Tue Sep 29, 2026 | 02:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Mandeep Singh Malhotra , Surgical & Molecular Oncologist | Founder & Chief Mentor – Art of Healing Cancer

मोटे लोगों को क्यों ज्यादा होता है कैंसर का खतरा? बता रहे हैं डॉक्टर

मोटापा सिर्फ दिल की बीमारी या डायबिटीज से ही नहीं, बल्कि कैंसर का भी एक प्रमुख कारण है। डॉक्टर के अनुसार, शरीर में सूजन, हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन का बढ़ना कैंसर कोशिकाओं को बढ़ावा देता है, जिससे कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
मोटे लोगों को क्यों ज्यादा होता है कैंसर का खतरा? बता रहे हैं डॉक्टरमोटे लोगों को क्यों ज्यादा होता है कैंसर का खतरा? बता रहे हैं डॉक्टर

जब भी मोटापे की बात आती है, तो लोग इसे सिर्फ दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या टाइप-2 डायबिटीज से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, आज के समय में कैंसर होने का एक सबसे बड़ा कारण मोटापा माना जाता है। मोटापा और कैंसर का आपस में गहरा कनेक्शन है। ज्यादा वजन होने से शरीर के अंदर कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जिससे कैंसर सेल्स आसानी से बढ़ने लगती हैं। शरीर में लगातार रहने वाली सूजन, हार्मोन्स का असंतुलन और शुगर का लेवल बढ़ना इसके कारण हैं। ऐसे में आइए इस लेख में विस्तार से Dr R K Choudhary, Oncologist - Metro Cancer Institute, Noida और Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से जानते हैं कि मोटे लोगों को कैंसर का खतरा क्यों ज्यादा होता है?

मोटापा कैसे शरीर में कैंसर का कारण बनता है?

डॉक्टर्स का कहना है कि शरीर में जमा ज्यादा फैट सिर्फ इनएक्टिव फैट नहीं है, बल्कि यह एक एक्टिव एंडोक्राइन ऑर्गन की तरह काम करती है। यह लगातार ऐसे हार्मोन्स और केमिकल रिलीज करती है, जो हेल्दी सेल्स को कैंसर वाले केमिकल में बदल सकते हैं।

1. शरीर के अंदर लगातार रहने वाली सूजन

जब शरीर में फैट बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो चर्बी के सेल्स को सही तरह से ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और वे मरने लगती हैं। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है और फैट वाली जगह पर सूजन पैदा करने वाले केमिकल रिलीज होने लगते हैं। यह हल्की-फुल्की सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, जो सेल्स के DNA को नुकसान पहुंचाकर कैंसर बनने की शुरुआत कर देती है।

इसे भी पढ़ें: कैंसर से बचना है तो रोजमर्रा की आदतों में करें ये 5 बदलाव, डॉक्टर ने दी सलाह

2. हार्मोन्स का असंतुलन, खासकर एस्ट्रोजन

महिलाओं में पीरियड्स बंद होने के बाद ओवरी एस्ट्रोजन हार्मोन बनाना बंद कर देती है, लेकिन शरीर की चर्बी वाले सेल्स एक खास एंजाइम की मदद से खुद ही एस्ट्रोजन बनाने लगते हैं। ऐसे में जरूरत से ज्यादा एस्ट्रोजन हार्मोन बच्चेदानी और ब्रेस्ट के सेल्स को बहुत तेजी से बढ़ने के लिए उकसाता है, जिससे ब्रेस्ट और यूट्रस कैंसर का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

3. इंसुलिन और इंसुलिन-लाइक ग्रोथ फैक्टर (IGF-1) का बढ़ना

मोटापे के कारण शरीर इंसुलिन को ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता है, जिससे पैंक्रियाज को खून की शुगर को कंट्रोल करने के लिए बहुत ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। खून में इंसुलिन और ग्रोथ फैक्टर्स का लेवल बहुत हाई हो जाता है, जो सेल्स को बहुत तेजी से बांटता है और पुरानी खराब सेल्स को मरने नहीं देता है। यह स्थिति आंतों, लिवर, किडनी और पैंक्रियाज के कैंसर का कारण बनती है।

4. फैट सेल्स से निकलने वाले हार्मोन्स

हमारे शरीर की चर्बी मुख्य रूप से दो तरह के हार्मोन बनाती है- लेप्टिन और एडिपोनेक्टिन। मोटे लोगों में लेप्टिन (जो सेल्स को बढ़ाता है) बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और एडिपोनेक्टिन (जो कैंसर से लड़ता है और सूजन रोकता है) बहुत कम हो जाता है। यह गड़बड़ी ट्यूमर यानी कैंसर को तेजी से बढ़ाने में मदद करती है।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2023 में Cancers जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, "मोटापा दुनिया भर में स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है। इसका कनेक्शन कई गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों और कई तरह के कैंसर से है, जिससे बीमारी और मौत का खतरा बढ़ जाता है। मोटापे से कैंसर होने की असल वजह अभी पूरी तरह समझ नहीं आई है, लेकिन इसमें एडिपोकाइन्स, सूजन, एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स में बदलाव, फैटी एसिड मेटाबॉलिज्म में बदलाव और इंसुलिन जैसे ग्रोथ फैक्टर और एस्ट्रोजन का निकलना शामिल है।"

Excess-Weight-Increase-Risk-of-CancerExcess-Weight-Increase-Risk-of-Cancer

मोटापे से जुड़े कैंसर

Dr R K Choudhary ने बताया कि ज्यादा वजन और बीएमआई (BMI > 25/30) का बढ़ना कई तरह के कैंसर के खतरे से सीधा जुड़ा हुआ है। इनमें शामिल हैं-

  • ब्रेस्ट कैंसर
  • गर्भाशय या एंडोमेट्रियल कैंसर
  • बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर
  • लिवर कैंसर
  • किडनी कैंसर
  • अग्न्याशय का कैंसर
  • भोजन नली का कैंसर
  • पित्ताशय का कैंसर
  • पेट का ऊपरी कैंसर
  • अंडाशय का कैंसर
  • थायराइड का कैंसर
  • मेनिंजियोमा (दिमाग की झिल्ली का ट्यूमर)
  • मल्टीपल मायलोमा

इसे भी पढ़ें: कैंसर के इलाज के दौरान लगातार रहने वाली थकान से कैसे निपटें? बता रहे हैं डॉक्टर

क्या मोटापा कैंसर के इलाज को भी प्रभावित करता है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि मोटापा कैंसर के इलाज को प्रभावित कर सकता है।

  • फैट की मोटी परत के कारण शुरुआती लेवल पर गांठों या बदलावों को महसूस करना या स्कैन में देखना मुश्किल हो जाता है।
  • कीमोथेरेपी की डोज तय करना मुश्किल होता है और सर्जरी के दौरान या बाद में इंफेक्शन व घाव भरने में समय लगता है।
  • कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद भी अगर वजन अनियंत्रित रहता है, तो कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा ज्यादा रहता है।

मोटापे के कारण कैंसर के खतरे को कैसे कम करें?

Dr. Mandeep Singh Malhotra के अनुसार, अगर आप अपने शरीर के वजन का सिर्फ 5% से 10% हिस्सा भी घटा लेते हैं, तो शरीर में इंफ्लेमेशन, इंसुलिन और एस्ट्रोजन का लेवल तेजी से कम होने लगता है, जिससे कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

इसके साथ ही, अपनी डाइट में प्रोसेस्ड फूड और मीठा लेना बंद करें। इसके स्थान पर फाइबर और प्लांट-बेस्ड डाइट की मात्रा बढ़ाएं। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट हल्की एक्सरसाइज करें।

निष्कर्ष
मोटापा सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी सिस्टम में गंभीर असंतुलन पैदा करने वाली एक मेडिकल स्थिति है। इसलिए, आज से ही अपनी लाइफस्टाइल में छोटा सा सुधार करें और अपने वजन को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें, ताकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सके।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • मोटापा बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है?

    वजन बढ़ने से टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।
  • कैंसर होने पर शरीर क्या संकेत देता है?

    शरीर में कैंसर के सामान्य और शुरुआती लक्षणों में बिना कारण वजन कम होना, ज्यादा थकान और शरीर में कोई गांठ या सूजन होना शामिल है।

Read Next

→ Women Heart Attack Symptoms: पुरुषों से अलग क्यों होते हैं महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण? डॉक्टर से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 29, 2026 12:57 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra