हिंदी फिल्मों के एक्टर नाना पाटेकर के कार्डियक अरेस्ट से निधन की खबर ने एक बार फिर से यह चर्चा शुरू कर दी है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट (difference between cardiac arrest and heart attack) में क्या फर्क हो सकता है। अक्सर लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों ही कंडीशन अलग-अलग होती है। नाना पाटेकर के मामले में यह भी कहा गया है कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तो करीब 45 मिनट तक CPR दिया गया, लेकिन देरी होने के कारण CPR ने काम नहीं किया। इस बारे में हमने Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant, Cardiology, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि दोनों स्थितियां अलग हैं, हालांकि कई मामलों में हार्ट अटैक आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है और कार्डियक अरेस्ट के मरीज को CPR जल्दी देना बहुत जरूरी है।
हार्ट अटैक क्या है?
American Heart Association के अनुसार, हार्ट अटैक होने का कारण दिल की किसी धमनी में ब्लॉकेज हो सकता है और इस वजह से हार्ट के एक हिस्से तक खून ठीक से नहीं पहुंच पाता है। अगर समय रहते ब्लॉक धमनी को न खोला जाए, तो उस हिस्से की हार्ट मसल को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है।
Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “हार्ट अटैक के लक्षण कभी इतने हल्के होते हैं कि मरीज को हार्ट अटैक का पता ही नहीं चलता। कई मामलों में मरीज को सीने में दर्द, घबराहट, पसीना, सांस फूलना या बाएं हाथ व जबड़े में दर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। ऐसे मरीज अक्सर होश में रहते हैं और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। हार्ट अटैक के दौरान आमतौर पर मरीज की हार्ट बीट चलती रहती है।”
कार्डियक अरेस्ट क्या है?
American Heart Association के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट अचानक हो सकता है और कई बार इसके लक्षण भी महसूस नहीं होते। इस कंडीशन में हार्ट के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में समस्या आने के कारण धड़कन का रिदम बिगड़ जाता है। इस वजह से हार्ट शरीर के जरूरी अंगों जैसे कि दिमाग और फेफड़ों तक पर्याप्त खून पहुंचाना बंद कर देता है। इस कंडीशन में मरीज कुछ सेकंड में बेहोश होकर गिर सकता है और उसकी पल्स महसूस नहीं हो सकती। अगर तुरंत मदद न मिले, तो स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
cpr in cardiac arrest
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कार्डियक अरेस्ट में CPR क्यों जरूरी हो जाती है?
Dr. Ujjawal Kumar ने कहा, “अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट आ जाए, तो बिना देरी CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) शुरू करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। CPR में छाती पर सही स्पीड और गहराई से दबाव देने से दिमाग और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक कुछ मात्रा में ब्लड पहुंचता रहता है, जिससे मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती है। अगर आस-पास AED (Automated External Defibrillator) हो, तो एक्सपर्ट द्वारा इसका इस्तेमाल करें। इस वजह से कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में CPR को शुरुआत में बहुत जरूरी माना जाता है।”
तुरंत CPR देने के फायदे
Dr. Ujjawal Kumar के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट में CPR देने के कई फायदे होते हैं और सबसे जरूरी कि इसमें मरीज की जान बच सकती है।
- CPR शरीर में ब्लड फ्लो बनाए रखने में मदद करती है, जिससे मरीज के जरूरी अंगों को खून और ऑक्सीजन मिल सकता है।
- कार्डियक अरेस्ट में दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। इस दौरान छाती पर दबाव देकर ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
- कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद CPR देने से मरीज की जान बचने का चांस बढ़ सकता है।
- कई कार्डियक अरेस्ट में दिल की सामान्य रिदम वापस लाने के लिए डिफिबरलेटर की जरूरत पड़ सकती है। CPR तब तक सर्कुलेशन बनाए रखने में मदद करती है।
- कार्डियक अरेस्ट कहीं भी हो सकता है। ऐसे में CPR मिल जाए, तो मेडिकल टीम आने से पहले ही मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
नाना पाटेकर के मामले में CPR अस्पताल में दिया गया और देरी की वजह से उनकी जान बचाना मुश्किल हो गया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट की पहचान होने के बाद अगर तुरंत CPR दे दिया जाए, तो मरीज के बचने के चांस बढ़ सकते हैं। इसलिए अगर कोई अचानक से गिर जाए या वह सामान्य सांस न ले रहा हो, तो उसे तुरंत CPR देना चाहिए।
FAQ
क्या बिना ट्रेनिंग के भी कोई साधारण इंसान इमरजेंसी में CPR दे सकता है?
इमरजेंसी में अप्रशिक्षित व्यक्ति भी 'हैंड्स-ओनली सीपीआर' (Hands-Only CPR) आसानी से दे सकता है। इसमें मुंह से सांस देने की जरूरत नहीं होती; बस मरीज की छाती के केंद्र में तेजी से और जोर-जोर से दबाते रहें।कार्डियक अरेस्ट के बाद दिमाग कितने मिनट में काम करना बंद कर देता है?
दिल की धड़कन रुकने के 3 से 5 मिनट के अंदर ऑक्सीजन न मिलने से दिमाग की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। 8 से 10 मिनट तक कोई मदद या CPR न मिलने पर स्थिति जानलेवा हो सकती है।
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Oct 08, 2026 11:58 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar
