Thu Oct 15, 2026 | 06:00 PM IST

Medically Reviewed by Dr Arun Goel , Chairman & Surgical Oncologist Andromeda Cancer Hospital, Haryana

क्‍या नॉन स्टिक पैन से कैंसर का खतरा होता है? डॉक्‍टर से जानें इसमें खाना पकाना क‍ितना सुरक्ष‍ित है

कई लोग यह मानते हैं क‍ि नॉन स्‍ट‍िक पैन में खाना पकाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्‍टर से जानें यह सच है या म‍िथक?
क्‍या नॉन स्टिक पैन से कैंसर का खतरा होता है? डॉक्‍टर से जानें इसमें खाना पकाना क‍ितना सुरक्ष‍ित हैक्‍या नॉन स्टिक पैन से कैंसर का खतरा होता है? डॉक्‍टर से जानें इसमें खाना पकाना क‍ितना सुरक्ष‍ित है

आजकल लोग नॉन-स्‍टि‍क पैन और बर्तनों में खाना पकाना पसंद करते हैं क्‍योंक‍ि खाना इसमें च‍िपकता नहीं है और बर्तन को साफ करना भी आसान होता है। वहीं दूसरी ओर, इसे नापसंद करने वाले लोग यह मानते हैं क‍ि नॉन-स्‍ट‍िक बर्तनों में मौजूद केम‍िकल्‍स के कारण ये कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसा इसल‍िए क्‍योंक‍ि नॉन-स्‍ट‍िक बर्तनों में टेफ्लॉन की कोट‍िंग होती है और इसे ज‍िस केम‍िकल से बनाया जाता है उसका संबंध कैंसर से बताया जाता है। आइए जानते हैं क‍ि क्‍या वाकई नॉन-स्‍ट‍िक बर्तनों से कैंसर फैलता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Arun Goel, Surgical Oncologist & Chairman At Andromeda Cancer Hospital, Haryana से बात की।

क्‍या नॉन-स्‍ट‍िक पैन में खाना पकाने से कैंसर होता है?

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नॉन-स्‍ट‍िक पैन के इस्‍तेमाल से कैंसर होने की संभावना कम है क्‍योंक‍ि मॉर्डन कुकव‍ियर में हान‍िकारक केम‍िकल PFOA का इस्‍तेमाल नहीं क‍िया जाता है। पुराने समय में नॉन-स्‍ट‍िक पैन की टेफ्लॉन कोट‍िंग में इस्‍तेमाल होने वाला केम‍िकल PFOA को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने नवंबर 2023 में PFOA को ग्रुप 1 में इंसानों के लिए कैंसरकारी श्रेणी में रखा। IARC के मुताब‍िक, PFOA को मनुष्यों में कैंसर पैदा करने वाला रसायन माना गया है। हालांक‍ि, कैंसर का खतरा फैक्‍ट्री में इस रसायन के संपर्क में आने से जुड़ा है, न कि आजकल के तैयार नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग से। मॉर्डन कुकवि‍यर में इस केम‍िकल का इस्‍तेमाल नहीं क‍िया जाता है, लेक‍िन सुरक्षा का ध्‍यान रखते हुए अच्‍छी ब्रैंड और क्‍वाॅल‍िटी के ही बर्तन खरीदना चाह‍िए।

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नॉन-स्‍टि‍क पैन में मौजूद टेफ्लॉन कोट‍िंग और PFOA का संंबंध

नॉन-स्‍ट‍िक बर्तनों में टेफ्लॉन कोटि‍ंग लगाई जाती है। टेफ्लॉन के मौजूद होने के कारण अक्‍सर यह सवाल उठाया जाता है क‍ि क्‍या इससे कैंसर का खतरा हो सकता है? ऐसा इसल‍िए क्‍योंक‍ि टेफ्लॉन कोटि‍ंग को बनाने की प्रक्र‍िया में परफ्लुओरूक्टेनोइक एसिड (Perfluorooctanoic acid या PFOA) का इस्‍तेमाल होता है। इसे आमतौर पर 'C8' भी कहा जाता है। कुछ वैज्ञान‍िक मानते हैं क‍ि इसका संबंध कैंसर से हो सकता है।

बर्तन में मौजूद PTFE भी सुरक्ष‍ित नहीं है

साल 2017 में Environmental Science And Pollution Research में प्रकाश‍ित एक अध्‍ययन के मुताब‍िक, PTFE (पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन) कोटिंग वाले नॉन-स्टिक बर्तनों को गर्म करने पर उनसे कई गैसें और रासायनिक पदार्थ निकल सकते हैं। इनमें से कुछ स्वास्थ्य के लिए हान‍िकारक हो सकते हैं।

कोट‍िंग खराब होने पर बर्तन बदल दें

ICMR की Dietary Guidelines For Indians 2024, के मुताब‍िक, टेफ्लॉन की कोटिंग वाले नॉन-स्टिक बर्तन 170°C से अधिक तापमान पर गर्म किए जाने पर जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसा तब हो सकता है, जब खाली बर्तन को लंबे समय तक गैस की आंच पर छोड़ दिया जाए। ऐसी स्थिति में बर्तन की कोटिंग से जलन पैदा करने वाली या जहरीली गैसें निकल सकती हैं। नॉन-स्टिक बर्तनों के इस्तेमाल और सफाई से जुड़े निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए। कोटिंग के घिस जाने या खराब होने पर बर्तन को बदल देना चाहिए।

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नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करते समय क्या सावधानियां रखें?

नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल सेहत के ल‍िए सुरक्षि‍त माना जाता है, लेक‍िन इसके प्रयोग के दौरान कुछ बातों का ख्‍याल रखना जरूरी है-

  • पैन को खाली रखकर बहुत ज्‍यादा गर्म न करें।
  • कोटिंग पर गहरी खरोंच या दिखने पर पैन का इस्‍तेमाल बंद कर दें।
  • खरीदते समय PFOA मुक्त होने की जानकारी और निर्माता के निर्देश देखें।

खाना पकाने के लिए सुरक्षित बर्तन कौन से हैं?

  • खाना पकाने के ल‍िए स्टेनलेस स्टील का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसकी सतह टिकाऊ होती है और इस पर अलग नॉन-स्टिक कोटिंग नहीं होती।
  • लोहे के बर्तन का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसमें खाना पकाने से भोजन में थोड़ी मात्रा में आयरन बढ़ सकता है। हालांक‍ि, इसे अच्‍छी तरह से साफ करना जरूरी है वरना जंग लग सकती है और सेहत को नुकसान हो सकते हैं।

किन बर्तनों से सावधान रहें?

  • खराब या उखड़ी हुई कोटिंग वाले बर्तन का इस्‍तेमाल न करें। इससे कोटिंग के कण भोजन में मिल सकते हैं।
  • बिना लाइनिंग वाले तांबे के बर्तन का प्रयोग न करें। टमाटर, नींबू या सिरके जैसे अम्लीय खाद्य पदार्थों के साथ तांबा भोजन में घुल सकता है।
  • खराब क्‍वॉल‍िटी वाले पीतल या एल्युमिनियम मिश्र धातु के बर्तनों से भी बचें। कुछ उत्पादों से सीसा भोजन में पहुंचने का खतरा भी पाया गया है।

न‍िष्‍कर्ष:

मॉर्डन नॉन-स्‍ट‍िक बर्तनों से कैंसर होने की संभावना कम है इसल‍िए इन बर्तनों में खाना पकाना सुरक्ष‍ित माना जाता है। नॉन-स्‍ट‍िक बर्तनों में पहले PFOA नाम का हान‍िकारक केमि‍कल पाया जाता था ज‍िसे कैंसरकारी श्रेणी में रखा गया था। हालांक‍ि, मॉर्डन कुकव‍ियर में इसका इस्‍तेमाल नहीं क‍िया जाता है। अपनी सुरक्षा के ल‍िए अच्‍छी ब्रैंड और क्‍वॉल‍िटी वाले बर्तन खरीदें। नॉन-स्‍ट‍िक पैन को अध‍िक तापमान पर खाली रखकर गर्म न करें। खरोंच द‍िखने पर बर्तन बदल दें। खाना पकाने के ल‍िए स्‍टेनलेस स्‍टील या लोहे के बर्तन का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। लोहे के बर्तन में जंग नहीं लगनी चाह‍िए, वरना इससे सेहत खराब हो सकती है। खराब या उखड़ी हुई कोटिंग वाले बर्तन, पीतल या एल्युमिनियम मिश्र धातु के बर्तनों से बचें। ये सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या टेफ्लॉन कोटिंग वाले बर्तन कैंसर का कारण बन सकते हैं?

    टेफ्लॉन का सामान्य इस्तेमाल कैंसर होने का स्पष्ट प्रमाण नहीं है। हालांकि, बर्तन को ज्‍यादा गर्म करने पर इससे निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • क्या खरोंच वाले नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पकाना सुरक्षित है?

    अगर बर्तन की कोटिंग बुरी तरह उखड़ गई है या उसमें गहरी खरोंच है, तो उसे बदल दें। डैमेज कोटिंग से छोटे कण खाने में मिल सकते हैं और सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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  • Current Version

    Oct 15, 2026 15:59 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Arun Goel