Thu Nov 5, 2026 | 07:27 PM IST

Medically Reviewed by Dr Ujjawal Kumar , Senior Consultant - Cardiology at the Sarvodaya Hospital, Faridabad

क्या खेलते-खेलते 9-10 साल के बच्चे को भी आ सकता है कार्डियक अरेस्ट? डॉक्टर से जानें दिल की बीमारियों के 5 संकेत

हाल ही में स्कूल में खेलने के बाद एक 9 साल की बच्ची क्लास में आकर अचानक गिर गई और जब अस्पताल में पहुंचाया गया, तब तक उसकी मृत्यु हो गई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 9-10 साल के बच्चों को कार्डियक अरेस्ट आ सकता है? जानने के लिए यह लेख पढ़ें।   
क्या खेलते-खेलते 9-10 साल के बच्चे को भी आ सकता है कार्डियक अरेस्ट? डॉक्टर से जानें दिल की बीमारियों के 5 संकेतक्या खेलते-खेलते 9-10 साल के बच्चे को भी आ सकता है कार्डियक अरेस्ट? डॉक्टर से जानें दिल की बीमारियों के 5 संकेत

हाल ही में दिल्ली की 9 साल की तीसरी क्लास की बच्ची गेम के पीरियड के बाद जब क्लास में आई, तो अचानक गिरकर बेहोश हो गई। स्कूल प्रशासन उसे लेकर अस्पताल गया, तो उसे मृत घोषित कर दिया गया। स्कूल प्रशासन का कहना है कि बच्ची को कार्डियक अरेस्ट आया था और इस वजह से उसकी मौत हो गई। ऐसे मामले जब सामने आते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या छोटे बच्चों को भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है? इस बारे में हमने Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant - Cardiology, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट आ सकता है, लेकिन इसका कारण जन्मजात हार्ट से जुड़ा, दिल की मांसपेशियों का कमजोर होना या फिर धड़कनों में गड़बड़ी हो सकती है।

खेलते समय बच्चों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा क्यों हो सकता है?

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “खेलकूद के दौरान बच्चे का शरीर ज्यादा एक्टिव होता है। इस समय हार्ट की बीट और ब्लड पंप करने की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसी कंडीशन में अगर बच्चे को पहले से दिल की मांसपेशियों या धड़कनों से जुड़ी कोई समस्या है, तो फिजिकल एक्टिविटीज के दौरान असामान्य धड़कन की स्थिति पैदा हो सकती है। अगर किसी बच्चे को हार्ट से जुड़ी समस्याएं होती हैं, तो उन्हें हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट होने का रिस्क हो सकता है।”

9 से 10 साल के बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट होने के क्या कारण हैं?

CDC के मुताबिक, बच्चों में कार्डियक अरेस्ट के कई कारण हो सकते हैं। इसमें हार्ट में इंफेक्शन, गंभीर फिजिकल ट्रॉमा, जन्मजात समस्या और स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज शामिल हैं।

Dr. Ujjawal Kumar ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में अचानक हार्ट पंप करना बंद कर सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं।

  1. जन्मजात हार्ट रोग - कुछ बच्चों में दिल से जुड़ी समस्या जन्म से ही मौजूद होती है। जन्मजात हार्ट की बनावट प्रभावित हो सकती है। इस कंडीशन में हार्ट के सामान्य फंक्शन पर पड़ सकता है।
  2. दिल की मांसपेशियों की बीमारी - कार्डियोमायोपैथी में दिल की मांसपेशियों में बदलाव होने लगता है। मांसपेशियां मोटी, कमजोर या सख्त हो सकती हैं, जिससे हार्ट के रक्त पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है। कुछ बच्चों में इस बीमारी के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ कंडीशन में यह गंभीर हार्ट की समस्या का कारण बन सकती है।
  3. दिल की धड़कनों में गड़बड़ी (Arrhythmia) - हार्ट बीट को कंट्रोल करने वाले इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी होने पर धड़कन बहुत तेज, धीमी या अनियमित हो सकती है। इससे अचानक कार्डियक अरेस्ट का रिस्क बढ़ा सकती हैं।
  4. आनुवंशिक दिल से जुड़ी बीमारियां - कुछ हार्ट से जुड़ी समस्याओं का कारण फैमिली हिस्ट्री भी हो सकती है। इस वजह से परिवार में कम उम्र में अचानक मृत्यु हो सकती है। ऐसे मामलों में समय पर रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए।

 Warning Signs of Sudden Cardiac Arrest in ChildrenWarning Signs of Sudden Cardiac Arrest in Children

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बच्चों में कार्डियक अरेस्ट से पहले कौन-से संकेत दिखाई दे सकते हैं?

Dr. Ujjawal Kumar ने कहा कि कुछ बच्चों में कार्डियक अरेस्ट से पहले कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। वहीं, कुछ बच्चों में लक्षण साफ दिखाई देने लगते हैं। पेरेंट्स को इन खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  1. अगर बच्चा खेलते समय या फिजिकल एक्टिविटी के दौरान अचानक बेहोश हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  2. बच्चे को खेलते समय या गतिविधि के दौरान सीने में दर्द हो, तो इसे सिर्फ थकान न समझें, बल्कि डॉक्टर से सलाह लें।
  3. खेलते समय बच्चे को असामान्य रूप से सांस फूलने लगे या अचानक बहुत कमजोरी महसूस हो, तो यह भी ध्यान देने वाला संकेत है।
  4. अगर बच्चा बताता है कि उसका दिल बहुत तेज धड़क रहा है या धड़कन अजीब लग रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।
  5. बच्चा कोई रिस्पांस न करें और उसकी पल्स न समझ आए, तो तुरंत CPR देना चाहिए और इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

बच्चे को अचानक कार्डियक अरेस्ट आए तो क्या करें?

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं कि अगर बच्चा अचानक गिर जाए, कुछ जवाब न दे और सही तरीके से सांस न ले पा रहा हो, तो तुरंत इमरजेंसी में अस्पताल लेकर जाना चाहिए।

  • बच्चे को तुरंत CPR देना शुरू कर देना चाहिए।
  • बच्चे की उम्र के अनुसार छाती पर प्रेशर और सांस देने की प्रक्रिया करनी चाहिए।
  • आसपास AED (Automated External Defibrillator) हो, तो उसका जल्दी इस्तेमाल करना चाहिए।
  • बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

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निष्कर्ष
दिल्ली में बच्ची के मामले में पेरेंट्स का आरोप है कि परिवार का आरोप है कि स्कूल ने समय पर CPR नहीं दिया गया। इसलिए कार्डियक अरेस्ट में बच्चों को सही समय पर CPR देना जरूरी है। अगर परिवार में फैमिली हिस्ट्री है, तो जन्म के बाद बच्चों के हार्ट का रेगुलर चेकअप कराना चाहिए।

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FAQ

  • क्या वायरल बुखार या गले के इंफेक्शन के बाद बच्चे का दिल कमजोर हो सकता है?

    कभी-कभी सामान्य फ्लू या अन्य वायरल संक्रमण के बाद वायरस दिल की मांसपेशियों में सूजन पैदा कर देता है। अगर बच्चा बुखार ठीक होने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा खेलकूद या फिजिकल स्ट्रेस लेता है, तो हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का रिस्क बढ़ सकता है। 
  • क्या स्कूल और स्पोर्ट्स क्लब में शामिल होने से पहले बच्चों का कार्डियक चेकअप जरूरी है?

    प्रिपार्टिसिपेशन कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग (Pre-participation Screening) बेहद जरूरी है। बच्चे की मेडिकल फैमिली हिस्ट्री, पल्स, बीपी चेकअप और बेसिक ईसीजी कराना जरूरी है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 05, 2026 18:33 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar