Sun Oct 11, 2026 | 11:14 PM IST

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डायबिटीज में चने का सत्तू या जौ का सत्तू: क्या है बेहतर विकल्प? जानें एक्सपर्ट की सलाह

डायबिटीज के मरीजों के लिए चने और जौ का सत्तू दोनों ही फायदेमंद माने जाते हैं। जानें कौन सा सत्तू ब्लड शुगर कंट्रोल में ज्यादा मदद करता है।
डायबिटीज में चने का सत्तू या जौ का सत्तू: क्या है बेहतर विकल्प? जानें एक्सपर्ट की सलाहडायबिटीज में चने का सत्तू या जौ का सत्तू: क्या है बेहतर विकल्प? जानें एक्सपर्ट की सलाह

आज के समय में डायबिटीज एक तेजी से बढ़ती बीमारी बन चुकी है, जो केवल शुगर लेवल ही नहीं बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। ऐसे में मरीजों के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वे अपनी रोज की डाइट में ऐसे फूड्स को शामिल करें जो ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करें। भारतीय डाइट में सत्तू एक ऐसा सुपरफूड माना जाता है, जो न सिर्फ सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, बल्कि पोषण से भी भरपूर है। खासतौर पर चने का सत्तू और जौ का सत्तू डायबिटीज मरीजों की डाइट का हिस्सा बना जाता है। चने का सत्तू प्रोटीन और फाइबर का अच्छा सोर्स है, जो पाचन को धीमा कर ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने को रोकने में मदद करता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे वजन नियंत्रण में सहायता मिलती है। वहीं दूसरी ओर, जौ का सत्तू अपने कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और बीटा-ग्लूकन फाइबर के लिए जाना जाता है, जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। इस लेख में यशोदा अस्पताल, हैदराबाद की चीफ डाइटिशियन सुजाता स्टीफन से जानिए, कौन सा सत्तू ब्लड शुगर कंट्रोल में ज्यादा मदद करता है।

डायबिटीज में चने का सत्तू या जौ का सत्तू: क्या है बेहतर विकल्प?

डाइटिशियन सुजाता स्टीफन बताती हैं कि अगर तुलना की जाए, तो जौ का सत्तू ग्लाइसेमिक कंट्रोल के लिहाज से थोड़ा ज्यादा बेहतर होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी डायबिटीज अच्छी तरह कंट्रोल नहीं है। यह ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है और लंबे समय तक स्थिर बनाए रखता है। वहीं, चने के सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो अपनी डाइट में बैलेंस चाहते हैं। डायबिटीज के मरीजों में हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में जौ का सत्तू ज्यादा फायदा देता है। इसमें मौजूद तत्व कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे दिल की सेहत बेहतर रहती है।

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इसका मतलब है कि जौ का सत्तू सिर्फ ब्लड शुगर ही नहीं, बल्कि ओवरऑल मेटाबोलिक हेल्थ को भी सपोर्ट करता है। इसलिए जिन लोगों को डायबिटीज के साथ-साथ हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

चने का सत्तू

चने का सत्तू प्रोटीन व डाइटरी फाइबर से भरपूर होता है, डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद माना जाता है। प्रोटीन और फाइबर मिलकर पाचन प्रक्रिया को धीमा करते हैं, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। इसके अलावा, चने का सत्तू लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है। अगर किसी व्यक्ति को वजन घटाना है या ओवरईटिंग की समस्या है, तो चने का सत्तू एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

chana sattu vs jau ka sattuchana sattu vs jau ka sattu

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जौ का सत्तू

जौ का सत्तू अपने लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) के कारण जाना जाता है, इसका मतलब है कि यह शरीर में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करता है, जिससे ब्लड शुगर लंबे समय तक स्थिर बना रहता है। यह गुण उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जिनका शुगर लेवल अक्सर उतार-चढ़ाव करता रहता है।

डाइटिशियन की सलाह

डाइटिशियन सुजाता स्टीफन के अनुसार, डायबिटीज मैनेजमेंट में किसी एक चीज पर निर्भर रहने के बजाय संतुलन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है। चने और जौ दोनों के सत्तू को डाइट में शामिल किया जा सकता है, बशर्ते उनका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए।

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FAQ

  • क्या डायबिटीज में सत्तू पीना सुरक्षित है?

    बिना चीनी और सीमित मात्रा में सत्तू पीना डायबिटीज में सुरक्षित माना जाता है।
  • क्या सत्तू ब्लड शुगर कम करता है?

    सत्तू सीधे शुगर कम नहीं करता, लेकिन इसे स्थिर रखने में मदद करता है।
  • क्या रोज सत्तू पी सकते हैं?

    रोज सत्तू पी सकते हैं, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में रखें।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 29, 2026 17:27 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 29, 2026 17:27 IST

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