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Medically Reviewed by Dr Chandni Tugnait , Transformation Coach and Psychotherapist

घर में पौधे लगाने से सच में कम होता है तनाव? जानें साइंस और डॉक्टर की राय

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में लोग मानसिक शांति के लिए योग, मेडिटेशन और थेरेपी के साथ-साथ अन्य नेचुरल तरीकों को भी अपनाते हैं। यहां जानिए, क्या घर के पौधे सच में मेंटल स्ट्रेस कम करते हैं?
घर में पौधे लगाने से सच में कम होता है तनाव?  जानें साइंस और डॉक्टर की रायघर में पौधे लगाने से सच में कम होता है तनाव? जानें साइंस और डॉक्टर की राय

तेज रफ्तार जिंदगी, लगातार बजते नोटिफिकेशन, स्क्रीन पर टिकी आंखें और दिमाग में चलती अनगिनत बातें, आज का इंसान शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करता है। तनाव, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और नींद न आना अब आम समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में जब बात मानसिक सेहत को बेहतर बनाने की आती है, तो ज्यादातर लोग मेडिटेशन, योग या थेरेपी की सलाह देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर या ऑफिस में रखा एक छोटा-सा हरा पौधा भी आपके दिमाग को सुकून दे सकता है? अक्सर इनडोर पौधों को केवल घर की शोभा बढ़ाने वाला या इंटीरियर का हिस्सा माना जाता है, लेकिन इनका असर सिर्फ देखने तक सीमित नहीं होता। हरियाली का रंग आंखों को ठंडक देता है और मन को अनजाने में ही शांत करने लगता है।

आज जब मेंटल हेल्थ एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, तब छोटे-छोटे नेचुरल उपायों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई इनडोर पौधे मानसिक सेहत में मदद करते हैं? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, गेटवे ऑफ हीलिंग के फाउंडर और डायरेक्टर, कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr Chandni Tugnait, MD (A.M) Psychotherapist, Life Alchemist, Coach & Healer , Founder & Director, Gateway of Healing) से बात की-

क्या घर के पौधे सच में मेंटल स्ट्रेस कम करते हैं? - Do indoor plants help with mental health

साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं कि इनडोर पौधे केवल सजावट का हिस्सा नहीं होते, बल्कि मानसिक सेहत पर भी गहरा असर डालते हैं। हरे-भरे पौधे देखते ही दिमाग को एक सहज सुकून का अनुभव होता है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है। डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, पौधों के साथ समय बिताना दिमाग को रिलैक्स करने का एक नेचुरल तरीका है। जब कोई व्यक्ति पौधों को पानी देता है, उनकी पत्तियों को छूता है या बस उनके पास बैठता है, तो मन वर्तमान क्षण में आ जाता है। यह प्रक्रिया माइंडफुलनेस की तरह काम करती है, जिससे बार-बार आने वाले नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है। पौधों की हरियाली आंखों को ठंडक देती है और नर्वस सिस्टम को शांत करती है, जिससे तनाव और बेचैनी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

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1. बेहतर नींद में सहायक

मेंटल हेल्थ का सीधा संबंध नींद और मूड से होता है। साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत मानती हैं कि इनडोर पौधों की मौजूदगी नींद की क्वालिटी को बेहतर बना सकती है। डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं कि जिन घरों में हरियाली होती है, वहां रहने वाले लोग खुद को ज्यादा रिलैक्स महसूस करते हैं। शांत माहौल के कारण दिमाग जल्दी शांत होता है, जिससे नींद आने में आसानी होती है। इसके साथ ही पौधों के बीच रहने से मूड हल्का और पॉजिटिव बना रहता है, जिससे चिड़चिड़ापन और थकान कम महसूस होती है।

2. पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक संतुलन

घर या ऑफिस का माहौल मानसिक स्थिति को बहुत प्रभावित करता है। जब आसपास कंक्रीट की दीवारें और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ही हों, तो दिमाग जल्दी थक जाता है। वहीं, इनडोर पौधे वातावरण में एक प्राकृतिक संतुलन लाते हैं। डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, हरियाली से भरा वातावरण ज्यादा सकारात्मक लगता है, जिससे मन में स्थिरता आती है। पौधों की देखभाल करना जिम्मेदारी और कनेक्शन की भावना पैदा करता है, जो मानसिक संतुलन बनाए रखने में मददगार होती है।

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Do indoor plants help with mental healthDo indoor plants help with mental health

3. अकेलेपन की भावना कम करे

आज के समय में अकेलापन भी एक बड़ी मानसिक समस्या बन चुका है, खासकर उन लोगों के लिए जो अकेले रहते हैं या वर्क-फ्रॉम-होम करते हैं। ऐसे में इनडोर पौधे भावनात्मक सहारा बन सकते हैं। डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं कि पौधों के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है। उन्हें रोज देखना, उनकी ग्रोथ महसूस करना और उनकी देखभाल करना अकेलेपन की भावना को कम करता है। यह एक तरह का साइलेंट कंपैनियनशिप देता है, जो मन को भरा-भरा महसूस कराता है।

क्या कहती है स्टडी

NCBI की एक स्टडी के रिजल्ट दर्शाते हैं कि इनडोर पौधों के साथ एक्टिव रूप से जुड़ाव शारीरिक और मानसिक तनाव को कम कर सकता है। यह प्रभाव सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की एक्टिविटी तथा डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर को दबाने के माध्यम से प्राप्त होता है। साथ ही, पौधों के साथ संपर्क से व्यक्ति में आरामदायक, सुकूनभरी और प्राकृतिक भावनाओं को बढ़ावा मिलता है, जो समग्र मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन में सहायक सिद्ध होता है।

निष्कर्ष

आज जब मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, तब इनडोर पौधों को अपनाना एक आसान और असरदार कदम हो सकता है। यह न तो महंगा है और न ही समय लेने वाला। डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, इनडोर पौधे तनाव कम करने, मूड बेहतर करने, नींद सुधारने और अकेलेपन को घटाने में सहायक होते हैं। इसलिए, अगर आप अपनी मानसिक सेहत को नेचुरल तरीके से बेहतर बनाना चाहते हैं, तो घर या ऑफिस में कुछ हरे पौधे जरूर शामिल करें।

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FAQ

  • तनाव और चिंता में क्या अंतर है?

    तनाव आमतौर पर किसी बाहरी दबाव या स्थिति का रिएक्शन होता है, जो समय के साथ कम हो सकता है। वहीं चिंता लंबे समय तक बनी रहने वाली बेचैनी होती है, जो बिना किसी स्पष्ट कारण के भी महसूस हो सकती है और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है।
  • खराब मेंटल हेल्थ के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?

    लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, थकान, अकेले रहने की इच्छा, ध्यान न लगना और रोजमर्रा के कामों में रुचि कम होना खराब मेंटल हेल्थ के संकेत हो सकते हैं।
  • क्या मानसिक बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो सकती है?

    कई मामलों में सही समय पर मदद, थेरेपी और लाइफस्टाइल बदलाव से मेंटल हेल्थ की स्थिति में काफी सुधार संभव है। जागरूकता और सपोर्ट के साथ व्यक्ति सामान्य और संतुलित जीवन जी सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 08, 2026 11:56 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
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