Wed Oct 14, 2026 | 11:55 AM IST

Medically Reviewed by Dr Lavanya Kiran , Gynaecologogist & Fertility Exper

IVF में अंडे ज्यादा मिले, फिर भी एम्ब्रियो कम क्यों बने? डॉक्टर से जानें कारण

आईवीएफ में हर अंडा फर्टिलाइज होकर एम्ब्रियो नहीं बनता और हर एम्ब्रियो आगे विकसित भी नहीं हो पाता है। एग और स्पर्म की क्वालिटी, फर्टिलाइजेशन और भ्रूण यानी एम्ब्रियो के विकास से इनकी संख्या प्रभावित होती है।
IVF में अंडे ज्यादा मिले, फिर भी एम्ब्रियो कम क्यों बने? डॉक्टर से जानें कारणIVF में अंडे ज्यादा मिले, फिर भी एम्ब्रियो कम क्यों बने? डॉक्टर से जानें कारण

आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन के दौरान जब महिला की ओवरी से ज्यादा अंडे मिलते हैं, तो कपल्स को उम्मीद होती है कि ज्यादा संख्या में एम्ब्रियो बनेंगे और प्रेग्नेंसी की संभावना भी बढ़ जाएगी लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता है। अंडे ज्यादा मिलने के बावजूद लैब में कम एम्ब्रियो बनते हैं या कुछ एम्ब्रियो शुरुआती विकास के बाद आगे नहीं बढ़ पाते। KIMS अस्पताल, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, बेंगलुरु के प्रसूति, स्त्री रोग विभाग की निदेशक और कंसल्टेंट, डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, IVF में अंडों की संख्या और एम्ब्रियो की संख्या हमेशा एक जैसी नहीं होती। अंडाशय से निकाले गए सभी अंडे परिपक्व हों, यह जरूरी नहीं है। वहीं, परिपक्व अंडों में से भी हर अंडा स्पर्म के साथ फर्टिलाइज नहीं होता है। फर्टिलाइजेशन के बाद भी कुछ एम्ब्रियो का विकास शुरुआती स्टेज में रुक सकता है।

ज्यादा अंडे मिलने पर भी IVF में एम्ब्रियो कम क्यों बनते हैं?

डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, आईवीएफ में अंडों की क्वालिटी एक अहम भूमिका निभाती है। महिला की उम्र बढ़ने के साथ अंडों में क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताओं की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में अंडों के फर्टिलाइज होने या सामान्य रूप से विकसित होने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

डॉ. लावण्या किरण बताती हैं कि कम क्वालिटी वाले अंडे केवल ज्यादा उम्र की महिलाओं में ही नहीं मिलते। कम उम्र में भी अंडों की क्वालिटी अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा, अंडों के परिपक्व होने की स्थिति और उनके सेल्स का फंक्शन भी एम्ब्रियो के विकास को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल एग काउंट देखकर IVF की सफलता का अनुमान लगाना सही नहीं है।

  • IVF की सक्सेस में पुरुष के स्पर्म की भूमिका भी अहम है, स्पर्म की संख्या, गतिशीलता और आकार के अलावा उसकी आनुवंशिक क्वालिटी भी फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो के विकास को प्रभावित कर सकती है।
  • कई बार अंडे पर्याप्त संख्या में और परिपक्व होते हैं, लेकिन फर्टिलाइजेशन अपेक्षा के अनुसार नहीं हो पाता। कुछ मामलों में फर्टिलाइजेशन के बाद भी एम्ब्रियो का विकास रुक सकता है।
  • ऐसे में डॉक्टर महिला और पुरुष दोनों की जांच रिपोर्ट को चेक करते हैं, ताकि संभावित कारणों को समझा जा सके।
  • हर फर्टिलाइज्ड अंडा ब्लास्टोसिस्ट अवस्था तक नहीं पहुंच पाता। ब्लास्टोसिस्ट वह विकसित अवस्था है, जिसमें एम्ब्रियो के गर्भाशय में ट्रांसफर की प्लानिंग की जा सकती है।
  • एम्ब्रियो का विकास रुकने के पीछे क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं, सेल्स के विभाजन में गड़बड़ी और अंडे या स्पर्म से जुड़े कारक हो सकते हैं।
  • लैब की परिस्थितियां और इस्तेमाल की गई फर्टिलाइजेशन तकनीक भी प्रोसेस का हिस्सा हैं। हालांकि, किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने से पहले पूरी IVF साइकिल की रिपोर्ट देखना जरूरी होता है।

साल 2023 में Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, खराब क्वालिटी वाले भ्रूण (poor-quality embryo) के ट्रांसफर के बाद गर्भधारण की संभावना भले ही कम होती है, लेकिन यदि एक बार क्लिनिकल प्रेग्नेंसी स्थापित हो जाए, तो हेल्दी बच्चे के जन्म की संभावना काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा, जिन साइकिलों में गोनाडोट्रोपिन हार्मोन की मात्रा ज्यादा दी जाती है, वहां सफलता की संभावना कम हो जाती है।

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कम एम्ब्रियो बनने पर क्या दोबारा IVF कराना पड़ता है?

डॉ. लावण्या किरण के अनुसार, कम एम्ब्रियो बनने का मतलब यह नहीं है कि IVF असफल ही होगा। अगर एक भी हेल्दी और ट्रांसफर के योग्य एम्ब्रियो उपलब्ध है, तो उससे भी गर्भधारण संभव हो सकता है। सफलता की संभावना एम्ब्रियो की क्वालिटी, महिला की उम्र, गर्भाशय यानी यूट्रस की स्थिति और अन्य कारकों पर निर्भर करती है।

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यदि एम्ब्रियो कम बने हैं या उनका विकास रुक गया है, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट पिछली साइकिल की रिपोर्ट को चेक कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर अंडाशय यानी ओवरी को उत्तेजित करने की दवाओं, फर्टिलाइजेशन की तकनीक या अन्य इलाज संबंधी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हर कपल के लिए दोबारा IVF कराना जरूरी नहीं होता।

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निष्कर्ष

आईवीएफ में ज्यादा अंडे मिलने के बावजूद कम एम्ब्रियो बनने के कई कारण हो सकते हैं। अंडों की परिपक्वता और क्वालिटी, स्पर्म की स्थिति, फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो का शुरुआती विकास इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए केवल अंडों की संख्या को IVF की सफलता का पैमाना नहीं मानना चाहिए। अगर एम्ब्रियो कम बने हैं, तो घबराने के बजाय डॉक्टर से रिपोर्ट की दोबारा जांच कराएं।

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FAQ

  • IVF में कितने अंडे मिलना अच्छा माना जाता है?

    IVF में अंडों की कोई एक निश्चित संख्या सभी महिलाओं के लिए एक नहीं होती। उम्र, ओवेरियन रिजर्व और हेल्थ के आधार पर अंडों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
  • IVF में डे-3 और डे-5 एम्ब्रियो में क्या अंतर होता है?

    डे-3 एम्ब्रियो फर्टिलाइजेशन के लगभग तीन दिन बाद की अवस्था में होता है। डे-5 एम्ब्रियो आमतौर पर ब्लास्टोसिस्ट अवस्था तक पहुंच चुका होता है।
  • क्या IVF में एम्ब्रियो की ग्रेडिंग से बच्चे की सेहत का पता चलता है?

    एम्ब्रियो ग्रेडिंग से उसकी बनावट और विकास का आकलन किया जाता है। यह कंसीव करने की संभावना का अनुमान लगाने में मदद करती है, लेकिन इससे बच्चे की सेहत की गारंटी नहीं मिलती।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 14, 2026 10:23 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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