प्रेग्नेंसी के दौरान अक्सर महिलाओं को स्वास्थ्य और खान-पान का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स में बदलाव आने, थकान, कमर दर्द, पैरों में भारीपन और मांसपेशियों में खिंचाव होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में आयुर्वेद में प्रेग्नेंसी के दौरान अभ्यंग मसाज की जा सकती है। इससे स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं। आइए इस बारे में आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (Ayurvedic Dr. Chanchal Sharma, Director and Gynecologist, Asha Ayurveda) से जानें।
प्रेग्नेंसी के दौरान अभ्यंग के फायदे
डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान तेल मालिश करने को अभ्यंग कहा जाता है। इससे स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं, लेकिन इस दौरान कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है।
1. ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करे
प्रेग्नेंसी के दौरान तेल से मसाज करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद मिलती है। ऐसा करने से शरीर को रिलैक्स करने, ब्लड फ्लो को बेहतर करने, ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित करने, मांसपेशियों की ऐंठन और दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे स्ट्रेस को कम करने और ब्रेन को रिलैक्स करने में भी मदद मिल सकती है।
2. त्वचा को नमी दे
प्रेग्नेंसी के दौरान अभ्यंग करने से स्किन को गहराई से हाइड्रेट करने, स्किन की इलास्टिसिटी में सुधार करने, ड्राइनेस को कम करने, खुजली कम करने, स्ट्रेच मार्क्स के कारण होने वाली परेशानी को कम करने और स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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3. हार्मोन्स को बैलेंस करे
प्रेग्नेंसी में तेल की मालिश करने से शरीर में हार्मोनल बदलावों को बैलेंस करने, कोर्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित करने और स्ट्रेस को कम करने में मदद मिल सकती है। यह ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद है।
benefits of ayurvedic abhyanga massage during pregnancy 01
4. नींद और मूड को बेहतर करे
इस दौरान अभ्यंग से नर्वस सिस्टम के कार्यों को बेहतर करने, एंग्जायटी के स्तर को कम करने, नींद की गुणवत्ता में सुधार करने और एंग्जायटी को कम करने में मदद मिल सकती है।
5. वात दोष को बैलेंस करे
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर की तेल मालिश करने से वात दोष के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इससे वात दोष के असंतुलित होने के कारण होने वाली अनिद्रा, ड्राइनेस और रेस्टलेस जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिल सकती है।
6. शरीर का दर्द कम करे
हल्के गर्म तेल से मालिश करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने के साथ-साथ कमर दर्द, साइटिका से राहत, सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है।
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7. पाचन के लिए फायदेमंद
प्रेग्नेंसी में हल्के गर्म तेल से मालिश करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने के साथ शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिल सकती है।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2011 में Journal of Alternative and Complementary Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अभ्यंग मसाज करना मानसिक और शारीरिक तनाव (subjective stress experience) को काफी हद तक कम करने में सहायक है। यह हार्ट रेट (heart rate) को कम करने और ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने में मदद करता है।
अभ्यंग करने से क्या होता है?
डॉ. चंचल बताती हैं, अभ्यंग की प्रक्रिया हल्के गर्म तेल से की जा सकती है। इससे मांसपेशियों को रिलैक्स करने, नसों को रिलैक्स करने और स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद मिल सकती है।
सावधानियां
डॉ. चंचल के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान अभ्यंग की प्रक्रिया ट्रेंड आयुर्वेदिक थेरेपिस्ट से ही कराएं, पहले ट्राइमेस्टर के दौरान इसको करने से बचें, प्रेग्नेंसी में कंप्लीकेशन्स के दौरान भी इससे बचें।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी के दौरान अभ्यंग करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने, त्वचा में नमी बनाए रखने, शरीर में हार्मोन्स को बैलेंस करने, वात दोष को बैलेंस करने, नींद को बेहतर करने, मूड में सुधार और एंग्जायटी को कम करने, पाचन में सुधार करने, शरीर के दर्द को कम करने और मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है।
ध्यान रहे, यह एक्सपर्ट थेरेपिस्ट से ही डॉक्टर की सलाह के साथ कराएं। इसके अलावा, कंप्लीकेशन्स की स्थिति में इसको करने से बचें। स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में क्या करना चाहिए?
प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में पोषक तत्वों से युक्त डाइट लें, पर्याप्त पानी पिएं, पर्याप्त आराम करें, हल्की एक्सरसाइज, योग करें और डॉक्टर की सलाह अनुसार फोलिक एसिड जैसे सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं।प्रेग्नेंसी में क्या खाना चाहिए?
प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट में फोलिक एसिड, आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्वों से युक्त हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, दूध, दही, चुकंदर, अनार, खट्टे फल, पनीर, अंडे और सीड्स को डाइट में शामिल करें।
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Oct 24, 2026 23:55 IST
Modified By : Priyanka Sharma Oct 24, 2026 23:55 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Chanchal Sharma
