काली हल्दी से सेहत को मिलते हैं ये 8 फायदे, जानें प्रयोग का तरीका

काली हल्दी कई स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद होती है। आप भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां जानें इसके फायदे और प्रयोग का तरीका। 

 
Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraPublished at: Jun 07, 2021
काली हल्दी से सेहत को मिलते हैं ये 8 फायदे, जानें प्रयोग का तरीका

हल्दी के औषधीय गुणों के बारे में तो आप सब बखूबी जानते होंगे, लेकिन क्या कभी काली हल्दी के बारे में सुना है? जी हां, काली हल्दी सेहत के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। पीली हल्दी की तरह प्रसिद्ध नहीं होने के कारण इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। क्या आपने कभी काली हल्दी देखी है? यह पीली हल्दी से काफी अलग होती है। लेकिन यह पीली हल्दी से किसी मामले में कम नहीं है। हालांकि इसे तंत्र-मंत्र या टोटके आदि करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। काली हल्दी पीली हल्दी से ज्यादा महंगी बिकती है। इस हल्दी का पौधा आपको आसानी से मिल जाएगा। इसके पौधे में गुलाबी रंग के फूल लगे होते हैं। वहीं इस हल्दी का रंग अंदर से बैंगनी होता है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके इस्तेमाल से शरीर में होने वाली तमाम समस्याएं खत्म हो सकती हैं। काली हल्दी कैंसर से बचाव करने के साथ ही ओस्टियोअर्थराइटिस, पेट और त्वचा संबंधी परेशानियों और महिलाओं में पीरियड्स आदि की समस्याओं में बहुत काम आती है। चलिए जानते हैं काली हल्दी के फायदों के बारे में। 

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1. गैस्ट्रिक परेशानी (Gastric Problems)

काली हल्दी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह पेट संबंधी परेशानियों से राहत दिलाती है। अगर आपके पेट में गैस बनी हो तो काली हल्दी को पानी में मिलाकर पी जाएं। इससे आपको काफी राहत मिलेगी। इससे पाचन तंत्र भी अच्छा रहता है। इस मामले में पीली हल्दी भी काली हल्दी की तरह फायदा करती है। पीली हल्दी को तो रोज़ाना दूध में मिलाकर पीने से पेट की लगभग सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। काली हल्दी भी पेट के लिए उतनी ही फायदेमंद है जितनी की पीली हल्दी। 

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2. रोग निरोधक (Disease Repellent) 

काली हल्दी एक रोग निरोधक जड़ी बूटी है। सदियों से इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई प्रकार के रोगों से लड़ने में किया जाता है। काली हल्दी में एंटीऑक्सिडेंट्स, एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटीफंगल और एंटी माइक्रोब्स आदि पाए जाते हैं। इसके केमिकल कंपाउंड जैसे की अल्कानॉइड्स, फ्लेवेनॉइड्स स्टीरॉइड आदि अर्थराइटिस, अस्थमा, मिर्गी जैसी बीमारियों में बहुत फायदेमंद साबित होते है। काली हल्दी की जड़ों का इस्तेमाल अर्थराइटिस और ओस्टियोअर्थराइटिस के दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है। मिर्गी और अस्थमा के लिए भी काली हल्दी का सेवन किया जाता है। 

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3. हीलिंग प्रॉपर्टीज (Healing Properties)

जिस तरह पीली हल्दी किसी भी घाव या चोट को भर देती है उसी तरह काली हल्दी भी शरीर को हील करती है। काली हल्दी में भी भरपूर एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते है। किसी भी तरह की चोट, मोच, घाव और रगड़ लग जाए तो काली हल्दी की जड़ों को कूटकर एक लेप बना लें और प्रभावित त्वचा पर लगाएं। इससे चोट ठीक होने लगती है। काली हल्दी माइग्रेन ठीक करने में भी कारगर होती है। इसके एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण दांतो के दर्द से भी यह राहत दिलाते है। 

4. ल्यूकोडर्मा (Leucoderma) 

ल्यूकोडर्मा एक चर्म रोग है। ल्यूकोडर्मा में त्वचा पर सफेद धब्बे होने लगते हैं। यह समस्या इंसान का आत्म विश्वास गिरा देती है। यह रोग कई कारणों से होता है। जैसे की त्वचा का हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आना या फिर इम्यून सिस्टम में असंतुलन होना आदि। इसके आयुर्वेदिक इलाज के रूप में काली हल्दी का लेप प्रभावित त्वचा पर लगाकर किया जा सकता है। काली हल्दी में मुख्य रूप से स्टेरॉयड्स होते हैं, जो कि ल्यूकोडर्मा के इलाज में काफी महत्वपूर्ण होते हैं। काली हल्दी में पाए जाने वाले अन्य केमिकल कंपाउंड और एंटीऑक्सिडेंट्स साथ ही एंटी इंफेक्शन गुण चर्म रोग को ठीक करने में मदद करते हैं। हल्दी तो वैसे ही त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होती है। काली हल्दी भी उसी प्रकार चर्म रोग से छुटकारा दिलाने में बहुत लाभदायक होती है। 

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5. खांसी में फायदेमंद (Beneficial In Cough)

जिस तरह पीली हल्दी के सेवन से खांसी-जुकाम ठीक होता है उसी तरह काली हल्दी के सेवन से भी खांसी जड़ से खत्म हो जाती है। काली हल्दी फेफड़ों पर सकारात्मक असर दिखाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स खांसी ठीक करने में योगदान देते हैं। खांसी के साथ-साथ काली हल्दी का उपयोग बुखार ठीक करने के लिए भी किया जाता है। खांसी हो जाने पर काली हल्दी को गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से बहुत जल्दी असर दिखाई देने लगते हैं। 

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6. पीरियड्स क्रैंप्स में फायदेमंद (Beneficial in Period Cramps)

पीरियड्स क्रैंप्स बहुत ही दर्दनाक होते हैं। कई महिलाओं को पेट में ऐंठन के साथ-साथ भयंकर दर्द भी होता है। इससे राहत पाने के लिए काली हल्दी को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है। खाना बनाते समय उसमें थोड़ी सी काली हल्दी मिला लें। आप चाहें तो दूध के साथ भी काली हल्दी मिक्स करके पी सकते हैं। इससे दर्द से काफी राहत मिलेगी। साथ ही इसके सेवन से इम्यूनिटी भी बनी रहेगी। 

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7. त्वचा की खुजली दूर करने में मददगार (Helps in Removing Itching)

खुजली के लिए घरेलू नुस्खों के तौर पर काली हल्दी का प्रयोग करना एक बेहतर विकल्प साबित होता है। हालांकि इसे मुंह पर लगाने के लिए चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। लेकिन इसमें इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाने के कारण इसे खुजली दूर करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्राकृतिक एंटी ऑक्सीडेंट्स का भंडार मानी जाती है। जो आपको इंफेक्शन से बचाने में भी सहायक होती है।  

8. कैंसर से करे बचाव (Prevents from Cancer)

कैंसर के खतरे को कम करने में भी काली हल्दी अहम भूमिका निभाती है। काली हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट्स का भंडार होती है। इसके सेवन से आप कैंसर के खतरे से खुद को बचा सकते हैं। काली हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो मुख्य रूप से कोलन कैंसर से बचाव करने में लाभकारी माना जाता है। अगर आप इस समस्या के लिए काली हल्दी का प्रयोग कर रहे हैं तो इससे पहले एक बार चिकित्सक की सलाह जरूर लें। 

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प्रयोग करने का तरीका (How to Use)

  • काली हल्दी की जड़ को पीसकर या उसका पेस्ट बनाकर पीने से आप पेट संबंधी समस्याओं खासतौर पर गैस्ट्रिक समस्याओं से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। 
  • पीरियड में हो रहे असहनीय़ दर्द से राहत पाने के लिए आप दूध में काली हल्दी का पाउडर मिलाकर उसे पी सकते हैं। इससे राहत मिलेगी। 
  • काली हल्दी की जड़ का सेवन अर्थराइटिस और अस्थमा जैसी दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है। इसके बारे में आप चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं। 
  • दांत के दर्द से राहत पाने के लिए आप काली हल्दी के पाउडर को अपने दांतों पर लगा सकते हैं। 

काली हल्दी का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। अगर आप किसी गंभीर समस्य में इसका सेवन कर रहे हैं तो एक बार चिकित्सक की सलाह जरूर लें। 

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