इन 4 कारणों से बढ़ रहा है मोटापा, ऐसे पाएं छुटकारा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 28, 2018
Quick Bites

  • अवसाद के चलते वजन बढ़ने की दिक्‍कत कर सकती है परेशान।
  • पोषक तत्‍वों का सेवन न करना बन सकता है मोटापे की वजह।
  • फाइबरयुक्‍त आहार से शरीर फिट और वजन रहता है काबू में।

यह बात सही है कि हमारी जीवनशैली हमारे वजन बढ़ने का कारण होती है, लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है। हकीकत यह है कि कुछ परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर हैं और उन पर हमारा शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है इसी से तय होता है कि हमारा वजन कितना और कैसे बढ़ेगा। जरूरत से ज्‍यादा वजन आपको परेशान कर सकता है। पौष्टिक आहार से लेकर व्‍यायाम सब आजमाने के बाद भी अगर वजन कम नहीं हो रहा है, तो इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन से लेकर विटामिन अभाव जैसे कई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कारण हो सकते हैं।

1. अवसाद

अवसाद कम करने की कई दवायें वजन बढ़ाती हैं। अगर अवसाद दूर करने की दवा ले रहे हैं, तो यह मानकर चलिए कि आपका वजन पांच पाउण्‍ड (करीब 2.5 किलो) से 15 पाउण्‍ड (करीब सात किलो) तक बढ़ेगा। अगर आप अवसाद कम करने की दवा नहीं ले रहे हैं, तो भी अवसाद आपको मोटा बना सकता है। अमेरिकी जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ में प्रकाशित स्‍टडी में कहा गया था कि उदास और तन्‍हा रहने वाले लोगों का वजन अन्‍य लोगों के मुकाबले तेजी से बढ़ता है। अवसादग्रस्‍त व्‍यक्ति उच्‍च कैलोरी फूड का अधिक सेवन करते हैं और साथ ही व्‍यायाम के प्रति भी उनमें अरुचि देखी जाती है। 

कैसे सुधारें

डॉक्‍टर की सहायता से धीरे-धीरे दवाओं पर निर्भरता कम करें। व्‍यायाम के लिए समय निकालने से आपको फायदा होगा। दोस्‍तों के साथ व्‍यायाम करने से तनाव दूर करने में मदद मिलेगी।

2. पाचन संबंधी परेशानी

पाचन संबंधी बीमारियों से भी वजन बढ़ता है। यदि आपको आंत संबंधी कोई रोग है तो वजन बढ़ने की आशंका अधिक होती है। सामान्‍य तौर पर भोजन के एक घंटे या उसके बाद आंत में क्रिया शुरू होती है। लेकिन, दिन में एक दो बार यह क्रिया हो, तब भी ठीक है। पाचन में परेशानी की वजह कम पानी पीना, पोषक तत्‍वों की कमी अथवा कोई दवा हो सकती है।

कैसे सुधारें

अगर आपको केवल कब्‍ज की परेशानी है तो आप ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनमें प्रोबॉयोटिक्‍स की मात्रा अधिक हो। पानी पर्याप्‍त मात्रा में पियें। फाइबर युक्‍त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

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3. कहीं पोषण की तो कमी नहीं

विटामिन डी, मैग्‍नीशियम अथवा आयरन की कमी से इम्‍यून सिस्‍टम और मेटाबॉलिज्‍म कमजोर होता है। इसके चलते स्‍वस्‍थ जीवनशैली अपनाना मुश्किल हो जाता है। आप 'लो एनर्जी फूड', मिठाई और सामान्‍य कार्बोहाइड्रेट के प्रति अधिक आकर्षित हो सकते हैं। इसके साथ ही आप व्‍यायाम से जी चुराने लगते हैं और खुद को थका हुआ महसूस करते हैं। यह स्थिति आपका वजन बढ़ा सकती है।

कैसे सुधारें

रेड मीट, पालक और बादाम आदि का सेवन करें। विटामिन डी की कमी को पूरा करने करने के लिए जितना दूध पीना चाहिए, उतना एक दिन में पीना आसान नहीं है। साथ ही इतनी देर सूर्य की रोशनी में रह पाना भी आपकी त्‍वचा के लिए अच्‍छा नहीं है। यहां यह समझने की जरूरत है कि सही मात्रा में विटामिन डी हासिल करने में समय लगता है। विटामिन डी की अधिक मात्रा किडनी में पथरी का कारण भी बन सकती है।

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4. कहीं उम्र का तकाजा तो नहीं

यह वह हालत है जिसे टाला नहीं जा सकता। उम्र के चौथे और पांचवें दशक में हम उतनी मात्रा में कैलोरी बर्न नहीं कर पाते जितनी कि ट्वेंटीज में करते हैं। ऐसे में हमें अधिक व्‍यायाम और कम भोजन की जरूरत होती है, जिससे हमारा मेटाबॉलिज्‍म बेहतर काम करता है। कुछ शोध बताते हैं कि लंबे समय तक वजन नियंत्रित करने के लिए कसरत भोजन के मुकाबले अधिक कारगर होती है।

कैसे सुधारें 

याद रखें कि जब बात वजन की आती है, तो सभी कैलोरी एक जैसी नहीं होतीं। प्रोटीन अधिक कैलोरी खर्च करने में मदद करता है। वहीं कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं और शरीर में तेजी से वसा के रूप में जमा हो जाते हैं। लो फैट प्रोटीन का चुनाव और कार्बोहाइड्रेट से दूरी आपका वजन बढ़ने से रोकते हैं।

5. आपको कुशिंग सिंड्रोम है!

अधिक वजन से रक्‍तचाप, ऑस्टियोपोरोसिस और त्‍वचा संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। त्‍वचा पर स्‍क्रेच मार्क्‍स भी पड़ सकते हैं। पेट की निचली मांसपेशियों पर जामुनी अथवा सिल्‍वर स्‍क्रेच मार्क्‍स पड़ने का अर्थ है कि आपका शरीर प्राप्‍त पोषक तत्‍वों को सही प्रकार से इस्‍तेमाल नहीं कर पा रहा है। यह कोरटिसोल-प्रोड्यूसिंग ट्यूमर के कारण होता है। हालांकि यह सिंड्रोम दस लाख में केवल 15 व्‍यक्तियों में ही होता है।

कैसे सुधारें 

अगर आपका आहार, व्‍यवहार और दवायें, सब कुछ ठीक होने के बाद भी वजन कम नहीं हो रहा तो आप एक मेडिकल टेस्‍ट करा सकते हैं। इससे आपके शरीर का कोरटिसोल स्‍तर पता चल जाएगा और आपको वजन काबू में रखने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे होने वाली अन्‍य बीमारियों के खतरे के बारे में भी पता चल सकता है।

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