Fri Oct 16, 2026 | 12:41 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akhilesh Rathi , Orthopaedic and Joint Replacement Surgeon

क्या आपका घुटने का दर्द अर्थराइटिस है? डॉक्टर से जानें सही पहचान

घुटनों का दर्द सामान्य है या अर्थराइटिस, यह जानना जरूरी है ताकि सही समय पर इलाज हो सके। सामान्य दर्द आराम से ठीक हो सकता है, जबकि अर्थराइटिस में अकड़न और चलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखते हैं।
क्या आपका घुटने का दर्द अर्थराइटिस है? डॉक्टर से जानें सही पहचानक्या आपका घुटने का दर्द अर्थराइटिस है? डॉक्टर से जानें सही पहचान

घुटनों में दर्द होना एक आम समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने, ज्यादा चलने, एक्सरसाइज करने या चोट लगने के कारण घुटनों में कुछ समय के लिए दर्द हो सकता है। हालांकि, अगर दर्द बार-बार होता है, घुटनों में सूजन रहती है या चलने-फिरने में परेशानी होती है तो यह अर्थराइटिस का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में नॉर्मल घुटने के दर्द और अर्थराइटिस के बीच अंतर समझना जरूरी है, ताकि समय पर सही इलाज किया जा सके। Dr. Darsh Goyal Director, Robotic Joint Replacement, Orthopaedics & Sports Injuries और Dr. Akhilesh Rathi, Orthopaedic and Joint Replacement Surgeon, Sri Balaji Action Medical Institute से जानते हैं कि घुटनों का दर्द सामान्य है या अर्थराइटिस के कारण?

घुटनों का दर्द सामान्य है या अर्थराइटिस के कारण?

Dr. Darsh Goyal बताते हैं कि हर बार घुटने में होने वाला दर्द अर्थराइटिस की वजह से हो, यह जरूरी नहीं है। ज्यादा चलने, लंबे समय तक खड़े रहने, अचानक ज्यादा एक्सरसाइज करने, चोट लगने या मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ने से भी कुछ समय के लिए घुटनों में दर्द हो सकता है। ऐसी स्थिति में आराम करने और सही देखभाल के बाद दर्द कम हो सकता है।

आगे Dr. Darsh Goyal कहते हैं कि अगर घुटनों का दर्द बार-बार हो रहा है या धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, तो इसके पीछे किसी जोड़ संबंधी समस्या की संभावना हो सकती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस में आमतौर पर घुटनों में दर्द के साथ अकड़न, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।

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Dr. Darsh Goyal ने यह भी बताया कि कई लोगों को सीढ़ियां चढ़ने-उतरने, लंबे समय तक चलने, बैठने के बाद उठने या जमीन से उठते समय दर्द अधिक महसूस होता है। कुछ मामलों में घुटने को मोड़ने या सीधा करने में भी परेशानी हो सकती है। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर खुद से अर्थराइटिस की पुष्टि नहीं करनी चाहिए।

Institute for Quality and Efficiency in Health Care के अनुसार, "अगर आराम करने के बाद कुछ देर तक आपका घुटना अकड़ा हुआ महसूस होता है और उसे हिलाने पर दर्द होता है, तो आपको ऑस्टियोआर्थराइटिस हो सकता है। घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में, जोड़ की सतहों को ढकने वाला कार्टिलेज पतला हो जाता है और सुरक्षा कम कर देता है।"

अर्थराइटिस के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें

Dr. Akhilesh Rathi के अनुसार, अर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं। कई बार लोग इन्हें बढ़ती उम्र या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए, इन संकेतों पर ध्यान दें-

  • जोड़ों में लगातार दर्द- चलने, खड़े होने या शारीरिक गतिविधि के दौरान घुटनों का दर्द बढ़ना।
  • सुबह अकड़न- सोकर उठने के बाद घुटनों को सामान्य रूप से मोड़ने या सीधा करने में परेशानी होना।
  • सूजन और गर्माहट- घुटने के आस-पास सूजन या छूने पर गर्म महसूस होना।
  • चलने में मुश्किल- सीढ़ियां चढ़ने, कुर्सी से उठने या कुछ दूरी तक चलने में परेशानी।
  • जोड़ों से आवाज आना- घुटनों को मोड़ते समय चरमराहट महसूस होना, खासकर जब इसके साथ दर्द भी हो।
  • जोड़ों की गति कम होना- घुटने को पूरी तरह मोड़ने या सीधा करने में मुश्किल।

घुटने के दर्द में कौन-सा टेस्ट करवाना चाहिए? 

Dr. Darsh Goyal के अनुसार, घुटने के दर्द का सही कारण जानने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, दर्द का समय, चोट के इतिहास और लक्षणों के बारे में पता लगाते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार, कुछ टेस्ट करवाए जा सकते हैं।

  • एक्स-रे- यह हड्डियों की स्थिति, जोड़ के बीच की जगह कम होने और ऑस्टियोअर्थराइटिस से जुड़े बदलावों के बारे में पता लगाने में मदद करता है।
  • MRI- अगर लिगामेंट, मेनिस्कस, कार्टिलेज या अन्य सॉफ्ट टिश्यू में चोट का संदेह हो, तो यह जांच सही साबित हो सकती है। हर मरीज को MRI की जरूरत नहीं होती है।
  • ब्लड टेस्ट- रूमेटॉइड अर्थराइटिस या अन्य सूजन से जुड़ी बीमारियों का संदेह होने पर डॉक्टर ESR, CRP, रूमेटॉइड फैक्टर या एंटी-CCP जैसे टेस्ट करवाने की सलाह दे सकती हैं।
  • जॉइंट फ्लूइड टेस्ट- अगर घुटने में काफी सूजन हो, इंफेक्शन या गाउट का संदेह हो, तो जोड़ से लिक्विड का नमूना लेकर जांच की जा सकती है।

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अर्थराइटिस से बचाव और घुटनों को हेल्दी रखने के उपाय

Dr. Darsh Goyal बताते हैं कि हर तरह के अर्थराइटिस को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता है, लेकिन कुछ आदतें घुटनों पर दबाव कम करने और जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

  • ज्यादा वजन कम करने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है।
  • पैदल चलना, तैरना और साइकिल चलाना जैसे एक्सरसाइज करें।
  • डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से जांघों और घुटनों के आस-पास की मांसपेशियों को मजबूत करें।
  • प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर फूड्स का सेवन करें।
  • एक्सरसाइज से पहले वार्म-अप करें और गतिविधियों के दौरान सही तकनीक अपनाएं।
  • लगातार दर्द होने पर खुद दवाएं लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

कब घुटने के दर्द के लिए तुरंत डॉक्टर से मिलें?

कुछ स्थितियों में घुटने के दर्द को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। अगर चोट के बाद घुटने में तेज दर्द, अचानक सूजन या पैर पर वजन रखने में असुविधा हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। घुटना बहुत गर्म और लाल हो, अचानक तेज दर्द के साथ बुखार आए या घुटनों को हिलाने में मुश्किल हो तो इंफेक्शन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति में आपको तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट लेने की जरूरत होती है।

निष्कर्ष

घुटने का दर्द हमेशा अर्थराइटिस का संकेत नहीं होता, लेकिन लगातार दर्द, सूजन, अकड़न और चलने में मुश्किल होने की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच, सही इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल से घुटनों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या अचानक गंभीर हो जाएं, तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।
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FAQ

  • घुटने की ग्रीस बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?

    घुटने की ग्रीस बढ़ाने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें, कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर फूड्स का सेवन कर सकते हैं।
  • किसकी कमी से घुटने में दर्द होता है?

    घुटनों में दर्द मुख्य रूप से शरीर में विटामिन डी, कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी के कारण होता है। इसके अलावा, घुटनों में कार्टिलेज के घिसने से भी जोड़ों का लुब्रिकेशन कम होने की समस्या हो सकती है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 16, 2026 11:20 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akhilesh Rathi