Fri Sep 11, 2026 | 07:34 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाओं में कॉमन हैं ये 4 परेशानियां, जानें इनके बारे में

Health Issues Caused By Large Breasts: बड़े स्तनों के कारण कई महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियां होती हैं, जैसे फिजिकल एक्टिविटी में दिक्कतें और स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम।

स्तनों का आकार महिलाओं की पर्सनैलिटी पर बहुत गहरा असर छोड़ता है। स्तन न तो बहुत छोटे अच्छे लगते हैं और न ही बहुत बड़े। स्तनों का आकार कितना होना चाहिए, यह पूरी तरह महिला की हाइट पर निर्भर करता है। कई महिलाओं की हाइट कम होते हुए भी स्तनों का आकार काफी बड़ा होता है। क्या आप जानते हैं कि जब स्तनों का आकार बहुत ज्यादा बड़ा होता है या भारी होते हैं, तो इसकी वजह से महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस लेख में इन्हीं दिक्कतों का जिक्र करेंगे और इनका समाधान भी जानेंगे। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से बात की है। (Breast Bade Hone Se Kya Hota Hai)

बड़े स्तन के कारण महिलाओं को कैसी परेशानियां हो सकती हैं?- Health Issues Due To Heavy Breast

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एनसीबीआई में प्रकाशित एक लेख से पता चलता है कि स्तनों का बड़ा आकार युवा महिलाओं में पीठ दर्द का एक महत्वपूर्ण कारण है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे स्तनों का आकार बढ़ता जाता है, महिलाओं में पीठ दर्द, नसों पर दबाव और मांसपेशियों का दर्द भी बढ़ता जाता है। जानें, बड़े स्तन के कारण महिलाओं को कैसी परेशानियों के बारे में-

1. स्किन इरिटेशन का खतरा

जिन महिलाओं में स्तनों का आकार काफी बड़ा होता है, उन्हें त्वचा संबंधित समस्याएं होने लगती हैं। दरअसल, स्तन का आकार बड़े होने की वजह से नीचे वाले हिस्से में नमी बनी रहती है और चिपचिपापन महसूस होता है। ऐसे में प्रभावित हिस्से में खुजली, रैशेज जैसी परेशानियां हो जाती हैं। इन जगहों पर बैक्टीरिया भी आसानी से पनपने लगते हैं, जिस वजह से फंगल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।

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2. मांसपेशियों में दर्द

आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि जिन महिलाओं के स्तनों का आकार बड़ा होता है, उन्हें शरीर के ऊपरी हिस्से में मांसपेशियों से संबंधित दर्द होता है। दरअसल, शरीर के ऊपरी हिस्से का अधिक वजन स्पाइन और कंधों पर काफी दबाव बनाता है। ऐसे में पोस्चर में बदलाव हो सकता है, जो कि क्रॉनिक पेन का कारण बन सकता है।

3. नसों पर दबाव

चूंकि, बड़े आकार के स्तनों का अतिरिक्त दबाव कंधे और स्पाइन पर पड़ता है। इसका असर सीधे-सीधे मांसपेशियों पर नजर आता है। ऐसे में रीढ़ की हड्डी पर खिंचाव होने लगता है। यह स्थिति नसों पर भी नकारात्मक असर डालती है। नसों पर दबाव बनने की वजह से हाथों में सुन्नपन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होने लगती हैं। इसलिए, बहुत जरूरी है कि महिलाएं सही साइज की ब्रा पहनें।

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4. सीमित शारीरिक गतिविधियों

जिन महिलाओं के स्तनों का आकार बड़ा होता है, उन्हें शारीरिक गतिविधियों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बड़े स्तनों की वजह से महिलाओं को दौड़-भाग करने में या एक्सरसाइज करने में असहजता हो सकती है। यही कारण है कि कई महिलाएं, जिनके भारी स्तन हैं, वे फिजिकल एक्टिविटी करने या जिम जाने से बचती हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि बड़े स्तनों की वजह से महिलाओं को कई तरह की परेशानी होती है। ऐसा नहीं है कि वे इसे मैनेज नहीं कर सकती हैं। सही आकार के ब्रा पहनने से स्तनों को सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा, महिलाओं को रेगुलर एक्सरसाइज करनी चाहिए, ताकि वेट गेन न हो। वजन संतुलित रखने से स्तन के आकार पर भी इसका पॉजिटिव असर पड़ सकता है।

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FAQ

  • बड़े स्तनों के क्या नुकसान हैं?

    स्तनों का आकार बड़ा होने के कारण महिलाओं में पीठ दर्द, गर्दन में दर्द, माइग्रेन (सिरदर्द), त्वचा में जलन (त्वचा के रगड़ने से होने वाली एक समस्या), गर्मी में होने वाले दाने जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।
  • ब्रेस्ट साइज कितनी उम्र तक बढ़ता है?

    आमतौर पर स्तनों का विकास 18-20 वर्ष की उम्र तक होता है। हालांकि, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज में भी स्तनों के आकार में बदलाव देखे जा सकते हैं।
  • क्या खाने से ब्रेस्ट साइज कम होता है?

    चूंकि, डाइट का असर समग्र स्वास्थ्य पर होता है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि सही डाइट लेने से स्तनों के आकार पर भी असर पड़ता है, लेकिन ऐसा कुछ फिक्स नहीं कहा जा सकता है कि किसी एक चीज के खाने से स्तन का आकार छोटा हो सकता है।

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Mar 02, 2026 15:21 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Mar 02, 2026 15:21 IST

    Published By : Meera Tagore
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