आज के समय में ज्यादातर लोग ब्लड शुगर की समस्या से परेशान रहते हैं। इसमें अक्सर लोग हाई ब्लड शुगर की स्थिति पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन लो ब्लड शुगर पर ज्यादा किसी का ध्यान नहीं जाता है। शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिनमें ग्लूकोज सबसे जरूरी एनर्जी का सोर्स है, खासकर हमारे ब्रेन के ठीक से काम करने के लिए। ब्लड शुगर का स्तर नॉर्मल से कम होने पर शरीर की एनर्जी के कम होने के साथ-साथ सोचने समझने या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां होती हैं। ऐसे में आइए इस बारे में हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्णा मोहन रेड्डी (Dr. G. Krishna Mohan Reddy, Senior Consultant Physician and Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad) से जानें।
लो ब्लड शुगर क्या होता है?
डॉ. जी. कृष्णा मोहन रेड्डी के अनुसार, लो ब्लड शुगर, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया भी कहा जाता है, ऐसी स्थिति है जब ब्लड में ग्लूकोज का स्तर नॉर्मल लेवल से नीचे चला जाता है। ग्लूकोज ब्रेन के लिए एनर्जी का मेन सोर्स है। जब खून में ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है, तो ब्रेन को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।
क्या लो ब्लड शुगर से ब्रेन फॉग हो सकता है?
डॉ. जी. कृष्णा का कहना है, हां, जब ब्लड शुगर कम हो जाता है, तो कई लोगों को सोचने में परेशानी होने, ध्यान लगाने में परेशानी, याददाश्त के कमजोर होने और डिसीजन मेकिंग में देरी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इस स्थिति को आम भाषा में ब्रेन फॉग कहा जाता है। यह कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि ब्रेन को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल रही है। समय रहते ब्लड शुगर नॉर्मल होने पर ये लक्षण अक्सर ठीक हो जाते हैं।
साल 2026 में Journal of Cerebral Blood Flow & Metabolism में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ब्लड शुगर का बहुत कम होना (हाइपोग्लाइसीमिया), डायबिटीज के मरीजों में मानसिक क्षमता और याददाश्त की कमजोरी (cognitive decline) का एक बड़ा कारण है। वैसे तो शुगर अचानक कम होने से कुछ समय के लिए सोचने-समझने में परेशानी आती है, लेकिन अगर किसी का शुगर बार-बार और बहुत ज्यादा कम होता रहे, तो इससे दिमाग की बनावट में बदलाव आ सकता है, ब्रेन की नसें कमजोर हो सकती हैं और आगे चलकर याददाश्त हमेशा के लिए कमजोर हो सकती है।
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लो ब्लड शुगर में किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?
डॉ. जी. कृष्णा के अनुसार, ब्रेन फॉग के अलावा लो ब्लड शुगर के दौरान कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। लो ब्लड शुगर के कारण लोगों को अत्यधिक पसीना आने, शरीर का कांपना, चक्कर आना, तेज भूख लगना, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और दिल की धड़कन का तेज होना शामिल हैं।
अगर ब्लड शुगर और ज्यादा कम हो जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति को भ्रम यानी कन्फ्यूजन होने, बोलने में परेशानी होने, दौरे पड़ना या बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
CDC Diabetes के अनुसार, लो ब्लड शुगर के कारण व्यक्ति को चक्कर आने, कंपन होने, चलने और बात करने में परेशानी होने, याददाश्त से जुड़ी समस्याएं होने और मिर्गी के खतरे को बढ़ा सकता है और गंभीर स्थिति में व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।
किन लोगों में खतरा ज्यादा होता है?
डॉ. जी. कृष्णा बताते हैं, यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है, जिन्हें डायबिटीज है और जो इंसुलिन या कुछ खास ओरल दवाओं का सेवन करते हैं। अगर वे समय पर खाना नहीं खाते, नॉर्मल से ज्यादा एक्सरसाइज कर लेते हैं या दवा की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो लो ब्लड शुगर होने का खतरा बढ़ सकता है।
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लो ब्लड शुगर होने पर क्या करें?
डॉ. जी. कृष्णा के अनुसार, अगर लो ब्लड शुगर के लक्षण महसूस हों, तो सबसे पहले ब्लड शुगर की जांच करनी चाहिए। हल्के हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति में लगभग 15 से 20 ग्राम तेजी से असर करने वाले कार्बोहाइड्रेट का सेवन किया जा सकता है। इसके लिए ग्लूकोज टैबलेट, फलों का जूस या नॉर्मल मीठी ड्रिंक्स का सेवन किया जा सकता है। इसके लगभग 15 मिनट बाद दोबारा ब्लड शुगर की जांच करनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि ब्लड शुगर का स्तर नॉर्मल हो रहा है।
लो ब्लड शुगर से राहत और ब्रेन को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
CDC Diabetes के अनुसार, ब्रेन को स्वस्थ रखने और लो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए हेल्दी डाइट लें, नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करें, स्वस्थ वजन बनाए रखें, नियमित एक्सरसाइज करें, स्मोंकिग न करें, स्ट्रेस मैनेज करें और डॉक्टर की सलाह अनुसार समय से दवाइयों का सेवन करें।
बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
डॉ. जी. कृष्णा के अनुसार, बार-बार लो ब्लड शुगर होना नॉर्मल बात नहीं है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि डायबिटीज के इलाज या दवाओं में बदलाव की जरूरत है। इसलिए टाइम से खाना खाने, नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करना, अपने साथ हमेशा चीनी या ग्लूकोज का कोई क्विक सोर्स रखना और डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज का पालन करना बेहद जरूरी है। सही डेली रूटीन को अपनाकर इस समस्या के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डायबिटीज को अच्छी तरह मैनेज करने का मतलब सिर्फ हाई ब्लड शुगर से बचना नहीं है, बल्कि ब्रेन के कामकाज और सेहत को सेफ रखने के लिए लो ब्लड शुगर से बचना भी उतना ही जरूरी है।
निष्कर्ष
लो ब्लड शुगर के कारण व्यक्ति को कमजोरी होने, चक्कर आने के साथ-साथ इसके कारण ब्रेन के कार्यों पर भी बुरा असर होता है। लो ब्लड शुगर के कारण व्यक्ति को ब्रेन फॉग, कम पर फोकस करने में परेशानी होने और याददाश्त में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए ब्लज शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें और मीठे के इंस्टेंट सोर्स को अपने साथ रखें। ध्यान रहे, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
लो ब्लड शुगर के क्या लक्षण है?
ब्लड शुगर का स्तर कम होने पर व्यक्ति को घबराहट होने, चक्कर आने, कमजोरी होने, हाथों-पैरों के कांपने, ज्यादा भूख लगने, अचानक से पसीना आने, घबराहट होने और बैचेनी होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।ब्रेन फॉग के लक्षण क्या हैं?
ब्रेन फॉग की समस्या होने पर व्यक्ति को काम पर फोकस करने में परेशानी होने, भ्रम होने, याददाश्त कमजोर होने, मेंटली थकान महसूस होने और सिर भारी होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Current Version
Jul 29, 2026 10:41 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. G. Krishna Mohan Reddy
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