ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड अर्थराइटिस, दोनों ही गंभीर बीमारी है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, जहां किसी एक ज्वाइंट को प्रभावित कर सकती है वहीं, रुमेटॉइड अर्थराइटिस शरीर के दोनों हिस्सों के जोड़ों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा भी दोनों ही बीमारियों में काफी अंतर है। इस बारे में विस्तार से जानकरी के लिए हमने Dr. Akhilesh Rathi, Orthopaedic and Joint Replacement Surgeon से बात की और जाना कि दोनों में से कौन सी ज्यादा गंभीर बीमारी है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है और यह जोड़ों को कैसे प्रभावित करता है?
डॉ. अखिलेश राठी बताते हैं कि ऑस्टियोआर्थराइटिस, उम्र बढ़ने के साथ होने वाली डिजनरेटिव बीमारियों में से एक है जो कि कार्टिलेज के धीरे-धीरे खराब होने से होता है। दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में लगातार टूट-फूट होने लगती है। इससे शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करने में कार्टिलेज घिस जाते हैं। इससे जोड़ों में अकड़न, दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है।
| ऑस्टियोआर्थराइटिस |
रुमेटॉइड अर्थराइटिस |
| उम्र बढ़ने के साथ होने वाली डिजनरेटिव बीमारी | ऑटोइम्यून बीमारी |
| 50 की उम्र के बाद ज्यादा होने की संभावना | किसी भी उम्र में हो सकता है जैसे 30 की उम्र के बाद |
| किसी एक खास जोड़ को प्रभावित करता है | शरीर के दोनों तरफ की जोड़ों को प्रभावित करता है |
| ज्यादा काम करने के बाद दर्द होता है | आराम करके उठने के बाद दर्द होता है |
रुमेटॉइड अर्थराइटिस क्या है और यह जोड़ों को कैसे प्रभावित करता है?
डॉ. अखिलेश राठी बताते हैं कि रुमेटॉइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें अपना ही इम्यून सिस्टम हड्डियों और जोड़ों पर हमला कर देता है। परेशान करने वाली बात यह है कि इस बीमारी में इम्यून सिस्टम एक ही समय में आपके शरीर के दोनों तरफ के एक ही जोड़ को एक साथ प्रभावित करता है जैसे दोनों कलाई या दोनों हाथ। इस प्रकार से यह दोनों ही जोड़ों में दर्द और सूजन की वजह बनता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड अर्थराइटिस के मुख्य लक्षणों में अंतर
डॉ. अखिलेश राठी बताते हैं कि ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड अर्थराइटिस के मुख्य लक्षणों में अंतर देखें तो
ऑस्टियोआर्थराइटिस समान रूप से आपके शरीर के दोनों तरफ के जोड़ों को प्रभावित नहीं करती बल्कि, किसी भी एक जगह पर हो सकती है जैसे घुटने, रीढ़ की हड्डी और कूल्हे में।
रुमेटॉइड अर्थराइटिस में आपके दोनों कलाइयों में दर्द हो सकता है, हाथों में दर्द हो सकता है और उंगलियों में दर्द हो सकता है। कुल मिलाकर कहें तो यह बीमारी शरीर के दोनों तरफ के अंगों को समान रूप से प्रभावित करती है।
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ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटॉइड अर्थराइटिस के दर्द में अंतर
डॉ. अखिलेश राठी बताते हैं कि ऑस्टियोआर्थराइटिस का दर्द काम के दौरान बढ़ जाता है जबकि रुमेटॉइड अर्थराइटिस में जब आप आराम करके उठते हैं तो दर्द होता है। इसे ऐसे समझें कि
- ऑस्टियोआर्थराइटिस में चलने-फिरने या ज्यादा काम करने के बाद दर्द होता है।
- रुमेटॉइड अर्थराइटिस में सुबह उठने के बाद या आराम करके उठने के बाद लगभग 30 मिनट से लेकर 1 घंटे तक जोड़ों में दर्द होता है।
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साल 2024 में Journal of Translational Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, दोनों बीमारियों के बीच आनुवंशिक संबंध देखा गया है, लेकिन इनके विशिष्ट जीन (gene loci) आपस में ओवरलैप नहीं करते। रुमेटॉइड अर्थराइटिस में मौजूद अधिकांश साइटोकाइन्स रोगजनक (pathogenic) होते हैं, जो जोड़ों में सूजन और क्षति को बढ़ाते हैं जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस अधिक सुरक्षात्मक साइटोकाइन्स (protective cytokines) से जुड़ा होता है।
दोनों में से कौन है ज्यादा गंभीर बीमारी?
इस सवाल के जवाब में डॉ. राठी बताते हैं कि रुमेटॉइड अर्थराइटिस ज्यादा गंभीर बीमारी है क्योंकि यह 30 के बाद या किसी भी उम्र में हो सकती है और इसमें पूरा शरीर प्रभावित होता है। रुमेटॉइड अर्थराइटिस में सिर्फ आपके शरीर के ज्वाइंट्स ही प्रभावित नहीं होते बल्कि, पूरा शरीर प्रभावित होने लगता है जिसमें कि आपको बुखार आ सकता है, कमजोरी हो सकती है और वजन घट सकता है। जबकि, ऑस्टियोआर्थराइटिस उम्र बढ़ने से जुड़ी हुई बीमारी है जो कि 50 की उम्र के बाद ज्यादा परेशान करती है और इसमें सिर्फ वही ज्वाइंट्स प्रभावित रहते हैं जिनके कार्टिलेज घिस गए हैं।
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बीमारी के निदान के लिए जरूरी मेडिकल टेस्ट और जांच
डॉ. अखिलेश राठी कहते हैं कि रुमेटोलॉजिस्ट X-रे या अल्ट्रासाउंड करके और रुमेटॉयड फैक्टर (RF) जांच करके रुमेटॉइड अर्थराइटिस का पता लगा सकते हैं। यह इम्यून बीमारी है जो कभी ठीक नहीं हो सकती है बस दवाओं की मदद से सूजन को कंट्रोल किया जा सकता है और लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है। अब बात ऑस्टियोआर्थराइटिस की करें तो यह पहले कभी जोड़ में चोट लगने, स्पोर्ट्स के दौरान चोट, मोटापा या जेनेटिक वजहों के कारण हो सकती है इसलिए डॉक्टर कारणों की पहचान करके हल्के एक्सरसाइज बता सकता है, वेट लॉस के लिए बोल सकता है, थेरेपी दे सकता है और अंत में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी का भी सुझाव दे सकता है।
निष्कर्ष:
अंत में डॉ. राठी यही कहते हैं कि आपको दोनों ही बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। दरअसल, जितनी जल्दी इलाज होगा उतनी ही जल्दी आप इसे बढ़ने से रोक पाएंगे। दोनों ही बीमारियां पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती इसलिए आपको लक्षणों को ही मैनेज करने पर ध्यान देना होगा और इसके लिए डॉक्टरी मदद जरूरी है।
FAQ
गठिया की शुरुआत कैसे होती है?
गठिया की शुरुआत में आपको अपने जोड़ों के आस-पास रेडनेस के साथ कठोरता महसूस हो सकती है, जिसमें हल्का-हल्का दर्द हो सकता है। समस के साथ यह दर्द बढ़ता हुआ महसूस हो सकता है।गठिया का कौन सा टेस्ट होता है?
गठिया में तीन अलग-अलग प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं जैसे-रूमेटॉइड फैक्टर (RA Factor) टेस्ट, एएनए (ANA - Antinuclear Antibody) टेस्ट और एंटी-सीसीपी (Anti-CCP) टेस्ट किया जाता है।
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Oct 14, 2026 14:32 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Akhilesh Rathi
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