फैटी लिवर की समस्या में जरूर करें इन 4 योगासनों का अभ्यास, एक्सपर्ट से जानें फायदे

फैटी लिवर की समस्या में योगासनों का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है, एक्सपर्ट से जानें इस समस्या में किन योगासनों का अभ्यास करें?

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Aug 04, 2021 04:00 IST
फैटी लिवर की समस्या में जरूर करें इन 4 योगासनों का अभ्यास, एक्सपर्ट से जानें फायदे

योग का अभ्यास भारत में हजारों सालों से किया जा रहा है। शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए योगासनों का नियमित अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है। योग न सिर्फ शरीर को फिट और स्वस्थ रखने में उपयोगी है बल्कि इसके नियमित अभ्यास से शरीर की कई बीमारियों से छुटकारा भी मिलता है। हमारे शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग लिवर है जो कि शरीर के सभी कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लिवर का काम हमारे द्वारा खाने वाले सभी खाद्य पदार्थों को पचाने का होता है और शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थों को अलग करना होता है। जब लिवर की कोशिकाओं में मौजूद फैट की मात्रा बढ़कर 5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो इस स्थिति को फैटी लिवर की समस्या (Fatty Liver Problem) कहा जाता है। यह समस्या खानपान और जीवनशैली के कारण होती है। फैटी लिवर की समस्या में इलाज के साथ योग का अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आप नियमित रूप से कुछ योगासनों (Yoga Poses for Fatty Liver) का अभ्यास कर सकते हैं जो लिवर को स्वस्थ बनाने में और फैटी लिवर की समस्या से निजात दिलाने में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। आइये पतंजलि योग संस्थान के योग गुरु मोहन से जानते हैं इन योगासनों के बारे में।

क्यों होती है फैटी लिवर की समस्या? (Fatty Liver Causes)

लिवर की कोशिकाओं में मौजूद फैट की मात्रा जब बढ़कर 5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो इस समस्या को फैटी लिवर की समस्या कहा जाता है। कुछ लोगों में यह समस्या आनुवांशिक कारणों से होती है तो कुछ लोगों को खानपान और जीवनशैली की वजह से इस समस्या का शिकार होना पड़ता है। अधिक फैट वाले भोजन, टला भुना और मसालेदार खाना व शराब या अल्कोहल के अधिक सेवन से फैटी लिवर का खतरा सबसे ज्यादा होता है। फैटी लिवर की समस्या की वजह से लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। फैटी लिवर की समस्या अधिक गंभीर होने पर लिवर सिरोसिस और लिवर फेलियर का कारण भी बनती है। फैटी लिवर की समस्या के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं।

  • असंतुलित खानपान
  • शराब का अधिक सेवन
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • टाइप 2 डायबिटीज
  • वजन का बढ़ना या मोटापा
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम
  • इंसुलिन प्रतिरोध
  • हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स
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फैटी लिवर की समस्या में करें इन 4 योगासनों का अभ्यास (Effective Yoga Poses for Fatty Liver) 

योग शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखने में उपयोगी होता है। नियमित रूप से योगासन का अभ्यास करने वाले लोगों की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है। फैटी लिवर की समस्या में इलाज के साथ कुछ योगासनों का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा शुरुआत में फैटी लिवर की समस्या को दूर करने के लिए आप खानपान में बदलाव के इन योगासनों का नियमित अभ्यास कर सकते हैं।

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1. नौकासन या बोट पोज (Naukasana - Boat Pose)

फैटी लिवर की समस्या में नौकासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह एक इंटरमीडिएट लेवल का योगासन है जिसका अभ्यास कुछ सामान्य योगासनों से थोड़ा कठिन होता है। इसके अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां, आंतरिक अंग जैसे लिवर और किडनी आदि को बहुत फायदा मिलता है। इस योगासन के अभ्यास में आप नाव (बोट) जैसे मुद्रा में रहते हैं इसलिए इसे नौकासन कहा जाता है। लिवर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर करने में इस योगासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है।

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नौकासन का अभ्यास करने का तरीका (How To Do Naukasana?)

  • नौकासन का अभ्यास करने के लिए आप सबसे पहले चटाई या योगा मैट पर बैठ जाएं
  • अब आराम से इस चटाई पर पीठ के बल लेटें।
  • अब धीरे-धीरे अपने पंजे और एड़ियों को आपस में मिला लें।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को कमर के पास रखें।
  • अब अपनी हथेली और गर्दन को जमीन पास सीधा रखें।
  • अब अपने दोनों पैरों के साथ-साथ गर्दन और हाथों को भी ऊपर की तरफ उठाएं।
  • शरीर का पूरा भार कूल्हों पर डालते हुए अंग्रेजी के अक्षर V की आकृति बनाएं।
  • 30 से 40 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें और फिर सामान्य स्थिति में आएं।
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2. भुजंगासन या कोबरा पोज (Bhujangasana - Cobra Pose)

भुजंगासन को अंग्रेजी में कोबरा पोज कहा जाता है। इसके नाम से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस आसन में कौन सी मुद्रा होती है। इस आसन में हमें सांप की मुद्रा में रहना होता है। इसका नियमित अभ्यास शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। शरीर के लिए भुजंगासन के नियमित अभ्यास के फायदे तो बहुत हैं लेकिन विशेष रूप से इसका अभ्यास करने से पीठ और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है। यह आसन सूर्य नमस्कार आसन का 8वां आसन है। फैटी लिवर की समस्या में इस आसन का अभ्यास बहुत फायदेमंद माना जाता है। भुजंगासन का नियमित अभ्यास करने से पाचन तंत्र और लिवर मजबूत होता है।

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भुजंगासन करने का तरीका (How To Do Bhujangasana?)

  • भुजंगासन का अभ्यास करने के लिए किसी साफ और हवादार जगह पर योगा मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। 
  • अब अपने दोनों पैरों को फैलाते हुए उनके बीच बराबर की दूरी रखें। 
  • अपनी हथेलियों को कंधे के पास लाकर हथेलियों को जमीन पर टिकाएं। 
  • अब शरीर के वजन को हथेलियों पर डालते हुए अपनी सांस अंदर की तरफ खींचें। 
  • इसके बाद सिर को उठकर पीछे की तरफ खींचें। 
  • सिर को पीछे ले जाते हुए अपनी छाती को बाहर की तरफ लाएं और कोहनियों को जमीन से टिका कर रखें। 
  • अब सांप की तरह आकृति में अपने सिर को रखें। 
  • कुछ देर इस स्थिति में रहें और फिर सामान्य मुद्रा में आएं। 
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3. धनुरासन (Dhanurasana - Bow Pose)

धनुरासन में आप धनुष की मुद्रा में होते हैं इसलिए इसे धनुरासन कहा जाता है। यह आसन हाथ योग के 12 आसनों में से एक है। धनुरासन के नियमित अभ्यास के फायदे बहुत हैं। शरीर की मांसपेशियों से लेकर आंतरिक अंगों के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है। आप इसका अभ्यास आसानी से कर सकते हैं। फैटी लिवर की समस्या में धनुरासन का अभ्यास बहुत फायदे माना जाता है। धनुरासन का अभ्यास करते समय आपके पेट की मांसपेशियों और लिवर में खिंचाव होता है जो पाचन तंत्र और लिवर के लिए उपयोगी होता है। धनुरासन का नियमित अभ्यास पाचन से जुड़ी कई समस्याओं में फायदेमंद है।

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धनुरासन का अभ्यास करने का तरीका (How To Do Dhanurasana?)

  • धनुरासन करने के लिए चटाई पर लेट जाएं
  • इसके बाद अब अपने पैरों को घुटने से मोड़ते हुए पीछे की तरफ उठाएं।
  • इसके बाद अपने टखनों को हाथों से पकड़कर धनुष की मुद्रा में आएं।
  • अब अपने पैरों को थोड़ा ऊपर करते हुए सांस अंदर की तरफ लें और एड़ियों को हाथों से खींचे।
  • कुछ देर इस मुद्रा में रहने के बाद सामान्य स्थिति में वापस आएं।

4. गोमुखासन (Gomukhasana - Cow Pose)

लिवर की कई समस्याओं के लिए गोमुखासन का अभ्यास सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है। गोमुखासन का अभ्यास लिवर सिरोसिस की बीमारी में बहुत फायदेमंद और उपयोगी होता है। लिवर को एक्टिव करने और लिवर में ऑक्सीजन व खून के प्रवाह को तेज करने के लिए गोमुखासन का अभ्यास किया जाता है। इसके अभ्यास से लिवर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके अलावा गोमुखासन का अभ्यास रीढ़ की हड्डी, पीठ और कंधे के लिए भी फायदेमंद होता है। गोमुखासन का अभ्यास करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। घुटने, कंधे, गर्दन के दर्द से पीड़ित लोगों के साथ गर्भवती महिलाओं को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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गोमुखासन का अभ्यास करने का तरीका (How To Do Gomukhasana?)

  • गोमुखासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले चटाई पर बैठ जाएं।
  • अब अपने पैरों को सामने की तरफ फैलाकर दण्डासन की मुद्रा में बैठें।
  • अब अपने बाएं पैर को मोड़ते हुए दाहिने तरफ की जांघ के नीचे रखें। 
  • दाहिने पैर को बाएं तरफ की जांघ के ऊपर रखें।
  • अपने दोनों घुटनों को एक साथ पास रखें।
  • अपने बाएं हाथ को धीरे से मोड़ें और इसे पीठ के पीछे लेकर जाएं।
  • इसी तरह से दाहिने हाथ को दाहिने कंधे की तरफ ले जाएं और इससे बाएं हाथ को पकड़ें।
  • अब अपने धड़ को सीधा सीधा रखते हुए छाती को फैलाएं और थोड़ा सा पीछे की तरफ जाएं।
  • थोड़ी देर इस स्थिति में रहने के बाद आराम से सामान्य स्थिति में आएं।

ऊपर बताये गए सभी योगासनों का अभ्यास शरीर के लिए फायदेमंद होता है। अगर आप इन योगासनों का नियमित अभ्यास करते हैं तो इससे आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और फैटी लिवर की समस्या में फायदा मिलेगा। शुरुआत में इन योगासनों का अभ्यास एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें।

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