या पेट में खिंचाव महसूस हो सकता है। हालांकि, तेज दर्द, ब्लीडिंग या चक्कर आने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • क्या एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद ब्लीडिंग होने का मतलब IVF फेल होना है?

    हल्की ब्लीडिंग होने से अपने आप IVF की असफलता साबित नहीं होती। इसके कई कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें।
  • IVF का पहला प्रयास असफल होने पर दूसरा प्रयास कब करना चाहिए?

    दूसरे प्रयास का समय हर मरीज के लिए अलग हो सकता है। डॉक्टर पिछली साइकिल के रिजल्ट, महिला की सेहत, जरूरी चेकअप और इलाज में बदलाव की जरूरत देखकर अगला प्रयास तय करते हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 12, 2026 18:53 IST

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