Thu Oct 8, 2026 | 06:02 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sachin Sekhar Biswal , Consultant – Medical Oncology

मुंह का कैंसर सिर्फ तंबाकू-सिगरेट से नहीं होता, ये 5 कारण भी बढ़ा सकते हैं बीमारी का खतरा

मुंह का कैंसर सिर्फ तंबाकू और सिगरेट से नहीं होता, सुपारी, खराब ओरल हाइजीन और लंबे समय की जलन जैसे कारण भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। यहां डॉक्टर से जानिए, तंबाकू और सिगरेट के अलावा मुंह के कैंसर के कारण क्या हो सकते हैं?
मुंह का कैंसर सिर्फ तंबाकू-सिगरेट से नहीं होता, ये 5 कारण भी बढ़ा सकते हैं बीमारी का खतरामुंह का कैंसर सिर्फ तंबाकू-सिगरेट से नहीं होता, ये 5 कारण भी बढ़ा सकते हैं बीमारी का खतरा

मुंह के कैंसर का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के मन में तंबाकू, सिगरेट और गुटखा सबसे पहले आते हैं। यह सच है कि तंबाकू का सेवन ओरल कैंसर के जोखिम को की गुना बढ़ाता है, लेकिन बिना तंबाकू खाए भी मुंह का कैंसर हो सकता है। मणिपाल अस्पताल भुवनेश्वर के सलाहकार मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, HPV इंफेक्शन, ज्यादा शराब का सेवन, सुपारी, लंबे समय तक धूप में रहना और मुंह की लंबे समय से चली आ रही समस्याएं भी कुछ मामलों में जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। खास बात यह है कि इनमें से कुछ जोखिम ऐसे हैं जिन पर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते हैं।

डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल बताते हैं कि मुंह के कैंसर में शुरुआती बदलाव हमेशा तेज दर्द के रूप में सामने आएं, यह जरूरी नहीं है। मुंह में लंबे समय तक रहने वाला छाला, सफेद या लाल धब्बा, गांठ, बिना वजह खून आना, निगलने में परेशानी या किसी हिस्से में लगातार सुन्नपन जैसे बदलाव जांच की वजह हो सकते हैं। हर ऐसा लक्षण कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर कोई बदलाव लंबे समय तक बना रहे तो उसकी वजह जानना जरूरी है।

तंबाकू के अलावा मुंह के कैंसर के छिपे हुए कारण

ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिन्होंने कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया, फिर भी उनमें ओरल कैंसर पाया जाता है। इसलिए इसके दूसरे संभावित जोखिम बढ़ाने वाले कारकों और शुरुआती संकेतों को समझना जरूरी है।

1. HPV इंफेक्शन के कारण कैंसर

डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, कुछ प्रकार के ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का संबंध मुंह और गले के कुछ कैंसर से पाया गया है। HPV एक वायरस है और कई मामलों में इससे संक्रमित व्यक्ति को कोई लक्षण भी नजर नहीं आते लेकिन इसके कुछ प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर कैंसर के खतरे से जुड़े हो सकते हैं।

2. सुपारी, शराब और पान मसाला से कैंसर

डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल बातते हैं कि कई लोग सुपारी खाते हैं और सोचते हैं कि उन्हें मुंह के कैंसर का खतरा नहीं है, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। सुपारी यानी अरेका नट का सेवन भी मुंह के कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, अरेका नट को कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ में शामिल किया गया है। इसलिए बिना तंबाकू वाले सुपारी प्रोडक्ट्स को भी सुरक्षित समझकर नियमित सेवन नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा ज्यादा शराब पीने से मुंह की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है। शराब और तंबाकू का एक साथ सेवन करने पर मुंह के कैंसर का जोखिम और बढ़ सकता है। इसलिए केवल सिगरेट या तंबाकू से दूरी बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शराब के सेवन से भी बचना जरूरी है।

3. धूप में ज्यादा रहने से कैंसर

डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, लंबे समय तक सूरज की तेज रोशनी के संपर्क में रहने से होंठ के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर ऐसे लोग जो लंबे समय तक खुले में काम करते हैं, उन्हें अपने होंठों पर ध्यान देना चाहिए। होंठ पर लंबे समय से मौजूद कोई असामान्य बदलाव नजर आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Causes Of Mouth CancerCauses Of Mouth Cancer

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4. खराब ओरल हेल्थ के कारण कैंसर

लंबे समय से मसूड़ों की समस्या, दांतों की समस्या या मुंह के अंदर बार-बार होने वाली जलन कुछ मामलों में जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसलिए दांतों और मसूड़ों की नियमित देखभाल जरूरी है। मुंह में लंबे समय से बनी किसी समस्या को सिर्फ मामूली परेशानी समझकर टालने के बजाय डेंटिस्ट या डॉक्टर से इसकी जांच करानी चाहिए।

5. परिवार में कैंसर का इतिहास

डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, कुछ मामलों में परिवार में कुछ प्रकार के कैंसर का इतिहास व्यक्ति के जोखिम को बढ़ा सकता है। हालांकि, केवल परिवार में कैंसर होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को फ्यूचर में मुंह का कैंसर जरूर होगा। फिर भी अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है और मुंह में कोई लगातार बना रहने वाला बदलाव नजर आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

साल 2018 में Journal of Oral Medicine and Pathology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार-

  • भले ही मुंह के कैंसर के मामले अन्य कैंसरों की तुलना में कम हों, लेकिन देर से पता चलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
  • यह स्टडी बताती है कि डॉक्टरों को सिर्फ दांतों की ही नहीं, बल्कि मुंह के अंदरूनी हिस्सों (म्यूकोसा) की भी बारीकी से जांच करनी चाहिए।
  • मुंह के कैंसर का शुरुआती अवस्था में या कैंसर से पहले के लक्षणों (प्रीकैंसरस) में पता चल जाने से मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और जोखिम कम होता है।
  • इसके अलावा, बच्चों और बुजुर्गों तथा एशियाई व गैर-एशियाई मरीजों में इस बीमारी के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं।

मुंह में ये बदलाव दिखें तो तुरंत कराएं जांच

डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, मुंह के कैंसर के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। अगर मुंह में कोई छाला 2 से 3 हफ्ते तक ठीक न हो, तो उसकी जांच करानी चाहिए। इसके अलावा मुंह में गांठ, बिना किसी कारण के खून आना, निगलने में परेशानी, लगातार दर्द, किसी हिस्से में सुन्नपन या मुंह के अंदर सफेद अथवा लाल धब्बा भी गंभीर संकेत हो सकता है।

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निष्कर्ष

मुंह का कैंसर केवल तंबाकू और सिगरेट का सेवन करने वालों को ही होता है, यह कहना सही नहीं है। HPV इंफेक्शन, सुपारी और गुटखा, लंबे समय तक धूप में रहना, मुंह की खराब सेहत और कुछ अन्य जोखिम भी भूमिका निभा सकते हैं। सबसे जरूरी है कि मुंह में होने वाले किसी भी ऐसे बदलाव को नजरअंदाज न करें जो 2-3 सप्ताह में ठीक नहीं हो रहा है। समय पर डेंटिस्ट या डॉक्टर से जांच कराने से समस्या की पहचान और उचित इलाज में मदद मिल सकती है।

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FAQ

  • क्या मुंह में सफेद परत और सफेद धब्बा एक ही चीज है?

    मुंह में सफेद बदलाव कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं। अगर कोई धब्बा लगातार बना रहे तो डॉक्टर से इसकी जांच करानी चाहिए।
  • मुंह का कैंसर किस उम्र में ज्यादा होता है?

    उम्र बढ़ने के साथ कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन कम उम्र के लोगों में भी मुंह और गले से जुड़े कैंसर देखे जा सकते हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 08, 2026 15:57 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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