धूप में बार बार छींक आने पर हो सकती है सन स्नीज की समस्या, जानें कैसे

बार-बार धूप में छींक आने को नजरअंदाज न करें। यह सन स्नीज़िंग का कारण भी हो सकता है। यहां जानें सन स्नीज़िंग के बारे में।

Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraUpdated at: Apr 20, 2021 16:56 IST
धूप में बार बार छींक आने पर हो सकती है सन स्नीज की समस्या, जानें कैसे

गर्मियों का आगमन हो चुका है। गर्मियों की शुरूआत से ही लोग बीमारियों से बचाव करने में जुट जाते हैं। गर्मियों के मौसम में सन स्ट्रोक (SunStroke), हीट स्ट्रोक (Heat Stroke), सन टैनिंग (Sun tanning) और डिहाइड्रेशन (Dehydration) जैसी तमाम समस्याएं होने का खतरा बना रहता है। एक ओर जहां सर्दियों में निकलने वाली धूप फायदेमंद साबित होती है तो वहीं दूसरी ओर गर्मियों में होने वाली तेज धूप आपको सन टैनिंग, सन स्ट्रोक जैसी कई समस्याएं भी देती है। लेकिन क्या आप धूप से होने वाली एक और समस्या के बारे में जानते हैं। क्या आपको पता है कि सन स्नीजिंग क्या होता है। क्या आपने कभी इसके बारे में सुना है। अगर नहीं तो इस लेख के माध्यम से आज हम आपको बताएंगे कि सन स्नीजिंग (Sun Sneezing) किसे कहते हैं। वैसे तो सन स्नीजिंग किसी को भी होने वाला विकार है, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। इस समस्या की अब तक कोई सटीक वजह भी नहीं पता चल पाई है। इस समस्या में आपका नर्वस सिस्टम अधिक सक्रिय रहता है। इसे फोटिस स्नीज रिफल्क्स (Photic Sneeze Reflux) के नाम से भी जाना जाता है। आइये जानते हैं इसके बारे में। 

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क्या है सन स्नीजिंग (What is Sun Sneezing)

छींक आना बेहद आम बात है। यह प्रक्रिया सभी के साथ होती है। लेकिन कुछ लोगों को धूप के संपर्क में आने भर से ही छींक आने लगती है। इसे सन स्नीजिंग कहा जाता है। इसमें व्यक्ति थोड़ी भी तेज धूप में निकले तो उसे छींक आने में समय नहीं लगता है। वहीं धूप के संपर्क में आने से छींकने वाले लोगों को सन स्नीजर्स के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह कोई बीमारी नहीं है, जिससे डरने की आवश्यकता है। यह भी अन्य छींकों की ही तरह छींक का एक प्रकार है। लेकिन यह आमतौर पर नहीं होकर धूप में ज्यादा होता है। इस समस्या में हमारी शरीर को नियंत्रित करने वाला नर्वस सिस्टम (Nervous System) काफी सक्रिय हो जाता है। हालांकि सन स्नीजिंग क्यों होती है, इसकी कोई सटीक वजह तो सामने नहीं आई है। विशेषज्ञ इसे आम समस्या मानते हैं। इससे शरीर को कोई भारी नुकसान नहीं होता है। इसलिए इसके बारे में ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। हालांकि एक बार चिकित्सक से इस बारे में सलाह जरूर लेनी चाहिए। आमतौर पर बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। 

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क्या है फोटिक स्नीज रिफल्क्स (What is Photic Sneeze Reflux)

सन स्नीजिंग की असल वजह का पता तो अबतक नहीं चल पाया है। लेकिन चिकित्सकों की भाषा में समझा जाए तो इसे फोटिक स्नीज रिफल्क्स के नाम से भी जाना जाता है। इस समस्या में यह पाया गया कि कुछ लोग जिन्हें धूप में छींकने की आदत या समस्या होती है, वह एक तरह का विकार है। इसमें व्यक्ति कुछ समय तक अंधेरे में या कम लाइट में रहने के बाद उजाले में या फिर सूरज की रोशनी के संपर्क में आता है तो उसे छींक की समस्या होती है। हालांकि यह समस्या आपको एलर्जी के कारण भी हो सकती है। यह जनसंख्या के मुकाबले बहुत कम लोगों में देखी जाती है। 

क्यों आती है छींक (Why Sneeze Occurs)

आमतौर पर ना और मुंह के बीच की हवा का कंट्रोल खो जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। यह किसी को भी हो सकती है। या फिर अचानक से हवा का बहाव नाक से गले में चले जाने से या नाक में बाहरी प्रदूषण के जाने से होने वाली जलन या खुजली के कारण भी आपको छींक आ सकती है। इसका एक मुख्य कारण नाक और गले की झिल्ली में जलन या कुछ फंस जाने के कारण भी छींक आती है। साथ ही इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे ठंडे पानी से नहाना, ठंडी जगह पर सांस लेना, तापमान में परिवर्तन आने से और किसी फ्लू या फिर वायरस के कारण भी आपको यह समस्या हो सकती है। 

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क्यों कहा जाता है फोटिक स्नीज इफेक्ट (Photic Sneeze Effect)

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ऐसा माना जाता है कि सन स्नीजिंग के दौरान आपका नर्वस सिस्टम ही आपको स्नीजिंग के संकेत देता है। सन स्नीजिंग के दौरान यह प्रक्रिया काफी तेज हो जाती है। इसमें मुख्य रूप से हमारे तंत्रिका तंत्र पर भार पड़ता है। इसीलिए इसे फोटिक स्नीज इफेक्ट के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में अपने नर्वस सिस्टम के संकेतों का ध्यान रखने के साथ ही इसमें आने वाली खराबी के लक्षणों को भी पहचानकर चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। 

सन स्नीजिंग का कोई चिकित्सीय परिणाम नहीं होने के कारण इस समस्या के खतरे का सटीक अंदाजा नहीं लग पाया है। बार बार धूप में छींक आने की समस्या होने पर इसे नजरअंदाज करने की बजाय एक बार चिकित्सक की सलाह जरूर लें। 

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