Fri Sep 11, 2026 | 08:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

अंधविश्वास या साइंस: क्या वाकई पपीता और अनानास खाने से गर्भपात होता है? डॉक्टर से जानें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के आहार और देखभाल को लेकर समाज में कई तरह के मिथक और अंधविश्वास प्रचलित हैं। इनमें से एक है कि पपीता और अनानास खाने से गर्भपात होता है?

महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अपने आहार को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह उनके और उनके शिशु के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। खासकर पपीता और अनानास जैसे फलों को लेकर गर्भवती महिलाओं के बीच एक आम धारणा है कि इनका सेवन करने से गर्भपात हो सकता है। यह धारणा कई सालों से चली आ रही है और समाज में इसे लेकर अंधविश्वास बना हुआ है। गर्भवती महिलाओं को यह समझना चाहिए कि किसी भी फल या भोजन को पूरी तरह से छोड़ने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

हमारे समाज में इसी तरह के कई मिथ या अंधविश्वास फैले हुए हैं। इसलिए, सेहत से जुड़े ऐसे ही मिथकों और अंधविश्वास के पीछे छिपे साइंस के बारे में बताने के लिए ओन्लीमायहेल्थ "अंधविश्वास या साइंस" सीरीज चला रहा है। इस सीरीज के तहत हम आपको ऐसे ही अंधविश्वासों से जुड़े साइंस और वैज्ञानिक तथ्य बताने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आज इस सीरीज में लखनऊ के मा-सी केयर क्लीनिक की आयुर्वेदिक डॉक्टर और स्तनपान सलाहकार डॉ. तनिमा सिंघल (Dr. Tanima Singhal, Pregnancy educator and Lactation Consultant at Maa-Si Care Clinic, Lucknow) से जानते हैं कि क्या वाकई पपीता और अनानास खाने से गर्भपात होता है?

क्या पपीता और अनानास का सेवन गर्भावस्था में गर्भपात का कारण बन सकता है?

डॉ. तनिमा सिंघल बताती हैं कि समाज में यह धारणा प्रचलित है कि पपीता और अनानास का सेवन गर्भावस्था के दौरान नुकसानदेह हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से सच नहीं है। पपीते और अनानास में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि सिर्फ कच्चे पपीते का सेवन कुछ महिलाओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसका सेवन करने से पहले महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अंधविश्वासों के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। गलत जानकारी के कारण वे कई ऐसे फूड्स से परहेज करती हैं, जो वास्तव में उनके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान किसी भी फूड को लेकर संदेह हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

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कच्चे पपीते का प्रभाव

कच्चे पपीते में पेपेन नामक एक एंजाइम होता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को उत्तेजित कर सकता है। यह गर्भाशय में संकुचन को बढ़ा सकता है और गर्भपात का कारण बन सकता है। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को कच्चे पपीते के सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, पके हुए पपीते का सेवन पूरी तरह से सुरक्षित है।

Papaya And Pineapple During Pregnancy

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पपीते के फायदे

  • विटामिन A और C: यह इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और त्वचा को हेल्दी रखते हैं।
  • फाइबर: पाचन तंत्र को सुधारता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है।
  • एंटीऑक्सीडेंट्स: शरीर में मौजूद हानिकारक फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं।

अनानास के फायदे

  • विटामिन C: यह शरीर को संक्रमण से बचाता है और इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है।
  • मैंगनीज: हड्डियों को मजबूत करता है और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखता है।
  • डाइजेस्टिव एंजाइम: पाचन में मदद करता है और गैस की समस्या को कम करता है।

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कैसे करें सेवन

  1. पके पपीते को सलाद या स्मूदी के रूप में खाएं।
  2. अनानास के छोटे टुकड़े खाएं या इसका जूस बनाकर पिएं।
  3. अधिक मात्रा में सेवन से बचें और हमेशा संतुलित आहार लें।

निष्कर्ष

पपीता और अनानास का सेवन गर्भावस्था के दौरान पूरी तरह से सुरक्षित हो सकता है, अगर इसे सही मात्रा और सही तरीके से खाया जाए। समाज में प्रचलित अंधविश्वासों के बजाय, महिलाओं को वैज्ञानिक तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। पपीता और अनानास जैसे फूड्स का संतुलित सेवन न केवल महिलाओं के लिए बल्कि उनके शिशु के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। इसलिए, अपनी डाइट को संतुलित रखें, अंधविश्वासों को दूर करें और विज्ञान के साथ जुड़कर स्वस्थ और सुरक्षित गर्भावस्था का आनंद लें।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 12, 2025 11:58 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jan 16, 2025 17:16 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

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