Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

नाइट शिफ्ट वाले शुगर कंट्रोल करने के लिए रात में क्या खाएं? जानें एक्सपर्ट से

क्या आप भी करते हैं नाइट शिफ्ट और अक्सर ब्लड शुगर का स्तर बदलता रहता है? परेशान न हों। इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी खाने की चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं।

हाल के सालों में वर्क कल्चर में काफी ज्यादा बदलाव आए हैं। अब अलग-अलग शिफ्टों में काम होता है। हालांकि, इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, लेकिन कहीं न कहीं इसका बुरा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। विशेषकर, जो लोग नाइट शिफ्ट करते हैं। वास्तव में, नाइट शिफ्ट करने की वजह से मोटापा, ब्लड शुगर असंतुलित होना जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। यहां तक कि मेटाबॉलिज्म पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। यहां हम जानेंगे कि नाइट शिफ्ट वाले शुगर कंट्रोल करने के लिए रात में क्या खाएं? इस बारे में जानने के लिए हमने Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से बात की।

नाइट शिफ्ट वाले शुगर कंट्रोल करने के लिए रात में क्या खाएं?

what to eat at night to control blood sugar for night shift employees 01 (18)

1. प्रोटीन युक्त चीजें

नाइट शिफ्ट में ऐसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, जो अनहेल्दी हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि रात के समय बहुत हैवी मील नहीं लेना चाहिए। इससे रात को काम करते हुए नींद आ सकती है। इस समय स्नैक्स के लिए प्रोटीन युक्त चीजों का शामिल करें। इसमें उबले हुए अंडे, पनीर स्टिक्स या मुट्ठी भर मेवे (बादाम, अखरोट) ले सकते हैं। इनसे ऊर्जा के स्तर को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है।

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2. हाई फाइबर खाएं

नाइट शिफ्ट वालों को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए। फाइबर न खाने की वजह से कब्ज जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो हाई फाइबर के लिए कच्ची सब्जियां (गाजर, खीरा, चेरी टमाटर) लें। इनका सेवन करने से शुगर के अवशोषण को धीमा कर देती हैं, जिससे ब्लड शुगर स्पाइक नहीं करता है

3. डेयरी प्रोडक्ट

डायबिटीज के मरीजों के लिए नाइट शिफ्ट में डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करना भी बहुत अच्छा होता है। हालांकि, इसे संतुलित रखना चाहिए। डेयरी प्रोडक्ट के रूप में आप बेरीज के साथ सादा दही या पनीर का एक छोटा हिस्सा और होल-व्हीट क्रैकर्स का सेवन कर सकते हैं। इससे एनर्जी बनी रहती है और काम की प्रोडक्टिविटी में भी सुधार होता है।

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4. लो ग्लाइसेमिक फूड

नाइट शिफ्ट में डायबिटीज के मरीजों को लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड या फलों का ही सेवन करना चाहिए। इससे ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता नहीं है। इसमें ग्रीन सेब, बेरीज या नाशपाती अच्छे विकल्प हैं। ये फल देर रात की क्रेविंग को भी कंट्रोल करते हैं और शुगर के स्तर को बढ़ने नहीं देते हैं।

निष्कर्ष

नाइट शिफ्ट वालों को अपनी हर समय की डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें ऐसी कोई चीज नहीं खानी चाहिए, जिससे ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बिगड़ जाए या ऐसी चीजों की स्नैकिंग नहीं करनी चाहिए, जिससे उनका वजन बढ़ सकता है। हेल्दी सब्जियां, फलों को रात की बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा बनाएं। सेहत में काफी फर्क नजर आने लगेगा।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या नाइट शिफ्ट में चाय या कॉफी पीना ब्लड शुगर के लिए सुरक्षित है?

    बिना चीनी वाली ब्लैक कॉफी या ग्रीन टी का सेवन सीमित मात्रा में किया जा सकता है।
  • रात के समय स्नैक्स लेने का सबसे सही समय क्या है?

    नाइट शिफ्ट के दौरान हैवी मील के बजाय, शिफ्ट के बीच में प्रोटीन युक्त स्नैक लेना सबसे अच्छा होता है।
  • क्या रात में फल खाने से शुगर बढ़ सकती है?

    सेब या जामुन जैसे लो ग्लाइसेमिक फलों का सेवन सेफ होता है। बहुत अधिक मीठे फल जैसे आम या अंगूर से रात के समय बचना चाहिए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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