Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्‍या कद्दू के बीज खाने से पुरुषों में वाकई बढ़ता है टेस्टोस्टेरोन? एक्‍सपर्ट से जानें

कई लोगों को ऐसा लगता है क‍ि कद्दू के बीज का सेवन करने से पुरुषों में टेस्‍टोस्‍टेरोन लेवल बढ़ जाता है। क्‍या यह वाकई सच है? क्‍या कद्दू के बीज खाने से स्‍पर्म क्वालिटी ग‍िर सकती है? एक्‍सपर्ट से जानते हैं ऐसे कुछ सवालों के जवाब।

इंटरनेट पर कद्दू के बीज के फायदे (kaddu ke beej ke fayde) पढ़ रही थी, तभी एक सवाल म‍िला क‍ि क्‍या कद्दू के बीज खाने से टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है? (kya kaddu ke beej khane se testosterone badhta hai) इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह समझ लेते हैं क‍ि टेस्टोस्टेरोन आख‍िर है क्‍या? टेस्टोस्टेरोन एक मेल हार्मोन है जो अंडकोष में बनता है। स्पर्म के उत्‍पादन और शरीर के अन्‍य कार्यों के ल‍िए यह हार्मोन अहम भूम‍िका न‍िभाता है। हर व्‍यक्‍त‍ि की नींद, उसका खानपान, स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग और लाइफस्‍टाइल के आधार पर यह तय होता है क‍ि टेस्टोस्टेरोन का लेवल सही है या नहीं। इस लेख में आगे एक्‍सपर्ट की मदद से जानेंगे क‍ि क्‍या वाकई कद्दू के बीज टेस्टोस्टेरोन को बढ़ा देते हैं? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

 

 

 

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पंपक‍िन सीड्स को टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने का सप्‍लीमेंट न समझें

टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ाने में कद्दू के बीज सीधे तौर पर फायदेमंद नहीं हैं, लेक‍िन इनके जर‍िए शरीर को कुछ जरूरी न्‍यूट्र‍िएंट्स म‍िल जाते हैं ज‍िससे टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ाने में मदद म‍िलती है। हालांक‍ि टेस्टोस्टेरोन पर कद्दू के बीज का बुरा असर भी नहीं होता है। टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ाने के ल‍िए शरीर को ज‍िंक की जरूरत होती है। अगर शरीर में ज‍िंक की कमी है, तो टेस्टोस्टेरोन का लेवल ग‍िर सकता है। भारतीय लोगों की डाइट में ज‍िंंक की कमी होना एक आम समस्‍या है क्‍योंक‍ि हमारी डाइट में कार्ब्स की मात्रा ज्‍यादा होती है और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। कद्दू के बीज में ज‍िंक होता है, अगर क‍िसी के शरीर में ज‍िंक की कमी है, तो कद्दू के बीज खाने से ज‍िंक का लेवल सुधरता है और टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ाने में मदद म‍िलती है।

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पीसीओडी के इलाज में फायदेमंद हैं पंपक‍िन सीड्स

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पीसीओडी में कद्दू के बीज का सेवन फायदेमंद है क्‍योंक‍ि इस कंडीशन में एस्‍ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि जो मह‍िलाएं पीसीओडी की समस्‍या से पीड़ि‍त हैं उन्‍हें डाइट में पंंपक‍िन सीड्स को शाम‍िल करने की सलाह दी जाती है। कद्दू के बीज का सेवन करने से एस्‍ट्रोजन लेवल को बढ़ाने में मदद म‍िलती है।

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पंपक‍िन सीड्स को डाइट में कैसे शाम‍िल करें?- How To Consume Pumpkin Seeds

टेस्टोस्टेरोन लेवल को सपोर्ट करने के ल‍िए पंपक‍िन सीड्स फायदेमंंद होते हैं। इनमें ज‍िंक और मैग्नीशियम की अच्‍छी मात्रा पाई जाती है। रोजाना एक से दो टेबलस्‍पून कद्दू के बीजोंं को डाइट में शाम‍िल कर सकते हैं। एक से दो टेबलस्‍पून का मतलब है करीब 28.35 ग्राम (approx. 1 oz) मात्रा का सेवन कर सकते हैं। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के उत्‍पादन के ल‍िए पंपक‍िन सीड्स फायदेमंद माने जाते हैं। इनका सेवन करने से स्पर्म क्वालिटी और प्रोस्‍टेट हेल्‍थ को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

कद्दू के बीज खाने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नहीं बढ़ता बल्‍क‍ि टेस्टोस्टेरोन के उत्‍पादन में मदद म‍िलती है। कद्दू के बीज, फीमेल हार्मोन एस्‍ट्रोजन को बढ़ाने में भी मदद करते हैं ज‍िससे पीसीओडी की समस्‍या कंट्रोल होती है।

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Video Credit: Dr. Manan Vora

FAQ

  • टेस्टोस्टेरोन क्‍या होता है?

    टेस्टोस्टेरोन एक हार्मोन है जो प्रजनना क्षमता, मांसपेश‍ियों के व‍िकास, एनर्जी लेवल, हड्ड‍ियों की सेहत जैसे जरूरी कार्यों से जुड़ा हुआ है।
  • पुरुषों में सामान्य टेस्टोस्टेरोन का स्तर क्‍या है?

    वयस्‍क पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का सामान्‍य स्‍तर 300 से 1000 ng/dl माना जाता है। अगर टेस्टोस्टेरोन का स्‍तर 300 से कम है, तो डॉक्‍टर इलाज और दवाओं का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।
  • टेस्टोस्टेरोन की कमी से क्‍या होता है?

    टेस्टोस्टेरोन की कमी से पुरुषों में स्पर्म काउंट कम हो सकता है, बोन डेंस‍िटी में ग‍िरावट, च‍िड़च‍िड़ापन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 13, 2026 14:13 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 13, 2026 14:13 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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