Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

रोज सुबह वॉक करने से दिमाग होगा तेज, मिलेंगे ये 5 गजब के मानसिक फायदे

मॉर्निंग वॉक से दिमाग की सेहत पर अच्छा असर होता है, रोज सुबह टहलने से तनाव कम, मूड बेहतर और याददाश्त बेहतर हो सकती है। यहां जानिए, दिमाग के लिए मॉर्निंग वॉक के फायदे क्या-क्या हैं।

सुबह की शुरुआत अगर कुछ देर की वॉक से हो, तो इसका फायदा सिर्फ शरीर की फिटनेस तक सीमित नहीं रहता, मॉर्निंग वॉक दिमाग और मेंटल हेल्थ के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा के इंटरनल मेडिसिन और मेटाबोलिक डिसऑर्डर विभाग के डॉ. अक्षय चुघ बताते हैं कि सुबह की वॉक दिन की शुरुआत को एक्टिव बनाने का एक बेहतरीन तरीका है, कुछ समय पैदल चलने से शरीर में एक्टिविटी बढ़ती है और व्यक्ति मानसिक रूप से ज्यादा एक्टिव महसूस कर सकता है।

ऐसे में रोजाना की मॉर्निंग वॉक को एक हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना फायदेमंद हो सकता है। आइए जानते हैं मॉर्निंग वॉक का दिमाग की सेहत पर क्या असर होता है?

मॉर्निंग वॉक से दिमाग को होने वाले फायदे

डॉ. अक्षय चुघ के अनुसार, रोजाना वॉक करना एक आसान एरोबिक एक्सरसाइज है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने के साथ दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचाने में सपोर्ट करती है। इससे मानसिक स्पष्टता और कॉग्निटिव फंक्शन यानी सोचने-समझने की क्षमता को फायदा (Morning walk benefits) मिल सकता है।

साल 2015 में Sports Health जर्नल में प्रकाशित पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक किर्क एरिक्सन (Kirk Erickson) की एक स्टडी से साबित होता है कि रोजाना कम से कम 1 मील पैदल चलने से बुजुर्गों में डिमेंशिया और मानसिक कमजोरी का खतरा लगभग 50% तक कम हो जाता है।

  • इस रिसर्च में 70 से 90 वर्ष की आयु के लोगों पर नजर रखी गई और पाया गया कि नियमित वॉक करने से समस्या सुलझाने और तर्क करने से जुड़े दिमाग के हिस्से (फ्रंटल लोब) का आकार और क्षमता बढ़ती है।
  • स्पष्ट है कि हमारे जीन दिमाग को आकार देते हैं, लेकिन एक्सरसाइज और सही लाइफस्टाइल से हम अपनी मेंटल हेल्थ को और ज्यादा मजबूत बना सकते हैं।

1. तनाव और एंग्जायटी कम

डॉ. अक्षय चुघ के अनुसार, लगातार तनाव मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों को प्रभावित कर सकता है। सुबह कुछ समय खुली हवा में चलना एक तरह का एक्टिव ब्रेक देता है। नियमित वॉक मूड को बेहतर करने और तनाव व एंग्जायटी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। फिजिकल एक्टिविटी के दौरान शरीर में ऐसे बदलाव होते हैं जो मूड और मेंटल हेल्थ को सपोर्ट करते हैं।

morning walk benefits for mental health

2. याददाश्त और फोकस बेहतर

डॉ. अक्षय चुघ बताते हैं कि अगर आपको काम या पढ़ाई के दौरान फोकस करने में परेशानी होती है, तो रोजाना वॉक को अपने डेली रूटीन में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। नियमित चलने से ब्रेन हेल्थ को सपोर्ट मिल सकता है।

साल 2014 में Official Journal of the American Aging Association में प्रकाशित, इंग्लिश लोंगिट्यूडिनल स्टडी ऑफ एजिंग की एक स्टडी न से पता चलता है कि बुजुर्गों में तेज चलने की स्पीड और बेहतर याददाश्त और सोचने की शक्ति के बीच एक गहरा और दोतरफा संबंध होता है।

  • इस रिसर्च में पाया गया कि जिनकी मानसिक स्थिति बेहतर होती है, उनकी चलने की स्पीड कम धीमी होती है और जो बुजुर्ग तेज चलते हैं, उनमें मानसिक गिरावट कम आती है।
  • बढ़ती उम्र के साथ ये दोनों क्षमताएं अक्सर एक साथ बदलती हैं। हालांकि, यह संबंध छोटा है, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि शारीरिक सक्रियता और दिमाग एक-दूसरे को मजबूती देते हैं।

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3. अच्छी नींद

डॉ. अक्षय चुघ बताते हैं कि मॉर्निंग वॉक का एक फायदा यह है कि इस दौरान शरीर को नेचुरल रोशनी मिलती है। सुबह की रोशनी शरीर की सर्केडियन रिद्म यानी बॉडी क्लॉक को नियमित करने में मदद करती है। इससे दिन में अलर्टनेस और रात में नींद के पैटर्न को बेहतर सपोर्ट मिल सकता है।

4. क्रिएटिविटी बढ़े

डॉ. अक्षय चुघ के अनुसार, बैठने की तुलना में सुबह उठकर एक्टिव रहने या वॉक करने से नए और इनोवेटिव आइडियाज सोचने की मानसिक क्षमता बढ़ती है। जो लोग सुबह उठकर वॉक करते हैं वो ज्यादा क्रिएटिव हो सकते हैं।

साल 2014 में Journal of experimental psychology. Learning, Memory and Congnition में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, टहलने से हमारी रचनात्मकता यानी क्रिएटिविटी तुरंत और उसके बाद भी बढ़ती है। रिसर्च में पाया गया कि ट्रेडमिल पर चलने या बाहर टहलने से लोगों के नए विचार सोचने और वैकल्पिक उपयोग ढूंढने की क्षमता में जबरदस्त सुधार होता है।

  • घर के अंदर हो या बाहर ताजी हवा में, टहलने के बाद भी रचनात्मकता का यह फायदा कुछ समय तक बना रहता है।
  • चाहे आप ट्रेडमिल पर चलें या बाहर सैर करें, चलना आपके विचारों को खुलकर बहने में मदद करता है।

5. मानसिक बीमारियों का कम खतरा

डॉ. अक्षय चुघ के अनुसार, नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक करने से उम्र बढ़ने के साथ होने वाले डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी और अल्जाइमर का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

सुबह कितनी देर टहलना चाहिए?

डॉ. अक्षय चुघ सलाह देते हैं कि अगर आप शुरुआत कर रहे हैं तो 10-15 मिनट की वॉक से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं। सामान्य तौर पर 20-30 मिनट की मीडियम तेज वॉक फायदेमंद हो सकती है।

निष्कर्ष

मॉर्निंग वॉक सिर्फ वजन और फिटनेस के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग और मेंटल हेल्थ के लिए भी एक अच्छी आदत हो सकती है। नियमित वॉक तनाव कम करने, मूड बेहतर करने, फोकस और याददाश्त को सपोर्ट करने तथा नींद के पैटर्न को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। लगातार और अपनी क्षमता के अनुसार की गई वॉक ही ज्यादा फायदेमंद होती है।

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FAQ

  • क्या वॉक करते समय मोबाइल चलाना सही है?

    अगर मोबाइल इस्तेमाल करने से आपका ध्यान भटकता है, तो वॉक के दौरान उसका इस्तेमाल कम रखना बेहतर हो सकता है।
  • मॉर्निंग वॉक से आने के बाद क्या करना चाहिए?

    मॉर्निंग वॉक से आने के बाद पानी पिएं और भिगोए हुए ड्राई फ्रूट्स के बाद फलों या अन्य हेल्दी ब्रेकफास्ट का सेवन करना चाहिए।
  • ट्रेडमिल पर दौड़ने या पार्क में टहलने, किससे ज्यादा कैलोरी बर्न होती है?

    वजन घटाने और फिट रहने के लिए दोनों ही विकल्प अच्छे हैं लेकिन ज्यादा कैलोरी किससे बर्न होगी ये बात वॉक की स्पीड, व्यक्ति की लाइफस्टाइल और हेल्थ कंडीशन पर निर्भर होती है।

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Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 17, 2026 15:52 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh

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