Tue Oct 20, 2026 | 02:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Srikanth Madikattu , Consultant – Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon Manipal Hospitals, Pune

World Osteoporosis Day: ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थराइटिस? डॉक्टर से जानें हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों के दर्द में अंतर

घुटनों में दर्द हो या फिर हड्डियों में फ्रैक्चर आ जाए, लोगों को लगता है कि दोनों ही समस्याएं आर्थराइटिस या गठिया से जुड़ी है। ये दोनों ही समस्याएं हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग हैं। डॉक्टर ने लेख में आर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस के अंतर को विस्तार से समझाया है।
World Osteoporosis Day: ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थराइटिस? डॉक्टर से जानें हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों के दर्द में अंतरWorld Osteoporosis Day: ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थराइटिस? डॉक्टर से जानें हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों के दर्द में अंतर

उम्र बढ़ने के साथ घुटनों में दर्द, कमर में परेशानी या जोड़ों में अकड़न होने लगे, तो अक्सर लोग इसे हड्डियों की कमजोरी समझ लेते हैं, लेकिन हड्डियों की कमजोरी से फ्रैक्चर का रिस्क बढ़ सकता है। वहीं जोड़ों की समस्या में कार्टिलेज की समस्या हो सकती है। World Osteoporosis Day के मौके पर हमने Dr. Srikanth Madikattu, Consultant, Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon, Manipal Hospital, Baner, Pune से बात की। उन्होंने बताया कि हालांकि, ऑस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस दोनों हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन इनके बीच काफी अंतर है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है, जबकि आर्थराइटिस में जोड़ों पर असर पड़ता है। इसलिए इन दोनों बीमारियों के लक्षणों को समझना जरूरी है।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या होता है?

Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं, “ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और उनकी अंदरूनी संरचना कमजोर हो जाती है। इससे हड्डियां पहले के मुकाबले ज्यादा नाजुक हो सकती हैं। ऐसे में मामूली गिरने या हल्की चोट लगने पर भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते और लोगों को इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चल पाता। जब किसी मामूली चोट पर फ्रैक्चर होता है, तो ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जानकारी मिलती है। ऑस्टियोपोरोसिस होने के कई कारण हो सकते हैं।”

  • उम्र बढ़ना
  • मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना
  • कैल्शियम और विटामिन डी की कमी
  • फिजिकल एक्टिविटीज कम करना
  • कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करना

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण

Mayo Clinic के मुताबिक, ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसलिए फ्रैक्चर होने की स्थिति में इस बीमारी के बारे में पता चलता है। इसके लक्षण कुछ ये हो सकते हैं।

  • रीढ़ की हड्डी के वर्टब्रे के टूटने या दबने के कारण पीठ या कमर में दर्द होना।
  • रीढ़ की हड्डी के झुकने या दबने से शरीर की लंबाई कम हो सकती है।
  • पीठ या रीढ़ में झुकाव आना और कुबड़ापन दिखना।
  • मामूली चोट, झटके या हल्के से गिरने पर हड्डी में फ्रैक्चर हो जाना।

ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज कैसे किया जा सकता है?

Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस में मरीज की जरूरत पड़ने पर DEXA स्कैन कराया जाता है। इस जांच से हड्डियों की डेंसिटी मापी जाती है। इसी के आधार पर मरीज का इलाज किया जाता है।

  • हड्डियों को और कमजोर होने से बचाने के लिए बैलेंस्ड डाइट के साथ कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा लेने की सलाह दी जाती है।
  • रेगुलर एक्सरसाइज करना जरूरी होता है।
  • कम हील वाले जूते पहनने की सलाह दी जाती है, ताकि फ्रैक्चर के रिस्क को कम किया जा सके।
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हड्डियों को मजबूत करने वाली दवाएं भी दे सकते हैं।

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आर्थराइटिस में क्या होता है?

Pune के Sahyadri Super Speciality Hospital के Orthopaedics Dr. Nikhil Jadhav का कहना है,” आर्थराइटिस में जोड़ों में कार्टिलेज की कमी के चलते सूजन आ सकती है। इस बीमारी में मरीज को चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है। आर्थराइटिस दो तरह ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटॉइड होता है। इसके लक्षणों को आधार पर ही इसका इलाज किया जा सकता है।”

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस - इसमें जोड़ों की हड्डियों का कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है। इससे जोड़ों में दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। घुटनों, कूल्हों, हाथों और कमर के आसपास के जोड़ों में यह समस्या हो सकती है।
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस - यह ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें इम्यून सिस्टम जोड़ों के टिश्यू को नष्ट करने लगता है। इससे जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। इस कंडीशन में कुछ लोगों को सुबह उठने पर जोड़ों में काफी अकड़न महसूस होती है। इसके अलावा, मरीज को थकान और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी भी हो सकती है।

आर्थराइटिस के लक्षण

Cleveland Clinic के मुताबिक, आर्थराइटिस के आम लक्षण ये हो सकते हैं। इस कंडीशन में मरीज को लक्षण कभी तेज हो जाते हैं, तो कभी कम महसूस होते हैं।

  • जोड़ों में हल्का या तेज दर्द होना।
  • जोड़ों का सख्त हो जाना और उन्हें पूरी तरह से मोड़ने में दिक्कत होना।
  • जोड़ों के आस-पास सूजन होना।
  • प्रभावित जोड़ के ऊपर की स्किन का लाल या कुछ अलग रंग की दिखना।
  • जोड़ों के आस-पास छूने पर दर्द महसूस होना।
  • प्रभावित जोड़ के आस-पास गर्मी या जलन महसूस होना।

आर्थराइटिस का इलाज कैसे किया जा सकता है?

Dr. Srikanth Madikattu ने कहा, “आर्थराइटिस में मरीज की फिजिकल जांच, मेडिकल हिस्ट्री चेक की जाती है। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे की सलाह दी जा सकती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस में ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है। जांच के आधार पर ही आर्थराइटिस के मरीजों को इलाज की सलाह दी जा सकती है।”
मरीज को फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी जा सकती है।

  • रेगुलर एक्सरसाइज करना।
  • वजन को कंट्रोल करना।
  • दर्द या सूजन कम करने वाली दवाएं देना।
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस में बीमारी को मैनेज करने के लिए दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
  • कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।

ऑस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस में फर्क

Dr. Srikanth Madikattu ने कहा कि दोनों समस्याओं के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि ऑस्टियोपोरोसिस लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकता है और इसमें फ्रैक्चर की संभावना बनी रहती है। गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस में मरीज को हल्का सा गिरने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है। वहीं, आर्थराइटिस में अक्सर जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन जैसी परेशानियां दिखाई देती हैं। इसमें मरीज को जोड़ मोड़ने, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय दर्द होना या कुछ देर बैठने के बाद उठने में परेशानी होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए मरीज को हड्डियों से जुड़े किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”

 

ऑस्टियोपोरोसिस 

ऑस्टियोआर्थराइटिस 

क्या होता है?

यह हड्डियों की बीमारी है, जिसमें हड्डियां कमजोर और पतली हो जाती हैं।

यह जोड़ों की बीमारी है, जो हड्डियों के बीच के कुशन यानी कार्टिलेज के घिसने से होती है।

कारण 

उम्र बढ़ना
कैल्शियम व विटामिन D की कमी
स्मोकिंग
फिजिकल एक्टिविटी न करना
जेनेटिक्स
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन में कमी

उम्र का असर
जोड़ों का बहुत इस्तेमाल
मोटापा
जोड़ों की पुरानी चोट
जेनेटिक्स

लक्षण 

आसानी से फ्रैक्चर होना
रीढ़ की हड्डी में दर्द
कलाई या कूल्हे में फ्रैक्चर
समय के साथ लंबाई कम होना
पीठ दर्द और शरीर का आगे झुकना 

जोड़ों में दर्द
सुबह या आराम के बाद जोड़ों में अकड़न
जोड़ों में सूजन
जोड़ों में संवेदनशीलता
जोड़ों को मोड़ने या फैलाने में दर्द
प्रभावित जोड़ के आसपास हड्डी का बढ़ना 

बचाव के तरीके

कैल्शियम और विटामिन D युक्त संतुलित आहार लेना
वजन उठाने वाले और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज करना  स्मोकिंग और बहुत शराब से परहेज
डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स या दवाएं लेना।

हेल्दी वजन रखना 
रेगुलर रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करना
बैलेंस्ड डाइट लेना
जोड़ों को चोट से बचाना 

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निष्कर्ष

अगर पीठ में दर्द या जोड़ों में सूजन या चलने-फिरने में दिक्कत हो, तो समय पर डॉक्टर से चेकअप करा लेना चाहिए। इससे समय पर मरीज का इलाज करके हड्डियों और जोड़ों को गंभीर होने से बचाया जा सकता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाएं लंबे समय तक लेना या खुद से इलाज शुरू करना सही नहीं है।

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FAQ

  • क्या किसी एक ही व्यक्ति को ऑस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस दोनों एक साथ हो सकते हैं?

    बढ़ती उम्र के साथ ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और साथ ही ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटनों या जोड़ों की कार्टिलेज भी घिस सकती है।
  • यदि किसी को चलने में घुटनों से कट-कट की आवाज आती है, तो यह ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत है या आर्थराइटिस का?

    घुटनों या जोड़ों से कट-कट की आवाज आना और साथ में दर्द होना आर्थराइटिस का शुरुआती लक्षण है, न कि ऑस्टियोपोरोसिस का। ऑस्टियोपोरोसिस में जोड़ों के बीच कोई आवाज नहीं आती क्योंकि वह सीधे हड्डी के अंदर की कमजोरी है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 20, 2026 13:40 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Srikanth Madikattu