चिड़चिड़ापन व थकान और अनिद्रा हैं डिप्रेशन के लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 07, 2013
Quick Bites

  • हमेशा थकान जैसा महसूस करना, ऊर्जा का स्‍तर कम हो जाना।
  • किसी भी काम का निर्णय ना ले पाना और कहीं पर मन न लगना।
  • ज़िन्दगी के प्रति उलझा हुआ नज़रिया और खान-पान में बदलाव।
  • वज़न का बढ़ना-घटना, एकाग्रता खोना, अनिद्रा का शिकार होना।  

डिप्रेशन यानी तनाव एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण बहुत से हो सकते हैं। यह कभी भी किसी एक कारण से नहीं होता है बल्कि कई कारणों से मिलकर होता है जैसे केमिकल, फिज़िकल, साइकोलाजिकल। लेकिन य‍ह बहुत ही खतरनाक होता है।

Depression Symptomsएक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग एक मिलियन लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। यह मानव जीवन को किसी भी प्रकार से प्रभावित कर सकता है। वो लोग जो डिप्रेशन से परेशान होते हैं उनके व्‍यक्तिगत और व्‍यावसायिक रिश्ते भी इस बीमारी के प्रभाव से नहीं बच पाते हैं। डिप्रेशन मानव जीवन के हर भाग को प्रभावित करता है जैसे शारीर, मूड, लाइफस्टाइल और सोचने समझने की शक्ति। आइए हम आपको इसके लक्षणों के बारे में बताते हैं।

 

डिप्रेशन के आम लक्षण

  • आनन्द वाली किसी भी चीज़ में आनन्द ना उठा पाना।
  • हमेशा थकान जैसा महसूस करना।
  • ऊर्जा का स्‍तर कम हो जाना।
  • किसी भी काम का निर्णय ना ले पाना।
  • किसी भी काम में मन न लगना।
  • ज़िन्दगी के लिए एक उलझा हुआ नज़रिया होना।
  • बिना कारण वज़न का बढ़ना या कम होना।
  • खान पान की आदतों में बदलाव करना।
  • आत्महत्या के उपाय करना और आत्महत्या के बारे में सोचना।
  • मन की एकाग्रता खोना, मन का एकाग्र न हो पाना।
  • जरा सी बात पर मन खिन्‍न हो जाना।
  • हमेशा रोने का मन करना।
  • चिड़चिड़ा हो जाना।
  • नींद न आना यानी अनिद्रा का शिकार हो जाना।

 

अन्‍य बातों को भी जानें 

पुरूषों की तुलना में महिलाएं डिप्रेशन से अधिक प्रभावित होती हैं। कुछ शोधकर्ता ऐसा मानते हैं कि डिप्रेशन से वो महिलाएं प्रभावित होती हैं जिनका कोई इतिहास होता है जैसे कि वो पहले कभी सेक्सुअली एब्यूज़ हुई हों या फिर उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी हुई हो। कई दूसरी बीमारियों की तरह डिप्रेशन भी एक अनुवांशिक बीमारी है। डिप्रेशन की सामान्‍य उम्र 20 वर्ष से अधिक मानी जाती है। कुछ फिज़ीशियन ऐसा मानते हैं कि ड्रिप्रेशन दिमाग में मौजूद कैंमिकल्स में हुई गड़बड़ी से होता है इसलिए वो एण्टी डिप्रेसेंट दवाएं देते हैं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई जांच सामने नहीं आया है, जिसकी मदद से इन केमिकल्स के स्‍तर का पता किया जा सके।

 

 

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