Thu Oct 8, 2026 | 02:48 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shibal Bhartiya , Clinical Director – Ophthalmology, Marengo Asia Hospitals, Gurugram

क्या आंखों का कैंसर ठीक हो सकता है? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

आंखों के कैंसर के कई मामलों में इलाज संभव हो सकता है, लेकिन इसका रिजल्ट कैंसर के प्रकार, स्टेज और शरीर में फैलाव पर निर्भर करता है। यहां डॉक्टर से जानिए, क्या आंखों का कैंसर ठीक हो सकता है?
क्या आंखों का कैंसर ठीक हो सकता है? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टरक्या आंखों का कैंसर ठीक हो सकता है? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

आंखों में होने वाला कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसका इलाज संभव नहीं है। गुरुग्राम के Marengo Asia Hospital में ऑप्थल्मोलॉजी की क्लिनिकल डायरेक्टर, ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों के कैंसर में बीमारी किस प्रकार की है, ट्यूमर कितना बड़ा है, आंख के किस हिस्से में है और शरीर के दूसरे अंगों तक फैला है या नहीं, इन सभी बातों का इलाज और मरीज के बचने की संभावना पर सीधा असर पड़ता है। खासतौर पर बच्चों में आंखों के कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो जाए, इलाज का रिजल्ट उतना बेहतर हो सकता है। डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों के कैंसर में सबसे जरूरी बात समय पर पहचान है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में कई मामलों में दर्द जैसे लक्षण नहीं होते, इसलिए आंख में कोई नया या असामान्य बदलाव दिखने पर जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

क्या आंखों का कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?

ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों के कैंसर के इलाज (Eye cancer treatment) का रिजल्ट काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज में पहचाना गया है और क्या वह आंख के बाहर फैल चुका है। वयस्कों में आंखों का कैंसर आंख के अंदर, आंख की सतह या पलकों के आस-पास विकसित हो सकता है। आंख के अंदर होने वाले कैंसर में यूवेल मेलानोमा (Uveal Melanoma) प्रमुख प्रकार है।

इसका इलाज ट्यूमर के आकार, उसकी जगह और कैंसर के शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है। छोटे ट्यूमर में रेडिएशन, जैसे प्लाक ब्रैकीथेरेपी या कुछ मामलों में लेजर जैसी टेक्नीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन उपचारों का उद्देश्य केवल ट्यूमर को कंट्रोल करना ही नहीं, बल्कि रोशनी और आंख को बचाए रखना भी होता है।

  • आंखों के कैंसर में सर्वाइवल हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं होता। डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, छोटे यूवेल मेलानोमा का रेडिएशन या लेजर से इलाज किए जाने पर पांच साल में लगभग 80 प्रतिशत मरीजों के जीवित रहने की संभावना बताई जाती है।
  • अगर कैंसर आंख से बाहर फैलकर शरीर के दूसरे हिस्सों, खासकर लिवर तक पहुंच जाए, तो स्थिति काफी गंभीर हो जाती है और इलाज मुश्किल हो सकता है।
  • इसलिए ट्यूमर का आकार, उसकी लोकेशन और कैंसर का शरीर में फैलाव इलाज के रिजल्ट को प्रभावित करने वाले कारक हैं।

NIH के Center for Cancer Genomics में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, यूवेल मेलानोमा आंखों के कैंसर का एक दुर्लभ लेकिन वयस्कों में सबसे आम प्रकार है, जो आंख की मध्य परत (यूविया) की पिगमेंट सेल्स में विकसित होता है। नीली या हल्की आंखें और ज्यादा उम्र वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

शुरुआती ट्यूमर का इलाज संभव है, लेकिन जब यह कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है (मेटास्टेटिक), तो स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है और अधिकांश मरीज एक साल के भीतर जान गंवा देते हैं। इस दुर्लभ कैंसर के कारणों और इलाज को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा लगातार रिसर्च की जा रही हैं।

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बच्चों में आंखों का कैंसर कौन सा होता है?

ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. शिबल भारतीय बताती हैं कि बच्चों में आंखों का सबसे प्रमुख कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा होता है। यह आंख के रेटिना में विकसित होने वाला कैंसर है और कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। अगर इसे उस समय पहचान लिया जाए जब कैंसर अभी आंख के अंदर ही सीमित है, तो 95 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों के जीवित रहने की संभावना होती है। इतना ही नहीं, शुरुआती अवस्था में इलाज शुरू होने पर कई मामलों में आंख को भी बचाया जा सकता है। इसलिए बच्चों की आंखों में होने वाले छोटे बदलावों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

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  • बच्चे की आंख की पुतली में सफेद चमक या सफेद प्रतिबिंब दिखाई देना आंखों के कैंसर का लक्षण (Eye cancer symptoms) हो सकता है।
  • यह खासकर फ्लैश वाली फोटो में नजर आ सकता है। इसके अलावा बच्चे में अचानक भेंगापन यानी आंखों का एक दिशा में ठीक से न देखना या आंख के रंग में नया बदलाव भी ध्यान देना चाहिए।
  • ऐसे लक्षण दिखने पर यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी।
  • बच्चे की आंखों की तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, क्योंकि शुरुआती पहचान से इलाज के बेहतर हो सकता है।

साल 2021 में Cancers जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, बच्चों में होने वाले आंख के ट्यूमर (जैसे रेटिनोब्लास्टोमा) अक्सर दुर्लभ अनुवांशिक कारणों से जुड़े होते हैं। जर्मनी और ऑस्ट्रिया में रेटिनोब्लास्टोमा के ज्यादातर बच्चों की नियमित जेनेटिक काउंसलिंग की जाती है, लेकिन बच्चों में अन्य आंखों के ट्यूमर बहुत दुर्लभ हैं और इनके अनुवांशिक कारणों की जानकारी कम होती है। यही कारण है कि बचपन में आंख के ट्यूमर से पीड़ित सभी मरीजों की जेनेटिक काउंसलिंग जरूर कराई जानी चाहिए।

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आंखों का कैंसर दर्द के बिना भी हो सकता है?

ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों के कैंसर को लेकर एक बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में हमेशा दर्द हो, ऐसा जरूरी नहीं है। यही कारण है कि लोग आंख में होने वाले बदलावों को गंभीरता से नहीं लेते और इलाज में देरी हो सकती है। बच्चों में पुतली का सफेद दिखाई देना, भेंगापन या आंख के रंग में बदलाव और वयस्कों में आंख के आस-पास नया उभार, गांठ या मस्से जैसी बढ़ोतरी दिखाई दे तो आंख के डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

निष्कर्ष

आंखों का कैंसर हमेशा लाइलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर पहचान और इलाज से कई मरीजों में कैंसर को कंट्रोल किया जा सकता है और कुछ मामलों में आंख तथा दृष्टि यानी विजन को भी बचाया जा सकता है। इसलिए आंख की पुतली में सफेद चमक, अचानक होने वाला भेंगापन, आंख के रंग में बदलाव या आंख के आस-पास नई बढ़ोतरी को नजरअंदाज न करें और जल्द से जल्द आई एक्सपर्ट से संपर्क करें।

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FAQ

  • क्या आंखों के कैंसर के इलाज में आंख निकाली जाती है?

    हर मरीज में आंख निकालने की जरूरत नहीं होती है। बीमारी के प्रकार, आकार और उसकी अवस्था के आधार पर अलग-अलग इलाज होते हैं।
  • आंखों का कैंसर किन लोगों को हो सकता है?

    आंखों का कैंसर बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकता है। बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा और वयस्कों में अलग-अलग प्रकार के आंखों के ट्यूमर देखे जाते हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 08, 2026 12:35 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shibal Bhartiya