DNA को डैमेज कर सकता है ई-सिगरेट, शोध में हुआ खुलासा

शोधकर्ताओं ने पाया कि ई-सिगरेट में पाए जाने वाले जिंक जैसे धातुओं के हानिकारक स्तर, डीएनए को क्षति पहुंचा सकते हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Feb 26, 2020Updated at: Feb 26, 2020
DNA को डैमेज कर सकता है ई-सिगरेट, शोध में हुआ खुलासा

ई-सिगरेट के वैसे तो कई स्वास्थ्य से जुड़े नुकसान हैं, पर हाल ही में आया शोध बताता है कि ई-सिगरेट का इस्तेमाल कैसे हमारे डीएनए (DNA) को डैमेज कर सकता है। शोध बताता है कि कैसे ई-सिगरेट में पाए जाने वाले कई प्रकार के हानिकारक कण आपके ऑक्सीडेटिव डीएनए क्षति से जुड़े होते हैं। 'बीएमजे ओपन रेस्पिरेटरी' रिसर्च जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने पाया कि बायोमार्कर, जो डीएनए के जोखिम प्रभाव और संभावित नुकसान को दर्शाते हैं, सिगरेट पीने वाले अन्य समूहों की तुलना में ई-सिगरेट उपयोगकर्ताओं में ज्यादा पाया गया है। ये सभी खतरे ऑक्सीडेंट डीएनए से जुड़ा हुआ है, जो इसे क्षति पहुंचाते हैं।

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क्या कहता है शोध

अध्ययन में पाया गया कि ई-सिगरेट उपयोगकर्ता धातुओं के संभावित हानिकारक स्तरों - विशेष रूप से जस्ता (जिंक) हाई ऑक्सीडेटिव डीएनए क्षति से संबंधित हैं। वहीं अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्र्यू टैलबोट की मानें, तो जिंक, एक आहार पोषक तत्व, वृद्धि, प्रतिरक्षा कार्य और घाव भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं इसकी बहुत अधिक मात्रा बीमारी का कारण बन सकती है। इसकी कमी, साथ ही इसकी अधिकता, सेलुलर ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण बनती है, जो अनियंत्रित होने पर एथेरोस्क्लेरोसिस, कोरोनरी हृदय रोग, फुफ्फुसीय फाइब्रोसिस, तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है।

दरअसल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में एक बैटरी, परमाणु इकाई और रीफिल द्रव होता है। ई-सिगरेट एयरोसोल्स में धातुएं मुख्य रूप से एटमाइजर-निचे क्रोम वायर, टिन सोल्डर जॉइंट्स, ब्रास क्लैम्प्स, इंसुलेटिंग शीथ्स और विक्स में और साथ ही ई-फ्लुइड्स जो एटमाइज़र हीट करते हैं। अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने ई-सिगरेट उपयोगकर्ताओं में धातुओं के संबंध में प्रभाव और संभावित नुकसान के मूत्र बायोमार्कर की जांच की और इसकी मात्रा निर्धारित की है।

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ई-सिगरेट का स्वास्थ्य पर असर

अध्ययन के अनुसार, एक बायोमार्कर एक जैविक प्रक्रिया की एक मात्रात्मक विशेषता है। बायोमार्कर शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को एक जैविक या रासायनिक पदार्थ को मापने की अनुमति देता है, जो किसी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति का संकेत है। मनुष्यों के साथ पिछले ई-सिगरेट के अध्ययन ने जोखिम के बायोमार्करों की जांच भी की गई थी।उदाहरण के लिए, निकोटीन या निकोटीन मेटाबोलाइट्स। लेकिन किसी ने भी संभावित नुकसान के बायोमार्कर का अध्ययन नहीं किया है या नहीं दिखाया है कि यह नुकसान धातु डीएनए जोखिम के साथ कैसे संबंधित है।

शोधकर्ताओं द्वारा अध्ययन किए गए बायोमार्कर 8-हाइड्रॉक्साइडोक्सीगोनोसिन (8-OHdG) थे, जो ऑक्सीडेटिव डीएनए क्षति का एक बायोमार्कर था। 8-आइसोप्रोस्टेन, लिपिड के ऑक्सीडेटिव गिरावट का एक संकेतक है और मेटलोथायोनिन, एक धातु प्रतिक्रिया प्रोटीन। शोधकर्ताओं ने कहा कि तीनों बायोमार्कर को सिगरेट धूम्रपान करने वालों में सांद्रता की तुलना में ई-सिगरेट उपयोगकर्ताओं में काफी ऊंचा किया गया था।

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गर्भवती महिलाओं के लिए भी है खतरनाक

गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से, ई-सिगरेट का उपयोग नहीं करना चाहिए। शोध में साफ शब्दों में कहा गया है कि इसका इस्तेमान सिर्फ गर्भवती महिला ही नहीं, बल्कि उसके होने वाले बच्चे को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल से उनके शरीर में जिंक की अधिकता से मतली और दस्त हो सकता है। हाल ही में ई-सिगरेट के उपयोग से संबंधित मौतों और कई बीमारियों को देखते हुए, शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि आज ई-सिगरेट के उपयोग से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में सभी को अवगत कराया जाना जरूरी हो गया है।

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