आईवीएफ में एंब्रियो ट्रांसफर के बाद सबसे ज्यादा इंतजार बीटा एचसीजी (Beta HCG) टेस्ट की रिपोर्ट का रहता है।अगर रिपोर्ट में एचसीजी की वैल्यू कम या ज्यादा दिखे, तो मन में कई सवाल उठने लगते हैं कि क्या प्रेग्नेंसी ठहर गई है? क्या एचसीजी का यह लेवल नॉर्मल है? वहीं कुछ महिलाओं की रिपोर्ट में एचसीजी पॉजिटिव आने के बाद भी चिंता बनी रहती है कि अब आगे क्या होगा। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, आईवीएफ के बाद Beta HCG टेस्ट इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि यह शुरुआती प्रेग्नेंसी में बनने वाले हार्मोन के लेवल का पता लगाता है लेकिन इस टेस्ट की रिपोर्ट को समझना इतना आसान नहीं है, इसलिए आईवीएफ के बाद Beta HCG की रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय यह जानना जरूरी है कि किस वैल्यू का क्या मतलब हो सकता है और डॉक्टर किन चीजों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट देखते हैं।
बीटा एचसीजी (Beta HCG) क्या है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, Beta HCG यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन एक हार्मोन है, जिसका प्रोडक्शन प्रेग्नेंसी की शुरुआत में विकसित हो रहे प्लेसेंटा के टिश्यू से होता है। एंब्रियो के यूट्रस की परत में सफलतापूर्वक इंप्लांट होने के बाद शरीर में इस हार्मोन का लेवल बढ़ने लगता है। आईवीएफ में एंब्रियो ट्रांसफर के कुछ दिनों बाद बीटा एचसीजी की जांच की जाती है। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, इस रिपोर्ट को समझते समय सिर्फ एक नंबर पर निर्भर रहने के बजाय टेस्ट किस दिन किया गया और आगे एचसीजी का लेवल किस तरह बदल रहा है, यह देखना ज्यादा जरूरी होता है।
एंब्रियो ट्रांसफर के बाद Beta HCG कितना होना चाहिए?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, बीटा एचसीजी के लिए कोई एक ऐसा नंबर नहीं है जिसे हर आईवीएफ मरीज में नॉर्मल या सफल प्रेग्नेंसी की निश्चित लिमिट माना जाए। इसकी वैल्यू प्रेग्नेंसी के समय, एंब्रियो ट्रांसफर के दिन और इंप्लांटेशन कब हुआ जैसी बातों के आधार पर अलग हो सकती है।
- आमतौर पर डॉक्टर एंब्रियो ट्रांसफर के करीब 9 से 14 दिन बाद बीटा एचसीजी ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इस दौरान इसका लेवल 100 mIU/mL या इससे ज्यादा होना चाहिए।
- कई मामलों में शुरुआती रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर कुछ समय के अंतराल पर दोबारा जांच करवाते हैं। इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि एचसीजी का लेवल अपेक्षित तरीके से बढ़ रहा है या नहीं।
- इसलिए रिपोर्ट में कोई एक नंबर देखकर खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार समझना जरूरी है।
साल 2017 में International Journal of Reproduction Contraception, Obstetrics and Gynecology में प्रकाशित स्टडी से यह पता चलता है कि आईवीएफ प्रोसेस के बाद शुरुआती दिनों में सीरम बीटा-एचसीजी (Beta-HCG) का लेवल गर्भधारण के रिजल्ट को समझने के लिए एक जरूरी संकेतक है। यदि ट्रांसफर के 12 दिन बाद बीटा-HCG का स्तर 139.5 mIU/ml से ज्यादा आता है, तो यह हेल्दी और सफल प्रेग्नेंसी का संकेत देता है।
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Beta HCG बढ़ने का क्या मतलब होता है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि यदि बीटा एचसीजी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो यह शरीर में प्रेग्नेंसी हार्मोन मौजूद होने का संकेत हो सकता है। शुरुआती प्रेग्नेंसी में एचसीजी का लेवल सामान्यतौर पर बढ़ता है, लेकिन हर महिला में इसकी बढ़ने की स्पीड बिल्कुल समान नहीं होती।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा बीटा एचसीजी जांच करवा सकते हैं। एक रिपोर्ट की तुलना दूसरी रिपोर्ट से करने पर हार्मोन के ट्रेंड की बेहतर जानकारी मिल सकती है। हालांकि, केवल एचसीजी बढ़ने से यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि प्रेग्नेंसी पूरी तरह नॉर्मल है। आगे अल्ट्रासाउंड से प्रेग्नेंसी की स्थिति की पुष्टि की जाती है।
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Beta HCG कम आए तो क्या प्रेग्नेंसी नहीं है?
- डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि एचसीजी की वैल्यू कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें टेस्ट बहुत जल्दी करवाना भी शामिल है।
- अगर इंप्लांटेशन देर से हुआ है, तो शुरुआती जांच में हार्मोन का लेवल कम दिखाई दे सकता है।
- इसी तरह, सिर्फ एक कम संख्या देखकर प्रेग्नेंसी के बारे में अंतिम फैसला नहीं किया जाता। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति और जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच के रिजल्ट को देखते हैं।
- कुछ मामलों में एचसीजी का अपेक्षित रूप से न बढ़ना आगे की जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।
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निष्कर्ष
एंब्रियो ट्रांसफर के बाद Beta HCG की रिपोर्ट जरूरी है, लेकिन एक अकेली वैल्यू को देखकर प्रेग्नेंसी की सफलता या असफलता का फैसला नहीं करना चाहिए। टेस्ट कब किया गया, एचसीजी का लेवल आगे कैसे बदल रहा है और बाद में अल्ट्रासाउंड में क्या दिखाई देता है, इन सभी बातों को साथ में देखा जाता है। डॉक्टर एम. वी. ज्योत्सना की सलाह के अनुसार, रिपोर्ट को लेकर घबराने या खुद से उसे समझने के बजाय अपने डॉक्टर से सलाह लें औ रिपोर्ट को समझें।
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FAQ
Beta HCG टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल कैसे लिया जाता है?
Beta HCG एक ब्लड टेस्ट है, जिसके लिए आमतौर पर हाथ की नस से का सैंपल लिया जाता है। इसके लिए सामान्यतः किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती।क्या बीटा HCG टेस्ट के लिए खाली पेट रहना जरूरी है?
आमतौर पर केवल Beta HCG जांच के लिए खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, अगर साथ में दूसरे ब्लड टेस्ट भी लिखे गए हैं, तो डॉक्टर या लैब के नियम को फॉलो करें।
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Current Version
Oct 01, 2026 13:45 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Oct 01, 2026 13:45 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr M V Jyothsna
