अक्सर महिलाएं महसूस करती हैं कि महीने के कुछ दिनों में उन्हें ज्यादा भूख लगती है, तो कभी मीठे की क्रेविंग बहुत ज्यादा होती है। कभी-कभी तो कुछ भी खाने का मन नहीं करता है, जिससे मूड स्विंग भी होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं को यह समझ नहीं आता है कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है? कुछ महिलाएं इसे हार्मोनल बदलाव से जोड़कर देखती हैं। इस लेख में हम यही समझेंगे कि क्या वाकई महिलाओं में भूख प्रभावित होने का एक कारण हार्मोनल बदलाव है? इस बारे में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF And Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की है।
क्या महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भूख प्रभावित करती है?
-1779252936552.jpg)
हार्मोनल बदलाव महिलाओं के शरीर में कई तरह के परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसे भूख से भी जोड़कर देखा जा सकता है। डाॅ. शोभा गुप्ता इसे विस्तार से समझाती हैं-
मेंस्ट्रुअल साइकिलः महिलाओं में पीरियड्स की वजह से हार्मोनल बदलाव होता है। जैसे पीरियड्स शुरू होने से पहले शरीर में प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे भूख अपने आप बढ़ जाती है।
गर्भावस्था के दौरानः इसमें कोई दो राय नहीं है कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी में बहुत भूख लगती है। ऐसा गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। डाॅ. शोभा गुप्ता की मानें, तो प्रेग्नेंसी में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। पहली तिमाही में इसके कारण उल्टी और जी मिचलाने की समस्या होती है, जिससे भूख कम हो जाती है। हालांकि, दूसरी और तीसरी तिमाही में शिशु के विकास के लिए भूख काफी बढ़ जाती है।
इसे भी पढ़ें: महिलाओं में हार्मोनल बदलाव क्यों होते हैं? डॉक्टर से जानें कारण
मेनोपॉजः जब पीरियड्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तो उसे मेनोपॉज की अवस्था कहा जाता है। इस दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर काफी गिर जाता है। एस्ट्रोजन कम होने से पेट भरे होने का संकेत देने वाले लेप्टिन हार्मोन का असर कम हो जाता है और भूख बढ़ाने वाले घ्रेलिन का स्तर अनियंत्रित हो जाता है। इस वजह से महिलाओं को बार-बार भूख लगती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है।
तनावः अगर कोई महिला लंबे समय से तनाव में है, तो इसकी वजह से कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन तेजी से रिलीज होता है। यह हार्मोन सीधे तौर पर महिला में भूख बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। इसे ही हम इमोशनल ईटिंग के नाम से जानते हैं।
इसे भी पढ़ें: हार्मोन इंबैलेंस की वजह से हो सकती हैं कई बीमारियां, एक्सपर्ट से जानें इन्हें बैलेंस करने का तरीका
निष्कर्ष
महिलाओं में हार्मोनल बदलाव सीधे तौर पर उनकी भूख को प्रभावित करता है। हालांकि, हार्मोनल बदलाव होने के पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज और तनाव। हार्मोनल बदलाव को संतुलित करने के लिए जरूरी है कि महिलाएं संतुलित आहार लें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और तनाव को मैनेज करने की कोशिश करें।
All Image Credit: Freepik
FAQ
पीरियड्स से पहले मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग क्यों होती है?
पीरियड्स से पहले प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने और सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) का स्तर गिर जाने के कारण ऐसा होता है।क्या मेनोपॉज के बाद भूख बढ़ने से वजन को नियंत्रित किया जा सकता है?
मेनोपॉज के बाद महिलाओं को डाइट पर ध्यान देना चाहिए। वजन कम करने के लिए फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डाइट लें, पर्याप्त पानी पिएं और रेगुलर एक्सरसाइज करें।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
May 20, 2026 10:27 IST
Modified By : Meera Tagore May 20, 2026 10:27 IST
Modified By : Meera TagoreMay 20, 2026 10:27 IST
Modified By : Meera TagoreMay 20, 2026 10:27 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta