प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के लिए अच्छी नींद लेना मां और बच्चों दोनों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हालांकि, जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, सही पोजीशन में सोना एक चुनौती बन सकता है। गलत तरीके से लेटने से पीठ दर्द, सांस लेने में तकलीफ और शरीर में सूजन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, बच्चे तक सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन पहुंचती रहे, इसके लिए भी सोने का तरीका बहुत मायने रखता है। आइए इस लेख में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को किस पोजीशन में सोना चाहिए?
प्रेग्नेंसी में कैसे सोना चाहिए?
Dr. Anju Suryapani ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में डॉक्टरों द्वारा सोने की सबसे सुरक्षित स्थिति बाईं करवट लेकर सोना है। इस स्थिति में सोना महिला और भ्रूण दोनों के लिए फायदेमंद होता है।
- शिशु तक बेहतर ब्लड सर्कुलेशन- आपके पेट के पिछले हिस्से में इन्फीरियर वेना कावा (IVC) नाम की एक बड़ी नस होती है, जो शरीर के निचले हिस्से से दिल तक खून वापस ले जाती है। जब आप बाईं करवट में सोती हैं, तो गर्भाशय का भारी वजन इस नस पर नहीं पड़ता, जिससे प्लेसेंटा और बच्चे तक ऑक्सीजन व पोषक तत्व सही तरह से पहुंचते हैं।
- किडनी फंक्शन और सूजन में सुधार- बाईं तरफ सोने से आपकी किडनियों पर प्रेशर कम पड़ता है, जिससे शरीर से ज्यादा तरल पदार्थ और टॉक्सिक चीजें बाहर निकल जाती हैं। इससे हाथ-पारों में आने वाली सूजन कम होती है।
- पाचन क्रिया में सुधार- बाईं करवट सोने से पेट के एसिड ऊपर भोजन नली में नहीं आते हैं, जिससे प्रेग्नेंसी में होने वाली एसिडिटी, सीने में जलन और अपच से राहत मिलती है।
साल 2025 में Canadian Medical Association Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी के पहले 28 हफ्ते तक सोने की स्थिति से गर्भावस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन 28वें हफ्ते के बाद से पीठ के बल सोने से बचना चाहिए। इस स्थिति में सोने से शिशु के आकार और सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इस दौरान दाहिनी ओर करवट लेकर सोना बाईं ओर सोने जितना ही सुरक्षित माना जाता है।पीठ के बल सोने की अवधि को कम करने के लिए साधारण या प्रेग्नेंसी तकियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में सांस फूलना सामान्य है या किसी बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें
प्रेग्नेंसी में कौन सी स्थिति में नहीं सोना चाहिए?
Dr. Anju Suryapani के मुताबिक, प्रेग्नेंसी में सही स्थिति में सोना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी गलत स्थिति में सोने से बचना है। इसलिए इन स्थितियों में सोने से बचें-
1. पीठ के बल सोना
प्रेग्नेंसी के 5वें महीने के बाद महिलाओं को पीठ के बल सोने से बचने की सलाह दी जाती है। दरअसल, जब आप पीठ के बल सीधी सोती हैं तो भारी गर्भाशय का पूरा भार आपकी रीढ़ की हड्डी, पीठ की मांसपेशियों और ब्लड वेसल्स पर पड़ता है। इसके कारण ब्लड प्रेशर कम होना, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ, पीठ दर्द और बवासीर की समस्या हो सकती है। जरूरी बात यह है कि इससे बच्चे तक खून और ऑक्सीजन का फ्लो कम हो सकता है।
right-sleep-position-during-pregnancy
2. पेट के बल सोना
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में पेट के बल सोना नुकसानदायक नहीं होता है, लेकिन जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है, पेट के बल सोना शारीरिक रूप से असंभ और असुविधा से भरा हो जाता है। इससे गर्भाशय और बच्चे पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।
प्रेग्नेंसी में सुरक्षित नींद पाने के लिए टिप्स
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि अगर आपको रात में एक ही करवट में सोने में असुविधा होती है तो आप इन टिप्स को फॉलो कर सकती हैं।
1. प्रेग्नेंसी पिलो का इस्तेमाल करें
बाजार में C-शेप या U-शेप के प्रेग्नेंसी पिलो मिलते हैं। यदि यह न हो तो नॉर्मल तकियों का इस्तेमाल करें। एक तकिया अपने घुटनों के बीच में रखें, एक तकिया पीठ के पीछे रखें और एक छोटा तकिया पेट के नीचे सपोर्ट देने के लिए रखें। इससे रीढ़ की हड्डी और पसलियों को आराम मिलता है।
2. अचानक सीधी हो जाने पर घबराएं नहीं
अगर आप रात में बाईं करवट सोई थीं और सुबह उठने के बाद खुद को पीठ के बल पाती हैं, तो घबराएं नहीं। आपका शरीर असुविधा महसूस होने पर खुद ब खुद स्थिति बदल लेता है। जैसे ही आपकी नींद खुले, बस वापस बाईं या दाईं करवट में सो जाएं।
3. दाईं करवट में भी सोना है सही
प्रेग्नेंसी के दौरान बाई करवट में सोना बेहतर माना जाता है, लेकिन पूरी रात एक ही तरफ सोना मुमकिन नहीं होता है। इसलिए, थकावट होने पर आप थोड़ी देर के लिए दाईं करवट भी सो सकती हैं। यह पीठ के बल सोने से बेहतर माना जाता है।
इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में अचानक गंध से परेशानी क्यों होने लगती है? डॉक्टर बता रहे हैं कारण
4. सोने से पहले का रूटीन
रात में हैवी, तीखा या ज्यादा मसालेदार खाना खाने से बचें और हल्का भोजन खाएं, ताकि एसिडिटी न हो। दिन में खूब पानी पिएं, लेकिन रात को सोने से 1-2 घंटे पहले पानी का सेवन कम कर दें, ताकि बार-बार पेशाब के लिए न उठना पड़े। इसके साथ ही सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं या पैरों की हल्की मालिश करवाएं, इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में मां की अच्छी नींद बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उतना ही जरूरी है, जितना पौष्टिक आहार। अगर आपको नींद न आने, खर्राटों, सांस लेने में भारीपन या पैरों में तेज ऐंठन की समस्या लगातार बनी रहती है तो अपने गायनोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें।
Image Credit: Freepik
FAQ
जब मां सोती है तो गर्भ में बच्चा क्या करता है?
प्रेग्नेंसी के दौरान जब महिला सोती है, तब गर्भ में पल रहा बच्चा अपनी खुद की नींद और जागने के साइकिल के अनुसार आराम करता है या हल्की हलचल करता है।गर्भ में बच्चा कितनी देर तक सोता है?
प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा शिशु 24 घंटे में से लगभग 22 से 23 घंटे यानी अपने दिन का 90 से 95 प्रतिशत समय सोने में बिताता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Sep 24, 2026 16:26 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani
